जलकुंभी का जीर्णोद्धार करने के लिए काट दी 8 लाख 93 हजार 362 रुपये की चेक !
विश्राम सरोवर का किसके पास है मालिकाना हक, अधिकारियों को भी नही है जानकारी! तो क्या कमीशन की चक्कर मे बिना वर्क ऑर्डर के सरोवर में डलवा दी मिट्टी! जलकुंभी निकालने के लिए हड़बड़ी में काट दी 8 लाख 93 हजार 362 रुपये की चेक
बक्सर-पुरानी कहावत है, जब सैंया भयो कोतवाल तो अब डर काहेका ! कुछ इसी तर्ज पर बक्सर शहर में नए सरकार की छत्रछाया में नगर परिषद के कर्मी काम कर रहे है. हैरानी की बात है कि, नगर परिषद से लेकर, अभिलेखागार, एवं अंचल कार्यालय के कर्मचारियों को भी इस बात की जानकारी नही है. की विश्राम सरोवर की जमीन किसका है. 6 दिन का समय गुजर जाने के बाद भी नप के अधिकारी से लेकर अमीन तक केवल हवा में ही तीर चला रहे है. अभिलेखागार कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उस सरोवर की खाता संख्या 505 है. जबकि नप कार्यालय की माने तो खेसरा संख्या, 550,555,556, 667 है.सड़क के पूरब में स्थित तलाब भी इसी विश्राम सरोवर की हिस्सा है.वही अंचल कार्यालय के कर्मचारी भी अब तक यह पता करने में असमर्थ है कि यह जमीन किसकी है. मामला तूल पकड़ने के बाद अब खाता पंजी की तलाश की जा रही है. सूत्रों की माने तो पत्रचार कर आरा से मांगने की तैयारी चल रही है.
अंचलाधिकारी कार्यालय में काम करते हुए
योजना पास करने से पहले क्यो नही ली जाती है जानकरी?
विश्राम सरोवर के प्रकरण को लेकर अब नप के नए सरकार के खिलाफ स्थानीय लोगो में भी आक्रोश दिखने लगा है. स्थानीय लोगो की माने तो चुनाव के दौरान, तथाकथित जनता की सरकार कहने वाले लोग, आज आकंठ भ्र्ष्टाचार में डूब गए है. उस समय 10 रुपये में गरीबो को भररपेट भोजन कराने के दावा करने वाले , सरकार बनाने के साथ ही सारे वादे ताक पर रखकर अब अपनी पेट भरने के लिए, किसी के लिए निजी सड़क, तो किसी के लिए कटरा बनवा देते है.जबकि इसी शहर में बस स्टैंड, से दादा मोड़ जाने वाले रास्ते मे घुटने भर पानी लगा हुआ है. वँहा तक नजर नही पहुचती है.इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा?जिस सरोवर पर काम चल रहा है.उस जमीन का मालिकाना हक किसके पास है इसकी जानकारी विभाग को ही नही है
जल्दबाजी में काट दिए गए चेक !
विश्राम सरोवर की साफ सफाई,एवं जीणोद्धार को लेकर,9 लाख 94 हजार 544 रुपये के बने कार्य योजना, विभाग के ही कार्यपालक सहायक संतोष केशरी के नाम पर पास कराया गया था. जिन्होंने 30 मई 2025 को संवेदक अखिलेश कुमार सिंह को,चेक से 8 लाख,93 हजार 362 रुपये की भुगतान भी कर दी. जिससे जल में पड़े जलकुंभी को निकाला गया है.ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे है.की किसी सामान्य व्यक्ति के द्वारा काम कराने के बाद 6 माह तक पैसा भुगतान नही किया जाता है.फिर इस योजना में इतनी जल्दबाजी किसको लाभ पहुचाने के लिए किया गया. जबकि मिट्टी भराई का वर्क ऑर्डर ही नही है. तो जीर्णोद्वार क्या जलकुंभी का किया गया?
क्या कहते है नप के नेता जी!
विश्राम सरोवर पर चल रहे जीणोद्धार के काम को लेकर , जब फोन पर नप के चेयरमैन प्रतिनिधि नेमतुला फरीदी से बात की गई,की विश्राम सरोवर की ख़्तियानी जमीन कितना है. और वह जमीन सरकार की है या बसाव मठिया की, जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि,पता करने के बाद इसकी सही जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.
गौरतलब है कि बक्सर ऐसा अनोखा शहर है. जंहा किसी भी योजना का बोर्ड काम करवाने से पहले नही लगाया जाता है. आलम यह है कि कुछ ही साल पहले एक ही गली की ढलाई कर दो योजनाओं की राशि निकाल ली गई थी.मामला तूल पकड़ने के बाद खुद की फजीहत होता देख मामले को किसी तरह रफादफा किया गया.ठीक उसी तर्ज पर न तो योजना से सम्बंधित किसी तरह का बोर्ड लगाया गया है.और न ही इस जमीन की जानकारी है.फिर इस सरोवर को पहले ही अमीन ने अपने रिपोर्ट में कैसे बसाव मठिया का सरोवर लिख दिया!



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