6 जुलाई को शहर के नगर भवन में होगा सनातन महासम्मेलन, बोले पूर्व आईआरएस अधिकारी!

 शहर के नगर भवन में रविवार को होगा सनातन महासम्मेलन, मुख्य अतिथि होंगे जिले के आम नागरिक.पूर्व आईआरएस ने कहा बक्सर बने अयोध्या, और प्रयागराज जिसको लेकर निरन्तर करूंगा प्रयास !



बक्सर- उत्तरायणी गंगा की तट पर बस यह बक्सर शहर, अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. बदलते समय के साथ मिट रही इसकी पहचान को बचाने के लिए,कई स्तर पर पहल किया जा रहा है. हाल ही में पूर्व आईआरएस अधिकारी बिनोद चौबे, ने बिहार के राज्यपाल से मुलाकात कर, बक्सर को बिहार का आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, एवं बौद्धिक राजधानी बनाने की मांग की है. 

मंदिर के पुजारियों को मिले मासिक वेतन

शहर के स्थानीय होटल में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए, बिनोद चौबे ने बताया कि, बक्सर का महत्व अंतराष्ट्रीय स्तर पर कैसे बढ़े इसको लेकर, निरन्तर प्रयासरत हूँ. हाल ही में बिहार के गवर्नर से मुलाकात कर हमने बक्सर को बिहार का धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, और बौद्धिक राजधानी बनाने की मांग करते हुए, बक्सर को राष्ट्रीय, एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक केंद्र बिंदु के रूप में विकसित करने की ज्ञापन सौंप कर मांग की है.

मंदिर के पुजारियों को मिले मासिक वेतन

इस दौरान उन्होंने कहा कि, मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी हो, या शादी कराने वाले ब्राह्मण, सभी को सरकार कम से कम 25 हजार का मासिक वेतन दे, आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण समाज के इस बर्ग के लोगो को तंगहाली का जीवन जीना पड़ रहा है.

अयोध्या और प्रयागराज के तर्ज पर हो बक्सर का विकास

वही उन्होंने कहा कि लंबे समय से इसकी लड़ाई मैं लड़ रहा हूँ. इसका चुनावी बर्ष से कोई लेना देना नही है.बक्सर शहर का अयोध्या और प्रयागराज के तर्ज पर विकास हो. इस शहर का सब कुछ एक सिष्टम मे हो इसको लेकर, समाज के अन्य लोगो को भी आगे आना चाहिए, राम के जन्म भूमि अयोध्या का तो खूब विकास हुआ.लेकिन कर्म भूमि बक्सर का जितना विकास होना चाहिए नही हुआ.

गौरतलब है की उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा यह शहर कई मायनों में  अन्य तीर्थस्थलों से अलग है. त्रेतायुग में भगवान राम ने महर्षि विश्वामित्र के आदेश पर इस नगरी को राक्षस विहीन के पांच कोष की परिक्रमा यात्रा की थी.तब से यह परंपरा चली आ रही है. इन धार्मिक धरोहरों को बचाने के लिए अब पूर्व आईआरएस विनोद चौबे ने सरकारी नौकरी को ठोकर मार इस शहर को संवारने की दिशा में निरन्तर प्रयास कर रहे है.

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