बक्सर में लौटा जंगल राज दो टकिया गुंडे ने बीच बाजार में मेरे पति के नही पुलिस के गाल पर मारा है तमाचा ! बोली दुर्गावती चतुर्वेदी अपराधी को जाती से जोड़कर देख रहे है कुछ चवन्नी छाप नेता !
बक्सर में ‘गुंडाराज’ से सहमा भाजपा कार्यकर्ता का परिवार ! बीजेपी नेत्री दुर्गावती चतुर्वेदी का फूटा दर्द—“ कहा दो टाकिया गुंडा ने बीच बाजार में पति को किया अपमानित !” डर से “बच्चे नही जा रहे है स्कूल. अब तो घर से निकलने में भी लगता है भय,” वीडियो वायरल होने के बाद सियासी गलियारों में भी मचा हड़कंप, पार्टी नेताओं के खामोशी पर लोगो ने उठाया सवाल ! कहा क्या सज्जन लोगों को सम्मान से जीने का नही है अधिकार ?”
बक्सर- बिहार की राजनीति के गढ़ बक्सर में एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं. मामला भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता के परिवार से जुड़ा है, जिसने अपने ही पार्टी की सरकार के कार्यकाल में भय और अपमान का ऐसा दौर देखा कि पूरा परिवार सहम उठा है. घटना ने न केवल स्थानीय राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगो का भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऐसे दो टकिया गुंडे के डर से कोई सज्जन व्यक्ति इस शहर में नही रहेगा. जिसको लेकर लोगो का गुस्सा सातवे आसमान पर है. स्थानीय लोगो ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना के खिलाफ जंग छेड़ दी है. वही कुछ लोग इस घटना को जातीय रंग देकर अपना सियासी रोटी सेकने के फिराक में लगे हुए है., जिसके बाद बीजेपी नेत्री दुर्गावती चतुर्वेदी ने मीडिया के सामने अपने दर्द को शब्दों में बयां करते हुए कहा की,“दो टाकिया गुंडा ने मेरे पति को भरे बाजार में अपमानित किया, थप्पड़ मारा और फिर वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. आज मेरे बच्चे शर्म से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. हमारा परिवार डर के साये में जी रहा है.”
अपने ही शहर में लगने लगा है डर !
बीजेपी नेत्री ने कहा कि यह घटना बक्सर शहर के बीचोबीच हुई, जहां लोगों की मौजूदगी के बावजूद अपराधी प्रिंस सिंह नामक व्यक्ति ने उनके पति को सार्वजनिक रूप से हथियार के बल पर प्रताड़ित किया. और उसके बाद वीडियो सोशल मीडिया में डाल दिया. जिससे परिवार की प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुँची. बच्चे सदमे में है और लज्जा के मारे स्कूल नही जा रहे है.
एक परिवार के मुंह पर नही पुलिस के मुंह पर अपराधी ने मारा है तमाचा !
दुर्गावती चतुर्वेदी ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक परिवार का अपमान नहीं, बल्कि पूरे समाज में भय का माहौल पैदा करने की कोशिश है. उन्होंने सवाल उठाया कि “जब एक सत्ताधारी दल की महिला नेत्री के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही, तो आम जनता कैसे सुरक्षित महसूस करेगी?” अपराधियो ने बीच बाजार में मेरे पति के गाल पर नही पुलिस के गाल पर तमाचा मारकर खुलयाम चुनौती देकर यह बताया है. की फोटो खिंचवाने से नही बाहुबल से कानून का पालन कराना पड़ता है.
केवल कोरम पूरा करने में लगा है प्रशासन !
उन्होंने प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है.“यहां अपराधी जाति के नाम पर खुद को बचाने में लगे हैं और पार्टी के ही कुछ चवन्नीछाप नेता ऐसे लोगों को सियासी रंग देकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं. अपराधी की कोई जाति या मजहब नहीं होती, लेकिन दुर्भाग्य है कि बिहार में अपराध को अब राजनीति और जाति से जोड़ दिया जा रहा है।”
बक्सर में लौटा जंगल राज !
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि उनके पति के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार को देखकर ऐसा लगता है मानो बक्सर में फिर ‘जंगलराज’ लौट आया हो.यह वही बक्सर है, जिसने आज़ादी के बाद से कई सांसद और मंत्री दिए, लेकिन अब यहां सज्जन व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार ही नहीं बचा”!
बक्सर में गिरती क़ानून व्यवस्था का खुला पोल !
शहर के बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि यह घटना बक्सर की गिरती कानून व्यवस्था की एक और मिसाल है. बक्सर जैसे शांत माने जाने वाले जिले में खुलेआम इस तरह की गुंडई यह दिखाती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं. और पुलिस कमज़ोर पर ही अपना जोर आजमाइश करने में लगी है.
परिवार को मिले सुरक्षा !
दुर्गावती चतुर्वेदी ने सरकार से मांग की है कि उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए और इस प्रकरण की जांच निष्पक्षता के साथ के साथ करके इस घटना में शामिल सभी अपराधियो की गिरफ्तारी हो.“यह सिर्फ मेरा दर्द नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की आवाज़ है जो आज डर के साये में जी रहा है. हमें न्याय चाहिए, सियासत और कोरम पूरा नही”
गौरतलब है कि बक्सर की यह घटना अब पूरे बिहार में कानून-व्यवस्था पर बहस का मुद्दा बन चुकी है. लोग सवाल पूछ रहे हैं—क्या बिहार फिर उसी दौर में लौट रहा है, जहां सच्चे लोगों को झुकना पड़ता था और अपराधी खुलेआम घूमते थे?


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