हाले बक्सर गौशाला! इंसानों से नाग भला !
गाय किसकी? औऱ गाय का कौन? के बीच छिड़ी सियासी संग्राम! बोले स्थानीय लोग सांप भी चुका देते है दूध का कर्ज! इंसान से नाग भला.
बक्सर-112 साल पुराने गौशाले में 5 जुलाई 2025 को इलाज के अभाव में हुई गाय की मौत के मामले में एक के बाद एक कई लापरवाही का मामला सामने आने लगा है.,जिसके बाद स्थानीय लोग इंसानों से भला सांप को बता रहे है. जो रियल न सही लेकिन, रील लाइफ में वह दूध का कर्ज बखूबी चुका देते है. जिसका दूध पीते है.उसका खून नही चूसते है. जिस गौशाले पर सियासत करने की बात कहकर पूरे मामले को दूसरे दिशा में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है. उस गौशाले का दूध कितना मीठा लगता है.उसका ब्याख्या वँहा के रजिस्टर चीख -चीखकर कर रहा है.की खुद को मिल्की व्हाइट बताने वाले समाज के तथा कथित सेवा करने वाले लोग जिन गायो का दूध पीकर सड़क पर सेखी बघारते है.उनकी असलियत क्या है?
जांच के दौरान कमिटी के अध्यक्ष ने व्यवस्था पर उठाया था सवाल !
गौशाले कमिटी के अध्यक्ष एसडीएम अविनाश कुमार ने जिलाधीकारी के निर्देश पर, जब आदर्श गौशाले का निरीक्षण करने पहुँचे तो जांचोपरांत. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि, कुव्यवस्थाओं का अंबार है. इस आदर्श गौशाले में,ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि, राजनीति कौन कर रहा है ? लोकतंत्र में कुव्यवस्थाओं के खिलाफ सवाल उठाना राजनीति है. तो लोकतंत्र का गला घोंटने की खुली छूट नही मिलेगी!
कौन कर रहा है गौशाले पर सियासत?
गौशाले में लापरवाही के कारण हुई गाय की मौत! के मामले को लेकर जब पहले हो दिन गौशाले कमिटी के सचिव अनिल मानसिंहका से फोन पर बात की गई. तो उन्होंने इलाज होने की बात कहकर विशेष जानकरी मैनेजर से लेने को कहा.जिसका साक्ष्य आज भी मौजूद है .की आदर्श गौशाले के मैनेजर ने खुद को डमी मैनेजर बताते सारी जानकारी कमिटी के पास होने की बात कहकर पुरानी पर्ची थमाकर मामले में गुमराह करने की भरपूर कोशिश की. जिसका पूरा साक्ष्य कैमरे में कैद है. जब गड़बड़ी नहो है तो हर बार एक नए झूठ का सहारा क्यो लेना पड़ता है? सचिव के अनुसार गाय तीन दिन से बीमार थी. डॉक्टर ने जांच कर दवाई लिखा. तो फिर रजिस्टर खाली कैसे था? और 28 जून की तारीख में उसे क्यो अंकित किया गया? जबकि मामला 5 जुलाई का था. दूसरा जब गौशाले में चार महिला गौ सेविका काम करती है. तो केवल दो महिलाओं के ही नाम पर 8-8 हजार का चेक काटकर क्यो दिया जाता है? गौशाले में गायो की रहने का पर्याप्त जगह ही नही है तो, कटरा के ऊपर कटरा बनाने के बजाए उसी राशि से शेड क्यो नही बनवाया गया?सवाल पूछने या उठाने वाले लोगो को यदि गाय पालने का अनुभव नही है.तो क्या? कमिटी में शामिल सभी लोगो ने पशुपालन में पीएचडी की उपाधि ग्रहण की है? एक ही परिवार के लोगो को पूरा गौशाले पर कब्जा करने का प्रवधान क्या कमिटी ने बनाई है? पुराने कटरे के ऊपर बन रहे कटरे का निर्माण क्या सच मे भूंसा रखने के लिए किया जा रहा था?जब गायो के लिए ही जगह कम है.तो गौशाले को कब्जा मुक्त क्यो नही कराया जा रहा है?और रही सवाल घर से पूंजी लगाने की तो कई पशु प्रेमियों ने गौशाले को हायर करने के लिए सोशल मीडिया में पोस्ट डाला है. फिर पुरानी कमिटी को भंगकर नए लोगो को मौका क्यो नही दिया जा रहा है? नियमावली में क्या गौशाले में पशु चिकित्सक रखना आवश्यक है या नही.???
एसडीएम ने कहा मामले से कराया जाएगा अवगत!
गौशाले प्रकरण को लेकर जब एसडीएम, सह गौशाले कमिटी के अध्यक्ष से फोन पर बात की गई.तो उन्होंने बताया कि, इलेक्शन के कार्यो को लेकर व्यस्त है.जैसे ही दस्तावेज की पड़ताल पूरा हो जाएगा.उसके बाद पूरी जानकरी दी जाएगी.
गौरतलब है कि आदर्श गौशाले का मामला किसी का निजी मामला नही है. वहा रहने वाली गायोँ की लापरवाही के कारण मौत होगी तो सवाल भी होंगे.जब एक गायो को पालने में 100 रुपये प्रतिदिन खर्च आता है.तो आमदनी कितनी है.और गौशाले में जिन गायो की संख्या घट रही है.वह मर नही रही है तो कहा है?



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