विश्राम सरोवर की मिट रही पहचान पर अधिकारी हुए सख्त, मांगी जांच रिपोर्ट रुका काम !

गजब का खेल,खेल रहे है नगर परिषद के कर्मचारी, अपने ही वरीय अधिकारियों को गुमराह करने में नही लगाते है. पल भर की देरी. आननफानन में विश्राम सरोवर पर किया जा रहा था काम, खबर प्रकाशित होने के बाद वरीय अधिकारियों ने मांगी रिपोर्ट तो  ,लीपापोती करने में जुटा पूरा महकमा कैमरे में कैद हुई पूरी बातचीत !

बक्सर-शहर के बीचोबीच बसाव मठिया के समीप, स्थित विश्राम सरोवर के जीर्णोद्धार कराने के नाम पर, नगर परिषद के कर्मी से लेकर सफेद पोश गजब का खेल खेल रहे है. आननफानन में कमीशन के चक्कर में न तो इस सरोवर की  विस्तृत जानकारी निकाली गई. और न ही उसके स्वरूप का ख्याल रखा गया. रातोरात मिट्टी का काम कराकर  सारे नियम, कानून को ताक पर रख दिया गया. 

कैमरे में कैद हुई नप के कर्मी का पूरा बातचीत

विश्राम सरोवर पर हो रहे काम को लेकर, बातचीत के दौरान नप के ही कर्मी ने पूरे सिष्टम का पोल खोल कर दिया है.जो कैमरे में कैद हो गई है. नप कर्मी की माने तो यह सारा खेल कमीशन का है. पैसा खाता में डालने से पहले कुल 51 प्रतिशत जो सुविधा शुल्क ठेकेदार से लिया जाये है. उसके बाद ही पैसा की भुगतान किया जाता है. जिसमे कार्यालय से लेकर सफेद पोश लोग शामिल है.

सुविधा शुल्क का पूरा मेन्यू नाम सहित बताया.

नगर परिषद क्षेत्र में काम कराने के लिए सुविधा शुल्क का पूरा एक मेन्यू है. किसको कितना चढ़ावा चढ़ाना है. इसकी पूरी पोल उस कर्मचारी ने खोल दी है. नप कर्मी की माने तो काम का एमवी बुक कराने के लिए 4 प्रतिशत का सुविधा शुल्क के साथ इस खेल की शुरुवात होती है. वह भी कैश. उसके बाद एक साहब को 9.5 प्रतिशत कैश.10 प्रतिशत बड़े नेता जी को, 10 प्रतिशत वार्ड वाले नेता जी को,7.5 प्रतिशत छोटे कार्यालय कर्मी को, 13 प्रतिशत सीपी देना अनिवार्य है. इसके अलावे जीएसटी 18 प्रतिशत.

विश्राम सरोवर सरकारी या गैर सरकारी

 सरकारी बाबुओं की माने तो बसाव मठिया के समीप स्थित विश्राम सरोवर की प्लाट संख्या 550, और 556 है. मौजा किला मैदान है. वर्तमान में अतिक्रमण के बाद शेष बचे सरोवर की लम्बाई चौड़ाई इस प्रकार से है.सड़क किनारे पूरब की ओर उतर से दक्षिण की लंबाई कुल 250 फ़ीट है. जबकि मठिया की तरफ पश्चिम किनारे उतर से दक्षिण की लंबाई 230 फ़ीट. है. वही पूरब से पश्चिम की चौड़ाई 121 फ़ीट है. जिसमे 10 -12 फ़ीट चौड़ाई में चारो तरफ से मिट्टी भर दिया गया है. ऐसे में त्रेतायुग के इस धार्मिक तलाब की पहचान एक साजिश के तहत मिटाने की पूरी खेल चल रहा है.

क्या कहते है अधिकारी?

वही विश्राम सरोवर पर हो रहे काम को लेकर, जब नप के नए कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने बताया कि, मामले की जांच कर पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है.  अभी वँहा कोई काम नही हो रहा है. केवल मिट्टी डाला गया है.वही प्रत्यक्ष दर्शियों की माने तो जिला प्रशासन के अधिकारी भी खबर प्रकाशित होने के बाद विश्राम सरोवर को देखने पहुँचे थे. जिनके द्वारा भी रिपोर्ट मांगा गया है.

चेयरमैन प्रतिनिधि ने नही उठाया फोन

नप क्षेत्र में चल रहे कमीशन की खेल का पूरा रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने के बाद जब इस पर प्रतिक्रिया लेने के लिए चेयरमैन प्रतिनिधि के दोनों मोबाइल नम्बर पर फोन किया गया. तो किसी ने फोन नही उठाया. जिसके कारण इस खेल में शामिल लोगों पर प्रतिक्रिया नही मिल पाई है.

गैरतलब है कि नप क्षेत्र में रहे 98 प्रतिशत काम बिना योजना का बोर्ड लगाए कराया जा रहा है. कुछ लोगो का दावा है कि यह त्रतायुग का सरोवर उनका है. ऐसे में सवाल उठ रहा है. की क्या बिना किसी जानकारी के आननफानन में किसी तरह से इस काम को कराया जा रहा है. स्थानीय लोगो की माने तो वर्तमान नगर की सरकार में बिना कमीशन लिए लोग कदम भी नही हिलाते है. इस शहर की सफाई में प्रत्येक महीने 1 करोड़,16 लाख , 86 हजार रुपये सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है. शहर कितना साफ है यह बताने की जरूरत नही है.

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