रात के अंधेरे में खूब दुम हिला रहे हो, चंद सिक्को के लिए तलवे चाट रहे हो
कमाना है तो रोजगार कर लो बड़ा पेट लेकर दुकाने, दुकान क्यो भटक रहे हो ?,सुने बाप दादाओं का मान सम्मान भी गिरवी रख रहे हो,चंद सिक्को के लिए दुम हिला रहे हो, मालिक के कहने पर दरवाजे पर खड़ा होकर भोंक रहे हो, सुने है आज कल तलवे चाट रहे हो
शर्म से मुँह छुपाकर कथा पढ़ रहे हो, ज्ञानी होने का ढोंग कर लोगो को खूब घुमा रहे हो सुने है आज कल पूंजीपतियों के तलवे चाट रहे हो, ब्रांड का ब्रांडिंग करने के नाम पर खूब दुम हिला रहे हो सुने है आजकल तलवे चाट रहे हो, दरगाह को दरिया का हवाला देकर मंदिर और मठ का दलाली खा रहे हो, सुने है चंद सिक्को के लिए मुँह छिपाकर पहुँच रहे हो
खूब ज्ञान बांट रहे हो बाप दादाओं के पगड़ी खूब उड़ा रहे हो
पैसा सरकार से लेकर, तलवे रईसों का चाट रहे हो सुने है आज कल ज्ञान खूब बांट रहे हो,
-आज कल ज्ञानी बाबा लोग ज्ञान बांट रहे है. कफ़न के बीच से पैसा निकालने के लिए रात के अंधेरे में बड़ा पेट लिए तलवे चाट रहे है. फोटो लगाने के लिए पैसे की इतनी ही जरूरत है तो धंधे कर लो, बाप दादाओं के पगड़ी क्यो उछाल रहे हो, सुने है कि हजी हजार सरकार से लेने के बाद भी पूंजीपतियों के घरों का चक्कर लगा रहे, मुफ्त में ज्ञान बांट रहे हो. रात के अंधेरे में खूब दुम हिला रहे हो,

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