गौशाले के जमीन पर बने पुराने मार्केट के ऊपर नए निर्माण कार्य के लिए किसने दी मौन सहमति! नप के अधिकारियों ने खड़ा किया हाथ!
ये बिहार का बक्सर है साहब ! नगर परिषद ने नही दिया इजाजत फिर भी गौशाले में पुराने कटरे के उपर कैसे बनने लगा नए कटरा ! एसडीएम ने लगाई रोक तो खुला राज. किसकी मौन सहमति से हो रहा था निर्माण कार्य!
बक्सर- शहर के बीचोबीच स्थित आदर्श गौशाला इन दिनों सुर्खियों में है.शनिवार के दिन एक गाय की मौत होने के बाद, जैसे ही मीडिया में खबर प्रकाशित हुई, जिलाधीकारी के आदेश पर सदर एसडीएम अविनाश कुमार ने जांच शुरू की तो वँहा की कुव्यवस्था को देख अधिकारी भी हैरान रह गए, एसडीएम गौशाले की आय ब्यय से लेकर, अन्य दस्तावेज की जब मांग की तो कोई भी दस्तावेज कमिटी के द्वारा उपलब्ध नही कराया गया.इस दौरान गौशाले की जमीन पर बने मार्केट के ऊपर हो रहे नए निर्माण कार्य को लेकर जब मीडिया ने सवाल पूछा तो एसडीएम ने साफ शब्दों में कहा कि ,इसके निर्माण कार्य से सम्बंधित कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नही किया गया है.जिसके कारण इस निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जा रही है.जिसके बाद तथा कथित समाज सेवियों एवं सफेदपोशों के बीच हड़कम्प मच गया.ऐसे में अब स्थानीय लोग सवाल उठा रहे है.की शहर के बीचोबीच हो रहे इस निर्माण कार्य पर सम्बंधित अधिकारियों ने पहले ही रोक क्यो नही लगाई! किसकी मौन सहमति से इस निर्माण कार्य को कराया जा रहा था.
नप के अधिकारियों ने खड़ा किया हाथ!
नगर परिषद क्षेत्र में गौशाले की जमीन पर बने मार्केट के ऊपर नए निर्माण कार्य को लेकर अब नप के अधिकारियों ने भी हाथ खड़ा कर लिया है. नप के सम्बंधित अधिकारियों की माने इस निर्माण कार्य के लिए नगर परिषद कार्यालय के द्वारा किसी तरह की न तो स्वीकृति पत्र जारी किया गया है.और न ही किसी ने आवेदन देकर इस निर्माण कार्य के लिए एनओसी लिया है.ऐसे में नप के अधिकारी भी सवालों के घेरे में है. की नप कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर बिना इजाजत के जब निर्माण कार्य कराया जा रहा था.तो नप के अधिकारियों ने क्यो चुप्पी साध रखी थी? किसके मौन सहमति से इस कार्य को कराया जा रहा था. नए कटरा बनाने की आवश्यकता क्यो पड़ गई?
शिकायत मिलने के बाद एसडीएम ने टेलीफोन से ली थी जानकारी!
गौशाले में बने पुराने मार्केट के ऊपर हो रहे नए निर्माण कार्य को लेकर, जब एसडीएम से पत्रकारों ने सवाल पूछा तो, उन्होंने बताया कि, गौशाले के सचिव से उंन्होने टेलीफोन से बात की,तो बताया गया की सब कुछ नियमानुसार कराया जा रहा है.जब उक्त स्थल पर पहुँच एसडीएम ने निर्माण कार्य से सम्बंधित दस्तावेज की मांग की, तो कोई भी दस्तावेज नही दिखाया गया.जिसके बाद तत्काल इस निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई.
स्थानीय लोगों ने कहा जड़ से इलाज करे अधिकारी !
प्रशासन की सख्त तेवर के बाद अब सोशल मीडिया से लेकर अन्य माध्यम से लोगो ने गौशाले को संरक्षित करने के लिए मोर्चा खोल दिया है.प्रशासन के इस कदम को लोगो ने जमकर सराहना करते हुए, जिला प्रशासन के अधिकारियों से मांग की है. की प्रशासन जड़ से इस बीमारी का इलाज कर दे. जिससे कि 112 साल पुराने गौशाले में रह रही गायों की रख रखाव बेहतर ढंग से हो सके, और दोषियों की पहचान हो जाये.
इस खेल का असली खिलाड़ी कौन?
जिस गौशाले के पास अरबो की सम्पति है. उसमें रह रही गायों की दुर्दशा के पीछे का असली खिलाड़ी कौन है ?.इस बात की चर्चा शहर के पान दुकानों से लेकर चौक चौराहो पर हो रही है. लोगो की माने तो कई बड़े -बड़े भूप का चेहरा बेनकाब हो रहा है. जिसके कारण वह हर हथकंडे को अपनाकर इस पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में लगे हुए है. देर रात तक बैठको का दौर चला जिसमे शहर के कई बड़ी नामी हस्तियों ने भाग ली. जिसकी एक तस्वीर भी सामने आई है. अलग-अलग लोग इस मुश्किल से निकलने के लिए अपना अपना सुझाव देते नजर आ रहे है.
प्रलोभन से नही बनी बात, तो षड्यंत्र करने हो रही है तैयारी!
गौशाले की मुद्दा तूल पकड़ने के बाद कई तरह के प्रलोभन, के साथ डर वाला भूत दिखाने का प्रयास किया जा रहा है. अलग-अलग मोबाइल नम्बरो से फोन कर लोग कई तरह की दुहाई दे रहे है. लेकिन वह इस बात को भूल जा रहे है.की झूठ के नाव पर बैठकर समंदर की लहरों को पार नही किया जा सकता है .यह लड़ाई किसी व्यक्ति से किसी व्यक्ति का नही है. बल्कि उन अनबोलता जीवो के जीवन रक्षा के लिए है.जिसे हमारे धर्मग्रन्थो में माँ कहा गया है.
गौरतलब है कि गौशाले की मुद्दा को लेकर सैकड़ो लोगो ने बक्सर के अलावे अलग- अलग जिले से फोन कर इस लड़ाई में साथ होने की बात कहकर, हौसले को अफजाई किया. उन तमाम लोगो को धन्यवाद ! साथ ही गौ और गंगा पर सियासत करने वाले वैसे राजनेताओं से भी अपील है. की कथनी में नही वास्तविक जीवन मे इस विषय को धरातल पर उतारकर इनके संरक्षण के लिए पहले करे. न कि कुर्सी के लिए!



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