आदर्श गौशाले कमिटी के सदस्यों ने एसडीएम को सौंपी गौशाले से सम्बंधित दस्तावेज सोशल मीडिया में वायरल हुआ पत्र ! न तिथि न हस्ताक्षर

 आदर्श गौशाले कमिटी के सदस्यों ने एसडीएम को सौंपी गौशाले से सम्बंधित दस्तावेज! सोशल मीडिया में पत्र हुआ वायरल ! स्थानीय लोगो ने पूछा सवाल, क्या ? ट्रस्ट की भूमि पर रोजगार करने का केवल पूंजीपतियों को है अधिकार ? हालांकि वायरल हो रहे इस पत्र में न तो तारीख अंकित किया गया है. और न ही किसी का हस्ताक्षर है. जिसकी सत्यता ही संदेह के घेरे में है.

बक्सर- शहर के बीचोबीच आदर्श गौशाले में 5 जुलाई को इलाज के अभाव में हुई गाय की मौत की खबर मीडिया में प्रकाशित होने के बाद, जिलाधीकारी के निर्देश पर जांच करने पहुँचे एसडीएम, सह कमिटी के अध्यक्ष अविनाश कुमार ने व्यवस्था पर नराजगी जताते हुए, गौशाले से सम्बंधित सारे दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश जारी करते हुए, गौशाले के जमीन पर बने मार्केट के उपर हो रहे निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया था.10 दिनों के अंतराल के बाद. आदर्श गौशाले के दस्तावेज से सम्बंधित एक पत्र सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल हो रहे इस पत्र में आदर्श गौशाले से सम्बंधित कुल दस्तावेज को 8 बिंदुओं में क्रमशः सजाया गया है. हालांकि मार्केट के उपर हो रहे नवनिर्माण की इसमें कोई जिक्र नही किया गया है.जिसको लेकर अब स्थानीय लोग सवाल खड़े कर रहे है.

गौशालाओं के लिए सामान्य नियम और विनियम:

कई राज्यों में गौशालाओं को एक सरकारी या गैर-सरकारी संगठन के रूप में पंजीकृत होना आवश्यक है. और कुछ मामलों में मान्यता प्राप्त होना भी आवश्यक है.गौशालाओं के लिए एक उपयुक्त स्थान, पर्याप्त आश्रय, पानी, चारा, और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है. गौशाले में गायों के स्वास्थ्य, पोषण, और चिकित्सा देखभाल प्रॉपर इंतजाम होना अनिवार्य है.

 गौशाले में होना चाहिए प्रशिक्षित कर्मचारी

गौशालाओं को प्रशिक्षित कर्मचारियों और एक उचित प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता होती है.गौशालाओं को अपने वित्तीय मामलों का प्रबंधन करने, दान स्वीकार करने, और खर्चों का हिसाब रखने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली के साथ ही. परिसर को साफ-सुथरा रखने और अपशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन करने, समुदाय में जागरूकता बढ़ाने और गौवंश के संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने की आवश्यकता है.

गौशाला योजना 2021:

गौशाला योजना 2021 के तहत, राज्य सरकार गौशालाओं के निर्माण और संचालन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है.  गौशालाओं में पशुओं के लिए , चारा, चिकित्सा जांच आदि की व्यवस्था की जाती है.

स्थानीय लोगो ने खड़े किए सवाल

शहर के जानेमाने समाज सेवी दिलीप वर्मा, ने आदर्श गौशाला कमिटी के सदस्यों पर तंज कसते हुए कहा कि,  पिछले पांच बर्षो में गौशाले में रहने वाली गायो,एवं बछड़ो का कितना बार स्वस्थय जांच किया गया है. इसका भी रिपोर्ट सार्वजनिक होना चाहिए. जब गौशाले के मैनेजर के द्वारा पहले ही इस बात की पुष्टि की गई है .की 65 किलो ग्राम चोकर और 15 किलो ग्राम खली का उपयोग प्रतिदिन किया जाता है.तो क्या पिछले पांच बर्षो से कुल 108 गाय बछड़े इस गौशाले में रह रहे है.प्रशासन और पुलिस के द्वारा प्रत्येक महीने कितने गाय और बछड़े इस गौशाले में रखा गया है.उस समय क्या? उनका स्वाथ्य जांच किया गया.इसका भी खुलासा होना चाहिए. की उस समय उनकी स्थिति क्या थी? औऱ अब कितना बेहतर हुई है.


क्या? गरीब को नही मिलना चाहिए रोजगार करने का अधिकार

वही इन्होंने कहा कि आदर्श गौशाला शहर के पौष इलाके में है. जंहा रोजगार करना हर व्यक्ति का एक सपना होता है. फिर कैसे केवल कुछ ही लोगो का एकाधिकार उस मार्केट पर हो गया. कानून के किस किताब में यह लिखा हुआ है कि, उस मार्केट में किसी अन्य व्यक्ति को रोजगार के लिए कटरा नही मिलनी चाहिए,जो लोग गौशाले की तंगहाली पर आंसू बहा रहे है.उनको कमिटी से निकल जानी चाहिए.और नए लोगो को अवसर देना चाहिए.

गौरतलब है कि वैदिक काल से ही गाय को देवी का स्वरूप मानकर उसकी पूजा और अर्चना की जाती है,   गौ का संरक्षण के लिए ही जब गौशाले का निर्माण किया गया है. उसके बाद भी लापरवाही क्यो? जब हो रही गायो की मौत का मामले ने तूल पकड़ा तो जिलाधीकारी से फंड का रोना रोया जा रहा है.जब इस तरह की तंगहाली थी. तो पहले ही क्यो नही ज्ञापन सौंपकर, प्रशासन एवं सरकार से मांग की गई!

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