बक्सर जिले में सुखाड़ से मचा हाहाकार!
बक्सर जिले में सुखाड़ से मचा हाहाकार!
सुखाड़ की मार से बीमार है जिले के किसान. खेतो के साथ अन्नदाताओं के सीने पर भी पड़ी दरारे ,राजधानी पटना से लेकर बक्सर तक ऐसी कमरे में अधिकारी सहायता के नाम पर दौड़ा रहे है कागज की घोड़े
बक्सर- जिले के ग्यारहों प्रखण्ड में सुखाड़ से हाहाकार मचा हुआ है. प्राकृति के साथ अधिकारियो की दागेबाजी से परेशान किसानों के खेतो के साथ अब उनके सीने पर भी दरारें पड़ने लगी है. आलम यह है कि 50 डिग्री तापमान खुले आसमान के नीचे परिश्रम कर धान की बिचड़ा को बचाकर पानी का इंतजार कर रहे अन्नदाताओं की फौलादी हौसले भी अब पस्त होने लगा है. जिले के अधिकारी ऐसी कमरे में बैठकर, किसानों की समस्याओं को दूर करने के बजाए, राजधानी पटना से लेकर बक्सर तक बैठक कर कोरम पूरा करने में लगे हुए है.
न बारिश हुई न नहरों में पानी आई
जुलाई महीने समाप्ति की ओर है. जिले में अब तक न तो प्राकृत मेहरबान हुई, और न ही अधिकारियो की कृपा बरसी, आलम यह है. कि धान के बीचड़ो के साथ खेतो में लगी फसलें भी अब सूखने लगी है. पूरे जिले में अब तक 199.63 मिली मीटर ही बारिश हुई है.
किस प्रखण्ड में हुई कितनी बारिश
साल 2024 में अब तक जिले के कुल ग्यारह प्रखण्ड में औसत से भी काफी कम बारिश हुई है.
ब्रह्मपुर - 231.2 m m
बक्सर- 246.4
चक्की- 198. 2
चौगाई- 174 .2
चौसा- 170.0
डुमराँव- 192.2
इटाढ़ी- 224.4
केसठ- 214.0
नावानगर-184.2
राजपुर- 143.8
सिमरी- 217.3
पूरे जिले में औसत बर्षा का रिपोर्ट 199.63 m
चुनाव के बाद गायब हो गए है किसानों के कथाकथित नेता
देश मे जब भी लोकसभा या विधानसभा का चुनाव होता है. मुद्दे में किसान और कृषि होता है. लेकिन चुनाव जीतने के साथ ही नेताओ के चाल और चरित्र भी बदल जाता है. खेतो में लगी धान की फसल को बचाने के जदोजहद कर रहे जिले के किसान लालबिहारी गोंड़, एवं महिला किसान सोनी देवी , ने वर्तमान सांसद एवं विधायको पर अपना भड़ास निकालते हुए कहा कि, खुद को किसानों का नेता बताकर चुनाव जीतने वाले हमारे सांसद साहेब और विधायक जी लोग पता नही कहा गायब हो गए है. नहरों के अंतिम छोर तक पानी पंहुचाने का दावा कर, नहरों को ही प्यासा छोड़ दिया है . सभी के सभी नेता एक ही चक्की के दो पार्ट है. जो हमे मूर्ख बनाने में सफल हो जाते है.
अधिकारी नही उठा रहे है फोन
किसानों के इस समस्या को लेकर जब जिला कृषि पदाधिकारी के सरकारी नम्बर पर अलग अलग नम्बर से फोन किया गया. उसके बाद भी न तो किसी ने फोन उठाया, और न ही किसी ने संज्ञान ली.
गौरतलब है कि बक्सर जिले में 2 लाख 22 हजार 947 रजिस्टर्ड किसान है. जिनके द्वारा 1 लाख 8 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया था.आलम यह है कि 30 प्रतिशत इलाको में भी धान की रोपनी नही ही पाई है.जबकि अधिकारी कागजो पर 44 प्रतिशत धान की रोपनी होने का दावा कर खुद को ऐसी कमरे में कैद आराम फरमा रहे है.
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