शादी धोखा और सजा का वायरल हो रहे पत्र की क्या है सचाई

 


सोशल मीडिया में वायरल हो रहे पत्र की सच्चाई जानने के लिए परेशान है बक्सर वासी, क्या? बक्सर सेंट्रल जेल में पिछले 13 साल से एक बेगुनाह भुगत रहा है सजा!

बक्सर-सोशल मीडिया में एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है.हर सख्स इस पत्र की सच्चाई को जानने के लिए परेशान दिखाई दे रहा है. और सोशल मीडिया के माध्यम से ही लोग प्रेम, धोखा और सजा के इस कहानी की सच को जानने के लिए परेशान है.

शहर के चौक चौराहे पर किसने बांटी यह पम्पलेट

स्थानीय लोगो से मिली जानकारी के अनुसार शहर के ज्योति चौक पर आज दोपहर में कुछ लोगो के द्वारा आने जाने वाले लोगो के बीच इस पम्पलेट का वितरण किया गया.जिसे  सोशल मीडिया में शेयर कर हर कोई यह पता करने की कोशिश में लगा है.की इसके पीछे की सच्चाई क्या है.

क्या ? है वायरल हो रहे इस पत्र में.

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पत्र के सबसे उपरी हिस्से में धोखा-धोखा-धोखा लिखा गया है.इस पत्र को लिखने वाला सुनील तिवारी नामक सख्स की चर्चा है. जिसमें उसने लिखा है.इस पत्र को बक्सर सेंट्रल जेल के गांधी वार्ड से लिख रहा हूँ. मेरी शादी 5 मई 2011 को हुई थी.उस समय मेरी पत्नी डुमराव डीएवी पब्लिक स्कूल में कार्यरत थी.हमलोग बहुत खुश थे. हम दोनों से एक पुत्र ने जन्म लिया जिसका नाम आशीष है. तत्कालीन स्कूल के शिक्षक इंचार्ज आनन्द सर अक्सर मेरे घर आया जाया करते थे. 15 अगस्त 2012 के दिन भी वह मेरे घर आये थे. मेरे ही कमरे में मेरी पत्नी के साथ शिक्षक इंचार्ज आनन्द कुमार  विस्तर पर सम्बन्ध बना रहे थे, जिसे देखकर मेरी मॉ ने शोर मचाना शुरू की तो उक्त शिक्षक मेरी माँ की आंखों में कुछ फेंककर  अपने गाड़ी से भाग निकले. चार दिन बाद 19 अगस्त 2012 को मेरी पत्नी भी घर से भाग गई, उसके मायके वालों ने दहेज के लिए हत्या की केस मुझपर कर दी मैं 13 साल से बेगुनाह होते हुए भी जेल में हूँ. क्योकि मेरी पत्नी जिंदा है.और वह डीएवी पब्लिक स्कूल बक्सर के प्रिंसिपल के साथ नाम बदलकर आईटीआई फील्ड के पास रह रही है. सजा काटने के दौरान मेरी माँ की मृत्यु जेल में ही हो गई थी.मैं इस अपमान को सहन नही कर पा रहा हूँ. शायद मैं भी जिंदा ना रहू. मैं कायर नही हूँ.लेकिन खंजर अपनो ने ही सीने पर नही पीठ पर मारी है. आपका सुनील तिवारी

क्या कहते है अधिकारी

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पत्र को लेकर, जब पुलिस कप्तान मनीष कुमार से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि, इस तरह का कोई भी पत्र नही मिला है.औऱ न ही किसी परिवार के द्वारा सम्पर्क किया गया है.फीर भी जिस पत्र की चर्चा की जा रही है.वह पुलिस को मिलता है तो गम्भीरता से इसे दिखवाया जाएगा.

जेल के गांधी वार्ड में नही है कोई सुनील तिवारी

इस पत्र में सेंट्रल जेल के जिस गांधी वार्ड की चर्चा की गई है.उसमें सुनील तिवारी नामक कोई कैदी नही है.जेल के वरीय अधिकारियो की माने तो पूरे सेंट्रल जेल में इस तरह का कोई कैदी नही है.ज

गौरतलब है कि सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस पत्र को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. वायरल हो रहे इस पम्पलेट में जिस भी आनन्द एवं महिला की चर्चा हो रही है., वह आनन्द कुमार डीएवी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर तैनात है ऐसे में अब पुलीस अधिकक्ष के आदेश पर पुलिस इस मामले की जांच करने में जुट गई है. जेल प्रशासन की माने तो जेल प्रशासन को बदनाम करने के लिए जेल में फेसबुक चलाने की बात उस वायरल हो रहे पम्पलेट में कही जा रही है.

Comments

Popular posts from this blog

भाजपा जिलाध्यक्ष को मिला पेट्रोल पम्प की सौगात ! कार्यकर्ताओ ने कहा तेरे पैरों तले जमीन नही है!

बक्सर में लौटा जंगल राज दो टकिया गुंडे ने बीच बाजार में मेरे पति के नही पुलिस के गाल पर मारा है तमाचा ! बोली दुर्गावती चतुर्वेदी अपराधी को जाती से जोड़कर देख रहे है कुछ चवन्नी छाप नेता !

वीर कुंवर सिंह सेतु की रेलिंग तोड़ते हुए गंगा नदी में गिरी स्कार्पियो राहत बचाव कार्य मे जुटी पुलिस