बक्सर में सरकारी जमीन को अपना जागीर समझते है भू- माफिया, बहती गंगा में डुबकी लगाने में पीछे नही है सरकारी कर्मी

 



अरबो की सरकारी जमीन को अपना जागीर समझकर,  भू माफियाओं ने कर ली कब्जा, झोपड़ी उजाड़कर पीठ थपथपाते रहे अधिकारी , बहती गंगा में डुबकी लगाने में पीछे नही है सरकारी कर्मचारी


 बक्सर- नगर परिषद क्षेत्र में अरबो की सरकारी जमीन को भू - माफियाओ ने अपना जागीर समझकर कब्जा कर ली है. आलम यह है कि जल जीवन हरियाली योजना के तहत, जिन सरकारी जल स्त्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने की जिम्मेवारी जिला प्रशासन, एवं नगर एवं नगर परिषद के अधिकारियो के कंधे पर है. उनका भी हाथ दबंगो के गैर कानूनी तरीके से बने बड़ी-बड़ी इमारतों तक नही पहुँच पा रहा है. केवल कोरम पूरा करने के लिए, कमजोर एवं निसहाय लोगो की झोपड़ीयो को उजाड़कर अधिकारी अपना पीठ थपथपा  रहे है. 

विश्राम सरोवर से लेकर जासो तालाब पर हो गया अतिक्रमण

नगर परिषद कार्यालय से दो कदम की दूरी पर स्थित, भगवान राम से जुड़े त्रेतायुग के उस विश्राम सरोवर से लेकर, तड़कनाला एवं जासो पोखरे की लगभग सात विघे जमीन पर दिन के उजाले में भू माफियाओं ने कब्जा कर ली. और किसी सरकारी बाबू ने आपत्ति तक नही जताई. हैरानी की बात है कि जिस रास्ते से जिले के तमाम बड़े अधिकारी गुजरते है उसके बाद भी उन्हें इस बात की जानकारी क्यो नही हुई, या जान बूझकर विभागीय कर्मीयो ने अपने अधिकारियो को इस बात की जानकारी नही होने दी.

बहती गंगा में सरकारी कर्मचारियो ने भी लगाई है डुबकी

सरकारी जमीन को अपना जागीर समझने वाले भू माफियाओं की सूची में , सरकारी विभाग से जुड़े कर्मी भी पीछे नही है. और बहती गंगा में   खूब डुबकी लगाए है.  पुराने सदर अस्पताल रोड़ में नगर परिषद के ही रिटायर्ड कर्मी ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर अपना आशियाना बना ली . तो वही स्टेशन रोड में शहर के बीचोबीच जिला प्रशासन के एक कर्मी ने मुख्य सड़क पर सरकारी जमीन कब्जा कर ली. मीडिया में कई बार खबर प्रकाशित होने के बाद भी इस पर संज्ञान नही लिया गया.

 शहर में नही है पार्किंग स्थल फीर किस बात का जुर्माना

शहर में आये दिनों लग रहे जाम एवं सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर,  कांग्रेस नेता गोपाल त्रिवेदी ने जिला प्रशासन के साथ ही, नगर परिषद के अधिकारियो पर निशाना साधते हुए कहा कि, पूरा शहर में जंगल राज है. जिसको मन किया सरकारी जमीन कब्जा कर ली, तो कोई तलाब और जल स्त्रोत को ही अपना जागीर समझकर ठिकाना बना लिया. आज बक्सर की हालात बद से बदतर है. जिस शहर में केवल एक दिन में 5 लाख की भिंड  गंगा  स्नान करने के लिए आती है. उस शहर में एक पार्किंग स्थल तक नही है. और अधिकारी जमीन का रोना रो रहे है. ऐसे में क्या यह मान लिया जाए कि जिसने जितनी सरकारी जमीन कब्जा कर ली वह उसी का हो गया. 

क्या कहते है जिम्मेवार

इस मामले को लेकर नगर परिषद के चेयरमैन प्रतिनिधि नेमतुला फरीदी ने बताया की, चाहे वह तड़कनाला की सरकारी भूमि हो या अंग्रेज कब्रिस्तान, स्टेशन रोड, विश्राम सरोवर, जासो पोखरा , किला मैदान के आसपास की सभी जगहों को चिन्हित कर अंचलाधिकारी को भेजा जा रहा है.जल्द ही सभी सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा. जंहा पार्किंग स्थल से लेकर शहर के विकास में उन स्थलों का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही विश्राम सरोवर से लेकर जासो में स्थित तलाब की जीर्णोद्धार कर उसे आकषर्क बनाया जाएगा.


गौरतलब है कि सरकारी जमीन को अपना जागीर समझकर बड़ी बड़ी इमारतों को बना लेने के बाद अब भू माफियाओं की  निगाहे सोन कैनाल नहर की जमीन पर टिकी हुई है. और शहर के बीचोबीच ज्योति चौक से लेकर अन्य इलाकों में कब्जा करना  शुरू कर दिया है. और नप के अधिकारी उनपर कार्रवाई करने के बजाए छोटे छोटे दुकानदारो का चूल्हा तोड़ने और ठेला हटाने में लगे है.

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