नरक की नगरी का मूकदर्शक राजा

 

नरक नगरी बना बक्सर का नगर परिषद क्षत्र, राजा रुद्र देव् के किला को ही बना डाला कूड़ा डंपिंग जोन. नरक नगरी के राजा को खुश करने में जुटे समाज के ठेकेदारों ने भी साधी चुपी.

बक्सर  -भगवान राम का शिक्षा स्थली, महर्षि विश्वामित्र की तपोस्थली, माता अहिल्या की उद्धार स्थली, भगवान वामन की जन्म स्थली,  ताड़का की नरक नगरी अब अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है. हैरानी की बात है कि, जिनके कंधों पर नगर वासियो ने इस  नगरी को बेहतर बनाने की जिम्मेवारी दी थी. वह भी अब इस नरक नगरी के राजा की परिक्रमा कर उन्हें खुश करने के लिए अपनी आंखे बंद कर ली है. आलम यह है कि अब राजा रुद्र देव् के किले में प्रत्येक दिन दर्जनों ट्रैक्टर कूड़ा डंप किया जा रहा है. जिससे स्कूली बच्चों से लेकर, किला मैदान में टहलने और खेलने आने वाले लोग परेशान है.

 प्रत्येक दिन निकलता है 60 टन कूड़ा!

 नए परिसीमन के बाद बक्सर शहरी क्षेत्र में कुल 42 वार्ड है. नप के अधिकारियो की माने तो प्रत्येक दिन इस नगर परिषद क्षेत्र से कुल 60 टन कूड़ा निकलता है. नप से मिली आंकड़ो के अनुसार, प्रत्येक दिन एक परिवार के घर से लगभग 500 ग्राम कूड़ा निकलता है. जिसे रखने के लिए आजादी के 78 साल बाद भी कही कूड़ा डंपिंग जोन नही बनाया गया है. पहले इन कूडो को बाईपास नहर, सिंडिकेट नहर, ठोरा नदी, बाजार समिति, सदर अस्पताल रोड में ही सड़क और नहर में डंप किया जाता था. मीडिया में खबर  प्रकाशित होने के बाद, नप के कर्मी नए ठिकाने को ढूंढकर वँहा कूड़ा डंप करना शुरू कर देते है.

राजा रुद्र देव् का किला बना कचड़े का नए ठिकाना 

उपविकास आयुक्त डॉक्टर महेंद्र पाल, एसडीएम धीरेंद्र मिश्रा, एसडीपीओ धीरज कुमार के सरकारी आवास के सामने, राजा रुद्र देव्  का किला अब नप के कर्मीयो के लिए कूड़ा डंपिंग का नया ठिकाना बन हुआ है. शहर के कचड़े को शहर से उठाकर शहर में ही डंप करने के लिए प्रत्येक महीने करोड़ो रूपये पानी की तरह बहाया जा रहा है. लोगो की माने तो सुविधा देने के नाम पर अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि करोड़ो रूपये हजम करने के बाद भी डकार नही ले रहे है.

शहर के मठाधीश ले रहे है निजी लाभ

किला मैदान में फुटबॉल खेल रहे युवा खिलाड़ी सुधांशु राज ने बताया कि, इस शहर को पता नही नगर परिषद लोग क्यो कहते है? इसका रियली नाम नरक परिषद है. आज कल हाय तौबा मचाने वाले ठेकेदार लोग भी जाकर वही सेट हो गए है. डीएम साहब इसी किला मैदान में झंडोतोलन करने के लिए 15 अगस्त को आये थे.उसी दिन कई गाडियो में  भरकर कूड़ा लाया गया और गिराया गया. जब जिलाधिकारी ही खामोश है. तो आम आदमी की क्या औकात की इन दबंगो का विरोध करे, राजा के परिक्रमा करने वाले लोगो के निजी आवास का मरम्मत सरकारी पैसे से हो रहा है.इस बात को कौन नही जानता. लेकिन मजाल है कोई अंगुली उठा दे.

मंत्री जी का दलील

15 अगस्त को इस समस्या को लेकर , जब जिले के प्रभारी एवं प्रदेश के नगर विकास मंत्री से सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया कि, जो कमियां है उसे दूर करेंगे. रणनीति बनाई जा रही है. वही जब मंत्री जी से पूछा गया कि क्या आजादी के 78 साल गुजर जाने के बाद भी अब तक रणनीति नही बन पाई तो उन्होंने चुपी साध ली.


हम आपको बताते चले कि बक्सर नगर परिषद क्षेत्र का बजट 1 अरब 61 करोड़ है. उसके बाद भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे है.आलम यह है कि राजा की परिक्रमा करने वाले वजीरों को इनाम के तौर पर कई निजी सौगाते दी गई.और हमारे सरकारी स्कूल के बच्चे उस बदबूदार कूड़े की ढेर पर बैठकर अपना भविष्य गढ़ने में लगे है.इस जिले के हाकिमों को इससे कोई फरक नही पड़ता क्योकि? उनके बच्चे तो जिले के टॉप ऐसी युक्त प्राइवेट विद्यालय में पढ़ने जाते है. उन्हें इससे क्या ?


 जिसका खुलासा अगली कड़ी में परत दर परत किया जाएगा.

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