राजनिति के किस रावण का वध करेंगे भाजपा नेता मिथलेश तिवारी ! टूटेगा गुरु का गुरुर
सियासत के किस रावण रूपी नेता का होगा वध, इसारो- इसारो में ही भितरघात करने वाले अपने ही पार्टी के किस बागी नेता को मिथलेश तिवारी ने दे डाली खुली चेतावनी. कहा केकयी के कपार पर नही बैठी होती मंथरा तो राम का नही होता बनवास, वनवास खत्म होने के बाद होगा रावण का वध.
बक्सर-स्थानीय लोकसभा सीट पर राजद सांसद सुधाकर सिंह के हाथों मिली हार के बाद , बीजेपी लोकसभा प्रत्यासी मिथलेश तिवारी इस लोकसभा क्षेत्र के सभी 6 विधानसभा में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर हार की समीक्षा कर रहे है. भाजपा के इस अभेद किला में मिली करारी हार के बाद पार्टी के नेता उन जयचन्दों की तलाश कर रहे है. जिन्होंने भितरघात कर राजद नेताओ की मदद की थी. इसी बीच भाजपा नेता मिथलेश तिवारी का एक बयान काफी ट्रेंड कर रहा है.जिसमे वह चेतवानी भरे लहजे में कहते दिखाई दे रहे है.की 5 साल में भाजपा का वनवास खत्म होते ही, रावण का वध होगा.मिथलेश तिवारी के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक, पार्टी के पूर्व सांसद अश्विनी कुमार चौबे से जोड़कर देख रहे है. जिन्होंने टिकट कटने के बाद पार्टी के प्रत्याशी मिथलेश तिवारी का खुलकर विरोध किया था.
क्या कहते है मिथलेश तिवारी
मीडिया के सवलो का जवाब देते हुए, भाजपा नेता मिथलेश तिवारी ने कहा कि, 6 दिन के लिए बक्सर प्रवास पर हूँ. इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्र में हार की समीक्षा पार्टी कर रही है.की भी न हारने वाले सीट हम कैसे हार गए है. हम सभी भाजपा के नेता है .न हार से हताश होते है.न जीत का गुरुर होता है.एक बात तो साफ है कि, अयोध्या में मंथरा, केकयी के कपार पर नही बैठी होती तो राम को वनवास नही होता.अपने बीच के ही मंथरा रूपी नेताओ के कारण बक्सर में भाजपा को पांच वर्ष का वनवास हुआ है.लेकिन यह तय है कि वनवास खत्म होते ही उस अहंकारी रावण का वध होगा. उसका समीक्षा पार्टी हर फोरम पर कर रही है.
Byte मिथलेश तिवारी भाजपा नेता पूर्व लोकसभा प्रत्याशी
क्या कहते है राजनीतिक विश्लेषक
बीजेपी नेता मिथलेश तिवारी के इस बयान को भाजपा के पूर्व सांसद अश्विनी कुमार चौबे से जोड़कर देखा जा रहा है. जानेमाने राजनीतिक विश्लेषक, अधिवक्ता महावीर यादव, की माने तो, भाजपा नरेंद्र मोदी के कैम्पेनिंग के बाद भी बक्सर लोकसभा सीट हार गई है. निश्चित रूप से यह मंथन का विषय है. हार के कई कारणों में से एक तो प्रमुख कारण पार्टी नेताओं का भितरघात है. अपने ही प्रत्याशी के विरोध में जिस तरह से निवर्तमान सांसद बयान दे रहे थे, उसका विपक्ष ने भरपूर इस्तेमाल किया.साथ ही भाजपा के इस हार में पूर्व आईपीएस आनन्द मिश्रा ने आग में घी डालने का काम किया. तमाम विपरीत परिस्थितियो के बाद भी 4 लाख 8 हजार भोट पाना सामान्य बात नही है.
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के साथ ही भाजपा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में जोरशोर से लग गई है.यह तय माना जा रहा है कि भाजपा के कई बड़े नेताओं पर समीक्षा के बाद गाज गिरेगा.9

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