बक्सर भाजपा में उठी विद्रोह का बवंडर, तो मीडिया प्रभारी ने सोशल मीडिया में जारी की नसीहत!
बक्सर भाजपा में आई विद्रोह की आंधी, ने पार्टी के बड़े -बड़े नेताओं का डगमगा दिया पांव. कार्यकर्ताओ ने लौटाया अपना पद, तो हिलने लगी संगठन की बुनियाद.,पार्टी के मीडिया प्रभारी ने दी नसीहत,सड़क और सोशल मीडिया में नही पार्टी के वार रूम में दिखाए रणकौशल !
सोशल मीडिया में मीडिया प्रभारी ने दी नसीहत
बक्सर- कुछ ही महीनों में बिहार विधानसभा चुनाव होनी है. सभी पार्टी के नेता अपने-अपने क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए, कई कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं.जिसमे पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं की एंट्री हो रही है! संगठन को मजबूत करने के लिए, मंच से तरह -तरह का गुरुमंत्र दिया जा रहा है. लेकिन कार्यकर्ताओ की जगी आत्मसम्मान के आगे यह तमाम गुरुमंत्र विफल साबित हो रहे है. जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भारतीय जनता पार्टी की बक्सर इकाई ! चुनाव से पहले ही पार्टी के अंदर उठी बवंडर ने पार्टी की बुनियाद को जड़ से हिला दिया है. कार्यकर्ताओ की घोर नराजगी को देख आननफानन में पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी ने एक पोस्ट जारी कर, अपना रण कौशल पार्टी के वार रूम में दिखाने का आग्रह किया है.
सड़क से लेकर सोशल मीडिया में छिड़ी जंग
सोशल मीडिया में चल रहे जंग का कुछ अंशपार्टी के युवा एवं वरिष्ठ सम्मानित कार्यकर्ताओ ने, सोशल मीडिया में पोस्ट करने से लेकर, सड़क के चौक चौराहे पर पार्टी नेताओ की तनाशाही के खिलाफ़ मोर्चा खोल दी है. ये वैसे कार्यकर्ता है.जो पार्टी लिए सड़कों पर लाठी खाने से लेकर, खुद का खून तक बहाया है.उसके बाद भी हो रही उपेक्षा ने उनके अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है.-
क्या कहते है पार्टी के कार्यकर्ता.
बक्सर पहुँचे बीजेपी नेता विनोद तावड़े
पार्टी के अंदर उपजे विवाद को लेकर, पार्टी के कई कार्यकर्ताओ से हमने फोन पर बात की.जिन्होंने नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि, पार्टी के जिलाध्यक्ष ही इसका माकूल जवाब देंगे.की पार्टी अपना एजेंडा चलाने के लिए है.या संगठन चलाने के लिए,एक समय था,की 100 लोगो को बुलाने पर 20 लोग नही आते थे.लेकिन खून पसीने से जिस कार्यकर्ताओ ने मेहनत कर संगठन को मजबूत किया.उनकी इस कदर उपेक्षा की जाती है.की उनका कार्यक्रम में उपहास किया जाता है.जिला के संगठन का विस्तार में पद देने के बदले कौन सा लाभ लिया गया है.यह बात किसी से छिपी है क्या?
क्या कहते है जिलाध्यक्ष?
पार्टी के अंदर चल रहे अंतर्कलह पर सफाई देते हुए बीजेपी जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश भुवन ने बताया कि, संगठन में पार्टी का एजेंडा चलता है. कार्यकर्ताओ को उनके क्षमता के अनरूप काम की जवाबदेही दी जाती है.और सभी लोग पार्टी के लिए काम करते है. और पार्टी ही एक कार्यकर्ता के लिए सब कुछ है. रही बात पद की तो, प्रभारी का भी पद संवैधानिक नही है.यह बात तो प्रभारी महोदय ने खुद ही पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बताया है
क्या कहते है राजनीतिक जानकर?
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, बीजेपी जिला इकाई में उठे विद्रोह की लहर ने वरीय नेताओ के बुनियाद को भी हिलाकररख दिया है. जाने- माने राजनीतिक विश्लेषक ,सह वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एस एन सिंह. की माने तो, कार्यकर्ता ही पार्टी के जड़ होते है.और जब जड़ ही हिलने लगे तो पार्टी को गिरने में कितना समय लगता है.जिसका सबसे बड़ा उदाहरण इस देश के सामने कांग्रेस है. देश की सबसे पुरानी और राष्ट्रीय पार्टी की हालात क्या? हो गई थी.धीरे धीरे जब राहुल गांधी सड़क पर खुद उतरकर, कार्यकर्ताओ को पार्टी के साथ जोड़ना शुरू किया तो आज कांग्रेस फिर से खड़ा होने के कगार पर पहुँच रही है.वही हालात बक्सर भाजपा की है. पिछले 10 बर्षो से अपने गढ़ में चुनाव हारने के सबसे बड़ी वजह कोई है, तो वह है कार्यकर्ताओ की नराजगी, संगठन के अंदर बैठे कुछ लोगो का निजी स्वार्थ के कारण, पार्टी लगतार इस क्षेत्र में चुनाव हार रही है. सांसदी भी चली गई.गांव की सड़कों पर पोस्टर लगाने से नही, लोगो की तकलीफों को समझकर उसे दूर करना पड़ेगा तभी लोग जुड़ेंगे.
गौरतलब है की बिहार विधानसभा चुनाव में शेष 85-90 दिन रह गए है. ऐसे में पार्टी के अंदर उठे बवंडर को समय रहते शांत नही किया गया. तो इसका सीधा प्रभाव 2025 के विधानसभा चुनाव पर दिखाई देगा.जिसका सबसे सटीक उदाहरण हैं बक्सर.



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