लापरवाह सिस्टम के बेपरवाह अधिकारी न किसानों को बीज मिली न नहरों में आई पानी, ऐसी कमरे में बैठकर अधिकारी फाइलों में ही दौड़ा रहे है कागज की घोड़े
लापरवाह सिस्टम के बेपरवाह अधिकारी, बिचड़ा डालने के लिए बून्द बून्द पानी के लिए तरस रहे है किसान, न बीज मिला न नहरों में आई पानी
बक्सर-जिला प्रशासन के अधिकारियो की लापरवाही के कारण जिले के किसान परेशान है. शरीर को झुलसा देने वाली इस गर्मी में लगातार अधिकारियो के कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी किसानों को न तो बीज मिला और न ही नहरों में पानी ही आई . किसान अपने दुर्भाग्य को कोस रहे है. और आसमान की तरह टकटकी निगाहों से देख रहे है.
जिले में 2 लाख 22 हजार 947किसानों के द्वारा की जाती है 1 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती
जिले के 2 लाख 22 हजार 947 किसानों के द्वारा 1 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान फसल की खेती की जाती है.अधिकांस किसानों के द्वारों रोहिणी नक्षत्र में ही धान का बिचड़ा डाल दिया जाता है.लेकिन लेकिन मात्र 5 प्रतिशत किसान ही रोहिणी नक्षत्र में निजी नलकूप के सहारे बिचड़ा डाल पाए है.और कृषि विभाग के अधिकारी ऐसी कमरे में बैठकर कागजी घोड़े को फाइलों में ही दौड़ा रहे है.जबकि जमीन पर न तो नहरों में पानी आई और न किसानों को बीज मिला. किसान अपने दुर्भाग्य को कोस रहे है कि इस बार समय से धान की बिचड़ा नही डाल पाए, तो उनकी बिटिया की पढ़ाई से लेकर बूढ़े माँ बाप की दवाई का पैसा कहा से आएगा.
निजी बीज दुकानदारो की चांदी ही चांदी मनमाने दाम पर बेच रहे है बीज
रोहिणी नक्षत्र बीत जाने के बाद भी, जिले के किसानों को अधिकारी न तो बीज उपलब्ध करा पाए, और न ही उनको नहरों में पानी ही उपलब्ध कराया गया. मजबूरन अन्नदाता निजी दुकानदारो से 6 हजार की जगह 9 हजार से लेकर 10 रुपये प्रति क्विंटल बीज की खरीददारी करने को बजबुर है. किसानों की माने तो प्रत्येक साल विभाग पहले निजी दुकानदारो को बीज की बिक्री करने की पूरी छूट देता है. और अंतिम समय मे बीज लाकर विभाग कोरम पूरा करता है
अधिकारियो के साथ मौसम भी हुआ बेरहम
जिला प्रशासन के अधिकारियो के बेरहमी के साथ ही साथ आसमान से बरसती आग, और पछुआ हवा की थपेड़ो ने किसानों के फौलादी हौसले को भी पस्तोपस्त कर दिया है. अपने बिछड़े को बचाने के लिए दिन रात किसानों खेतो की पगडंडिओ पर बैठकर बिचड़े में पानी का छिड़काव करते नजर आ रहे है.जिले के किसान लालबिहारी ने बताया कि, एक सप्ताह तक जिला कृषि पदाधिकारी से मिलने की कोशिश किया लेकिन गेट पर से ही कर्मी यह कहकर लौटा देते थे कि साहब बिजी है. मजबूर होकर चुरामनपुर से निजी दुकान से बीज की खरीददारी की. किसानों के इस आरोप को लेकर जब जिला कृषि पदाधिकारी के सरकारी नम्बर पर फोन किया गया तो किसी ने कॉल रिसीव नही की
गौरतलब है कि बिहार के शाहबाद क्षेत्र को धान कटोरा कहा जाता है. 25 मई से पहले ही जिले के किसानों को नहरों में पानी मिल जाता था. हैरानी की बात है कि 13 जून बीत जाने के बाद भी न नहरों में पानी आई और न ही इंद्र की कृपा बरसी

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