बक्सर जिले में लक्ष्य के एक प्रतिशत भी गेंहू की खरीददारी नही कर पाए विभागीय अधिकारी आंकड़ो के खेल में केवल वरीय अधिकारियो को करते रहे गुमराह
बक्सर जिले में तीन महीने में एक प्रतिशत भी नही हुई गेंहू की खरीददारी आंकड़ो के खेल खेलकर वरीय अधिकारियो को वर्गलाते रहे विभागीय अधिकारी बिचौलियों को गेंहू बेचने को मजबूर हुए किसान.
बक्सर-जिले के किसानों का हाल बेहाल है.ऐसी कमरे में बैठे अधिकारी केवल आंकड़ो का खेल खेलकर अपने वरीय अधिकारियो को वर्गलाने में लगे हुए है.आलम यह है कि 25 मई को रोहिणी नक्षत्र का आगमन हो रहा है.लेकिन विभाग न तो किसानों को नहरों में पानी उपलब्ध करा पाया है. और न ही उन्हें धान की बीज की कोई जानकारी दी गई है. मजबूरन किसान बाजार से महंगे दाम पर धान की बीज खरीद रहे है. कृषि समन्वयक और कृषि सलाहकार केवल कागजो पर ही सारी योजना किसानों तक पहुँचा दिए है. आलम यह है कि लक्ष्य के एक प्रतिशत जिले में गेंहू की खरीददारी विभागीय अधिकारी तीन महीने में नही कर पाए है. मजबूरन किसान बिचौलियों को अपना गेंहू की फसल औने पौने दाम में बेचकर खरीफ की खेती करने में जुट गए है.
30 हजार एमटी खरीदने का मिला था लक्ष्य
सरकार विभागीय अधिकारियो को 30 हजार एमटी जिले के किसानों से गेंहू खरीदने का लक्ष्य विभाग को दी थी.लेकिन समय सीमा के भीतर तीन महीने में लक्ष्य के एक प्रतिशत भी गेंहू की खरीददारी विभागीय अधिकारी नही कर पाए. मजबूरन किसान व्यपारियो को औने- पौने दाम में गेंहू की फसल बेच दी.
क्या कहते है विभागीय अधिकारी
गेंहू खरीददारी को लेकर हमने डीएसओ परवीन सिन्हा से बात की तो उन्होंने बताया कि.सरकार के द्वारा 30 हजार मीट्रिक टन गेंहू की खरीद करने का लक्ष्य दिया गया था. लेकिन मात्र 15 सौ मीट्रिक टन ही गेंहू की खरीददारी की गई है.जो लक्ष्य के एक प्रतिशत भी नही है.
किसानों ने अधिकारियो को दिखाया आईना
वही गेंहू की विक्री करने में उतपन्न हो रहे समस्या को लेकर, हमने जिले के एक दर्जन से अधिक किसानों से बात की, जिले किसान मनोज साह, लाल बिहारी गोंड, विमल यादव, महिला किसान अलका पांडेय ने बताया कि, सरकार के द्वारा 2275 रुपये प्रति क्विंटल के दर से गेंहू की खरीद करने की बात कही जा रही है. लेकिन विभागीय अधिकारी और सहकारी संस्थाए किसानों का ही दोहन करने में लगते है.जब सहकारी संस्थाओं में हमलोग फसल लेकर जाते है. तो गेंहू के बोरे का पैसा, उसकी पालदारी, वजन कराने का पैसा, वाहन खर्च, के अलावे प्रत्येक क्विंटल 2 किलो गेंहू अधिक लिया जा रहा था.सभी खर्च जोड़ने के बाद गेंहू 1800 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रहा था.जबकि व्यपारी घर से ही आकर 21 रुपये प्रति क्विंटल गेंहू की खरीद करके चले गए.
गौरतलब है कि जिले में 97 हजार हेक्टेयर भूमि पर 2 लाख 22 हजार रजिस्टर्ड किसानों ने गेंहू फसल की खेती की थी. बम्पर उत्पादन के बाद भी किसानों की गेंहू के गेंहू खरीदने में विभाग नाकाम रहा यही हालत धान की खरीददारी के दौरान हुआ था. मात्र 30 प्रतिशत लक्ष्य के खरीददारी हुई थी.

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