गजबे है बक्सर का विश्राम सरोवर, न योजना की बोर्ड, न वर्क ऑर्डर फिर भी कर दी गई रातों रात मिट्टी भराई. जांच रिपोर्ट में बता दिया गया. मठिया का तलाब !
नप के नए सरकार के कार्यकाल में मिली लूट की खुली छूट. बिना योजना और वर्क ऑर्डर के ही विश्राम सरोवर में डाल दी मिट्टी. मामला तूल पकड़ने के बाद अपने ही जाल में फंसे नप के कर्मी आननफानन में रुकवाया कार्य, सरकारी जमीन पर स्थित विश्राम सरोवर को बता दिया मठिया का तलाब. ले ली अनापत्ति का शपथ पत्र !
बक्सर- जिले के नगर थाना क्षेत्र के बसाव मठिया के समीप, स्थित विश्राम सरोवर के जीर्णोद्वार के नाम पर लूट की खुली छूट मिल गई है. बिना वर्क ऑर्डर और योजना का बोर्ड लगाए, सरोवर में मिट्टी की भराई का कार्य शुरू कर दी गई.मामला तूल पकड़ते ही नप के कर्मी आननफानन में खाता संख्या 505, खेसरा संख्या 550, 555,556, की भूमि को मठिया का तलाब बताकर अपने ही बुने हुए जाल में खुद ही फंस गए, अब वरीय अधिकारियों को गुमराह करने के लिए, नप के कर्मी सरोवर के जमीन को मठिया का जमीन बताकर अपने अधिकारियों को और उलझा दिए है. पत्रकारों के सवाल में उलझे नप के नए कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि. योजना से सम्बंधित किसी तरह की जानकारी हमे उपलब्ध नही कराई गई है. और न ही वर्क ऑर्डर की कोई जानकारी है. रिपोर्ट हमने मांगी है. किसी भी योजना पर काम कराने से पहले योजना का बोर्ड लगाना आवश्यक है. पूरी तरह से सभी जीर्णोद्वार का कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है.
विश्राम सरोवर पर तत्काल प्रभाव से बंद कराया गया सभी कार्य.
विश्राम सरोवर की जीर्णोद्वार से सम्बंधित किसी तरह की योजना की जानकारी नप के नए कार्यपालक पदाधिकारी को नही है. पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मनीष कुमार ने बताया कि, योजना से सम्बंधित जानकारी योजना सहायक से मांगी गई है. वही उनसे जब यह पूछा गया कि विश्राम सरोवर की लंबाई-चौड़ाई कितनी है. तो उन्होंने बताया कि अमीन से इसकी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है.वर्क ऑर्डर से सम्बंधित भी कोई जानकारी नही है. जिसके कारण काम को बंद कराड़िया गया है.
जांच रिपोर्ट में अमीन ने सरकारी जमीन को बता दिया मठिया का जमीन!
नप कार्यलय सूत्रों की माने तो, अमीन ने अपने रिपोर्ट में विश्राम सरोवर की जमीन को मठिया का जमीन बताकर पूरे मामले को ही रफादफा कर दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नप के सरकारी अमीन ने विश्राम सरोवर की कुल लम्बाई चौड़ाई इस प्रकार बताया है. पूरब- किनारे उतर से दक्षिण 250 फ़ीट. पश्चिम उतर से दक्षिण की लंबाई 230 फ़ीट. उत्तर पूरब से पश्चिम की लंबाई 121 फ़ीट है. जांच रिपोर्ट के अनुसार मठिया के स्वामी प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने, सरोवर पर हो रहे काम को लेकर, अनापत्ति पत्र भी दे दिया है. जिसको लेकर नप के कर्मी सवालों के घेरे में है. की सरकारी सरोवर का एनओसी देने का अधिकार किसी निजी व्यक्ति को कैसे मिल गया!
वरीय उपसमाहर्ता ने कहा जीर्णोद्वार का काम है बंद
विश्राम सरोवर के मामले को लेकर वरीय उपसमाहर्ता शौरभ आलोक ने बताया कि, विश्राम सरोवर पर काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.किसी भी योजना का काम कराने से पहले योजना का बोर्ड लगाया जाता है. साथ ही वर्क ऑर्डर निकलता है. नप कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कोई भी नियम का पालन नही किया गया. जिसके कारण नप के कार्यपालक पदाधिकारी ने रोक लगा दी है.पूरे मामले की जांच के बाद जो भी निकलकर सामने आएगा. उससे अवगत कराया जाएगा.
कर्मी ने कहा सरकारी जमीन पर है विश्राम सरोवर
नाम नही छापने के शर्त पर अभिलेखागार कार्यालय के कर्मी ने बताया कि, विश्राम सरोवर की भूमि पूरी तरह से सरकारी है. 2002-3 में भी इसका पूरा दस्तावेज निकाला गया था.जिसका खाता संख्या 505 है.
क्या कहते है अंचलाधिकारी ?
वही विश्राम सरोवर की जमीन को लेकर, अंचलाधिकारी प्रशांत शांडिल्य ने कहा कि, न तो जिलाधीकारी के द्वारा और न ही नप के अधिकारी के द्वारा उस जमीन से सम्बंधित कोई जानकारी मांगी गई है. वरीय अधिकारी यदि विश्राम सरोवर की जमीन से सम्बंधित जानकारी मांगेंगे. तो सब कुछ स्पष्ट कर रिपोर्ट भेजा जाएगा.
गौरतलब है कि शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए कब्जे को लेकर, खुद को फंसता देख सम्बंधित अधिकारी एवं कर्मचारी,एक दूसरे को इसका जिम्मेवार बताकर अपनी बचाओ करने में लगे हुए है. मठिया की, जमीन सरकारी है या गैर सरकारी इसको लेकर सरकारी कर्मीयो में ही मतभेद है. इस पूरे प्रकरण को लेकर नप के चेयरमैन प्रतिनिधि के मोबाइल पर जब फोन किया गया. तो ना ही किसी ने फोन उठाया और न ही किसी ने कॉल बैक किया. जिसको लेकर नगर में रहने वाले लोगो ने नए सरकार को इस पूरे खेल का खिलाड़ी बताते हुए जमकर अपनी भड़ास निकाली! इस दौरान लोगो ने कहा कि नई सरकार इस खेल के लिए ही मशहूर है सबकुछ बैक डेट में निकालकर लीपापोती कर दी जाएगी. जमीन कब्जा करने से लेकर, कटरा बनवाने में किसका संरक्षण प्राप्त है सभी जानते है.



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