उत्पाद अधीक्षक का मसीहा कौन ? अब तक नही हुई गिरफ्तारी
उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक का मसीहा कौन? एफआईआर दर्ज होने के वाद भी क्यो नही हो रही है गिरफ्तारी जदयू जिलाध्यक्ष ने उठाया सवाल
बक्सर- शराब माफ़ियाओ से सांठगांठ के आरोपी उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक, पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अब तक उनकी गिरफ्तारी नही होने पर जदयू जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि, उत्पाद अधिकक्ष दिलीप पाठक की शराब माफियाओं के साथ सांठगांठ होने की पुष्टि औधोगिक थाने की पुलिस ने खुद करते हुए, औधोगिक थाना कांड संख्या 132/2024 दर्ज की है.उसके बाद भी किसका संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस उनपर हाथ डालने से भी डर रही है. पुलिस ऐसी सिम्पैथी आखिर आमलोगों के साथ क्यो नही दिखती है.
2 सिपाही के साथ 5 शराब माफिया की हुई थी गिरफ्तारी
21 जून 2024 को औधोगिक थाने की पुलिस, ने शराब लदी वाहन को यूपी के सीमा से बक्सर के सीमा में पार कराने के दौरान उत्पाद विभाग के दो सिपाहियों को गिरफ्तार कर जब जांच शुरू की तो, कई बड़े शराब माफियाओं के साथ उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक का सम्बंध होने की बात सामने आई .बक्सर पुलिस के द्वारा दर्ज एफआईआर में यह बताया गया कि, शराब तस्करों से बातचीत में जिस नम्बर का इस्तेमाल हुआ है वह उत्पाद अधीक्षक की है. इस सिंडिकेट में शामिल दो शराब कारोबारों जिले के अमसारी गांव में कुछ महीने पहले, जहरीली शराब से हुई 6 लोगो के मामले में मुख्य आरोपी है.
क्या कहते है उत्पाद अधिकक्ष
शराब माफियाओं से सांठगांठ के आरोप को लेकर जब उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक, से हमने फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि, जान बूझकर मेरे नाम को घसीटा जा रहा है.जिसकी सूचना हमने जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर तक को दी है. अपने कार्यकाल में हमने कई शराब कारोबारियो पर सख्त कार्रवाई की है.
क्या कहते है एसपी
उत्पाद अधिकक्ष की शराब कारोबारियो से सांठगांठ को लेकर बक्सर एसपी मनीष कुमार, ने बताया कि औधोगिक थाना कांड संख्या 132-24 दर्ज है. जिसमे उत्पाद अधीक्षक समेत कई लोग नामजद है. कुल 7 लोगो की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है.प्रथम दृष्टया जो साक्ष्य मीले है.उसमें उत्पाद अधीक्षक के फोन नमम्बर भी है. वैज्ञानिक तरीके से मामले का अनुसन्धान किया जा रहा है.दोषी जो भी होंगे वह बचेंगे नही.जल्द ही पूरे साक्ष्य के साथ मामले की खुलासा पुलिस करेगी. जांच चल रही है.
गौरतलब है कि बिहार में 2016 से ही शराबबंदी का कानून लागू है. उसके बाद भी जिले में आये दिनों शराब की बड़ी बड़ी खेप पुलिस पकड़ रही है. जिसमे सिष्टम में बैठे कई लोगो के चेहरे भी शराब कारोबारियो के साथ पुलिस उजागर कर रही है.

Comments
Post a Comment