विश्राम सरोवर में डाले जा रहे है मिट्टी, मूकदर्शक बने साहब तमाशबीन बना समाज

 गजबे है बिहार का बक्सर शहर ! सरेआम आस्था के साथ नप के  अधिकारी कर रहे है खिलवाड़! मूकदर्शक बने साहब ! तो तमाशबीन बना समाज. जीर्णोद्वार के नाम पर त्रेतायुग के विश्राम सरोवर की मिटा दी पहचान.

विश्राम सरोवर की तस्वीर

बक्सर- उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा यह शहर, अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. जंहा त्रेतायुग में भगवान राम ने महर्षि विश्वामित्र से शिक्षा ग्रहण कर, ताड़का , सुबाहु , मारीच  जैसे असंख्य राक्षसों का वध कर पराक्रमी राम कहलाये, बक्सर में उस पराक्रमी राम से जुड़े स्थलों के जीर्णोद्धार करने के नाम पर, एक साजिश के तहत उनकी पहचान मिटाई जा रही है.

विश्राम सरोवर की मिटा दी पहचान !

सरोवर में डाले जा रहे है मिट्टी

शहर के नगर थाने के नाक के नीचे, बसाव मठिया के पास स्थित विश्राम सरोवर की दीवार को तोड़कर, उसमें धड़ल्ले से मिट्टी की भराई की जा रही है. संत महात्माओं की माने तो, इस विश्राम सरोवर की अपनी एक हजारों साल पुराना इतिहास है. त्रेतायुग में पंचकोशी परिक्रमा यात्रा के दौरान  पांचवे एवं अंतिम पड़ाव में,भगवान श्रीराम,  लक्ष्मण एवं, महर्षि विश्वामित्र संग कुल 84 हजार साधु संतों ने इस सरोवर में स्नान कर पूजा पाठ करने के बाद लिट्टी चोखा का प्रसाद ग्रहण किया था. तब से यह परंपरा चली आ रही है. जंहा प्रत्येक साल अगहन मास में देश ही नही विदेशों से भी श्रद्धालु बक्सर में पहुँचकर पहले उत्तरायणी गंगा में स्नान करते है. उसके बाद लिट्टी चोखा का प्रसाद ग्रहण कर इस यात्रा का समापन करते है. 

जल जीवन हरियाली योजना को नप के अधिकारी दिखा रहे है ठेंगा !

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सबसे महत्वकांक्षी योजना जल, जीवन, हरियाली का भी नप के अधिकारी खुलयाम धज्जियां उड़ा रहे है.राज्य सरकार जंहा आहार ,पोखर, नहर तलाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ ही सफाई कराने के लिए अरबो रुपये पानी की तरह बहा रही है. वही नप के अधिकारी इस शहर के बीचोबीच स्थित इस विश्राम सरोवर में मिटी डालकर राज्य सरकार के इस योजना को ठेंगा दिखा रहे है. हैरानी की बात है कि जिलाधीकारी से लेकर तमाम अधिकारी प्रत्येक दिन इसी रास्ते से अपने कार्यालय जाते है. जिनकी नजरे भी यंहा पहुँचते-पहुँचते धुंधला जाती है.

नप के अधिकारियों  का दलील

वही नप के अधिकारियों एवं रसूख वाले नेता जी की माने, तो इस विश्राम सरोवर में मिट्टी डालकर बीच मे महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा लगाया जाएगा. जो बक्सर को आकर्षित और खूबसूरत बना देगा.  लेकिन नेता जी यह भूल गए , कि उसी सरोवर से सटे सड़क के पूरब में एक और सरोवर है जिसके सफाई के नाम पर अधिकारी 15 लाख निगल गए, न तो उस तलाब की सफाई किया गया, और न ही अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है. हैरानी की बात है कि जिस राशि को खर्च किया गया. उसका कही प्राकलन बोर्ड भी नही लगा है. 

मेहरबान है साहब !

स्टेशन रोड में अरबो की सरकारी भूमि पर नप के किस साहब की मेहराबी से सरकारी बाबू से लेकर, दबंगो, एवं जनप्रतिनिधियी  ने पोखरे की जमीन पर कब्जा कर ली है. और किसी ने सांस तक नही ली ! वही शहर के फुटपाथी दुकानदारो के रोजी रोटी पर बुल्डोजर चलाने वाले साहब की बुल्डोजर कभी उन सफेदपोश नेताओ, सरकारी कर्मीयो, एवं दबंगो के मकान पर क्यो नही चलता है?

 अरबो की सरकारी जमीन पर बनी आलीशान इमार

राम के नाम पर सियासत करने वाले  नेताओं की माने तो, पहले इस सरोवर की कुल  लम्बीई -चौड़ाई 11 एकड़ में थी.  जिसके बीचो-बीच सड़क बनाकर सरोवर को दो पार्ट  में बांट दिया गया .इस सरोवर के 95% हिस्से पर दबंगों ने कब्जा कर ली है. शेष बचे जो तालाब की भूमि है उसमें नप के अधिकारी मिट्टी डालकर अब उसकी पहचान मिटाने में लगे हुए है

क्या कहते है भाजपा नेता !

 भाजपा नेता पुनीत सिंह की माने तो उनकी सरकार ही राम से जुड़े इन स्थलों का विकास करा रही है. मिट्टी डालकर इसका जीर्णोद्वार किया जा रहा है. इससे न तो जल जीवन हरियाली का उलंघन हो रहा है और न ही राम की पहचान मिट रही है.

क्या कहते जदयू के जिलाध्यक्ष

वही अपने बेबाक अंदाज के लिए पूरे बिहार में चर्चित ,  जदयू जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि, शहर के बीचोबीच जिला प्रशासन के अधिकारियो के नाक के नीचे, जल,जीवन, हरियाली, योजना को नप के अधिकारी ठेंगा दिखा रहे है.और सबकी जबान पर ताला लगा हुआ है. सरकार के इस महत्वकांक्षी योजना का बट्टा लगाने वाले जो लोग भी है वह बच नही पाएंगे. राज्य सरकार का यह सख्त निर्देश है कि बिना योजना का बोर्ड लगाए कोई भी काम नही होगा. उसके बाद भी पूरे शहर में बिना योजना बोर्ड लगये काम धड़ल्ले से चलाया जा रहा है.

गौरतलब है कि नप क्षेत्र में काम कराने वाले ठेकेदारों से एक रणनीति के तहत 51 प्रतिशत  कमीशन की वसूली की जा रही है. जिसका नप के कर्मीयो ने ठेकेदार समझ पत्रकार को ही वह मेन्यू कार्ड थमा दिया. जिसमे चपरासी से लेकर टॉप लेबल का भी चर्चा है. की कितने प्रतिशत हिसा किसका है. उसके बाद 18 प्रतिशत जीएसटी एवं 13 प्रतिशत सीपी है

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