शहर में नही है कहि भी वाहन पार्किन स्थल उसके बाद भी धड़ल्ले से वाहनों के काटे जा रहे है चलान

 


शहर में नही है कहि भी वाहन पार्किंग स्थल फीर भी धड़ल्ले से काटे जा रहे है चलान, सरकारी भूमि पर रसूखदारों ने कर रखा है कब्जा. मूकदर्शक बने जिला प्रशासन के अधिकारी आम जनता भुगत रहा है खामियाजा


बक्सर- जिले में आदर्श आचार संहिता लागू होने के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से अलर्ट है. कानून व्यवस्था को बनाये रखने के लिए लिए प्रशासनिक अधिकारी निरन्तर वाहन जांच अभियान चला रहे है.जिससे कई बड़ी सफलता भी मिली है तो आम लोगो को परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है. हैरानी की बात है कि जिस शहर में केवल मुंडन संस्कार के लिए एक दिन में लाखों लोग रामरेखा घाट पर पहुँचते है. उस शहर के किसी भी इलाके में एक भी वाहन पार्किंग स्थल नही है. उसके बाद भी ट्रैफिक पुलिस धड़ल्ले से चलान काटकर जुर्माना की राशि लोगो से वसूल रही है. जिससे लोग परेशान है.

क्या कहते है जिलेवासी

जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के मठिया गांव से अपनी माँ के लिए दवा लेने नगर थाना क्षेत्र के पिपरपति रोड में पहुँचे विराट कुमार,  दवा दुकान के सामने अपने दोपहिया वाहन को  लगाकर दवा खरीद रहे थे. इसी दौरान बाइक की चालान काट दी गई, पीड़ित ने बताया कि जब उसने ट्रैफिक पुलिस के कर्मीयो से कहा कि वाहन पार्किंग की व्यवस्था करा दीजिये वाहन वही लगाएंगे. उसके बाद यह कहते हुए जुर्माना की राशि ले ली गई, कि वाहन पार्किंग की व्यवस्था करना हमारी जिम्मेवारी नही है.

लोगो की माने तो ट्रैफिक पुलिस आम लोगो के साथ मनमानी कर रही है. सुविधा होने के बाद हम गलतीं करते तो हम जुर्माना खुशी खुशी देते लेकिन यंहा तो प्रशासन की गलतियो की  सजा आम लोग भुगत रहे है.

क्या कहते है जिम्मेवरान

पार्किंग की व्यवस्था नही होने के कारण लोगो की हो रही परेशानियो को लेकर, जब नगर के चेयरमैन पति नेमतुला फरीदी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि, प्रशासन को कई बार इस समस्या को लेकर कई बार लिखित रूप से हमने अधिकारियो को दी लेकिन इस समस्या को दूर करने की जहमत किसी ने नही उठाई. जिसका खामियाजा निर्दोष लोग भुगत रहे है.


गौरतलब है शहर के नगर थाना से लेकर ,रामरेखा घाट के इलाके में जितने भी सरकारी भूमि है उस पर अधिकारियो के अर्दली से लेकर, जनप्रतिनिधियो ने कब्जा कर बड़ी बड़ी इमारत बना ली उन रसूखदारों से सरकारी भूमि वापस लेने के बजाए नगर परिषद के अधिकारी फुटपाथी दुकानदारों पर ही अपनी ताकत दिखाते है.

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