क्या बाबुओं के संरक्षण में भू- माफियाओ ने कर लिया है सरकारी जमीन पर कब्जा! राजद नेता ने पूछा कब चलेगा इनके भवनों पर बुल्डोजर

  क्या बाबुओं की छत्रछाया में भू माफियाओ ने कर ली सरकारी जमीन पर कब्जा ? स्टेशन रोड में नगर थाने के समीप से लेकर, ज्योतिचौक तक  सरकारी जमीन पर बने बड़ी बड़ी इमारतों पर क्यो नही चल रहा है प्रशासन का बुल्डोजर? नप के नए सरकार ने भी कर ली समझौता!

बक्सर-उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा यह बक्सर शहर अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है. मंदिरों के शहर वाराणसी को काशी तो बक्सर को मिनी काशी के नाम से भी लोग जानते है. धार्मिक गर्न्थो की माने तो, त्रेतायुग में भगवान राम ने उत्तरायणी गंगा की जिस तट पर स्नान की उसका नाम रामरेखा घाट पड़ा. जंहा बालू की रेत से भगवान राम ने गंगा किनारे ही भगवान शंकर के लिंग की स्थापना की जिसे आज भी रामेश्वरम के नाम से लोग जानते है. और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करते है. उस रामरेखा घाट पर अरबो की जमीन पर भू माफियाओ ने कब्जा कर जिला प्रशासन एवं नप के अधिकारियों को खुलयाम चुनौती दे रहे है. मामला सुर्खियों में आने के बाद प्रशासन केवल सड़क किनारे टिकुली, चूड़ी, सिंदूर बेचने वाले फुटपाथी लोगो पर कार्रवाई कर अपना पीठ थपथपा लेते है.

पहले लाल निशान लगाओ फिर पैसा कमाओ !

स्थानीय लोगो की माने तो इस शहर के अंदर सरकारी जमीन पर बने मकानो, एवं दुकानो से  उगाही करने का  जब भी इक्षा होती है. पहले विभगिय अधिकारी सरकारी जमीन पर बने दुकानों पर लाल निशान लगाकर तोड़ने की नोटिश भेजते है. मामला तूल पकड़ते ही लोग धरने पर बैठते है.और उसके बाद दूसरा विभाग सेटलमेंट कर कार्रवाई नही होने की बात कहकर रफा दफा कर लेता है. जिसका उदाहरण है शहर के ज्योतिचौक पर नहर के जमीन पर बने दर्जनों दुकानें. नहर विभाग ने कुछ ही दिन पहले नोटिश भेजी. नप के अधिकारियों ने दुकानदारों को संरक्षण दे दिया. उन छोटे कारोबारियों की झोपड़ियां गिरा दी गई. जो सेटिंग नही कर पाए थे. 

रामरेखा घाट पर भी अतिक्रमण का है यही हाल

नगर थाना क्षेत्र के रामरेखा घाट पर भी यही हाल है.कई बड़ी इमारतों पर लाल निशान का श्याही आज भी लाल है.उन मकानों को तोड़ने के बजाए, रास्ते मे अतिक्रमण होने की बात कहकर, एक निहायत ही गरीब की मकान गिरा दी गई. जिसको लेकर अब लोग इस दोहरे नीति पर सवाल उठा रहे है. राजद नेता संतोष भारती ने जिला प्रशासन, एवं नगर परिषद के अधिकारियों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि, क्या ? स्टेशन रोड, रामरेखा घाट, विश्राम सरोवर, ज्योतिचौक की सरकारी जमीनों पर किसी गरीब का भी झोपड़ी बना रहता तो प्रशासन ऐसी दरियादिली दिखाती. आखिर सिंडिकेट नहर पर पत्थर कूटकर जीवन बसर करने वाले उन गरीबो की क्या दोष थी ? जो हाड़ कंपा देने वाले ठंड में उनके झोपड़ी को उजाड़कर उन्हें सड़क पर ला दिया गया था.

नए सरकार की सरपरस्ती में हो रहा है नया-नया खेल


नप क्षेत्र में रहने वाले लोगों की माने तो नप के नए सरकार की कारनामे भी निराले है.सरकारी पैसे से निजी लोगो के सुख सुविधा के लिए लाखों के सड़क बनवा देते है. तो कही अपने लोगो के बीच कामो का बंटवारा कर खूब सियासत की रोटी सेक रहे है. सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री के आगमन के बाद जिस तरह से गमले की लूट हुई, और जिस तरह से खेल चल रहा है उसे हर कोई जानता है.आज 1 करोड़ 16 लाख 86 हजार महीने में शहर की साफ सफाई पर खर्च हो रहा. डंपिंग जोन बनने के बाद भी कूड़े ग्यारह नम्बर लख पर गिराया जा रहा है.जिससे दर्जनों हरे-भरे पेंड जलकर राख हो गए.

धार्मिक स्थलों में बना दे रहे है कटरा

शहर के ठठेरी बाजार से लेकर, पिपरपाती रोड, नगर थाने के इलाके में मुख्य सड़क पर स्थापित,  धार्मिक स्थलों के दीवारों को तोड़कर उसमें कटरा बनाने की नए परिपाटी की शुरुवात हो गई है. स्थानीय दुकानदारों की माने तो , यह आस्था पर चोट है. लेकिन साहब की कृपा से सब कुछ सम्भव है. सुविधा शुल्क के बदौलत, चर्च से लेकर मंदिर ,  मस्जिद, गौशाला एवं अन्य धार्मिक स्थलों के जमीन पर अब अतिक्रमण कर कटरा बनवा दिया जा रहा है.

गौरतलब है कि शहर के सिंडिकेट गोलंबर पर बावन विघा से लेकर, स्टेशन तक सैकड़ो विघा जमीन को भू-


माफियाओ ने कब्जा कर लिया. हैरानी की बात है कि नप के अधिकारियों को छोडकर पूरे शहर को इस बात की जानकारी है.

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