जब जिले में नही है एक भी फॉरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर तो कैसे पता चलेगा मासूम की मौत का कारण !
एआरबी के इंजेक्शन देते ही 7 बर्षीय बच्ची की मौत! अस्पताल छोड़कर भागे सभी डॉक्टर के साथ नर्सिंग स्टाफ.जब जिले में नही है एक भी फोरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर .तो पोस्टमार्टम में कैसे पता चलेगा मौत का कारण. जिले के लोगो की आंखों में धूल झोंक रहा है पूरा विभाग!
बक्सर- जिले के सदर अस्पताल में एआरबी का इंजेक्शन देते ही 7 बर्षीय सजल कुमारी नामक मासूम की मौत हो गई. कुत्ते के काटने के बाद उक्त मासूम को अस्पताल लेकर परिजन पहुँचे हुए थे. अस्पताल के कर्मीयो ने जैसे ही इंजेक्शन लगाया. उसके चंद मिनट बाद ही बच्ची की मौत हो गई. मासूम की मौत होने की सूचना जैसे ही अस्पताल कर्मीयो को मिली. तमाम डॉक्टर से लेकर ,नर्सिंग स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग निकले.इस दौरान परजिनों के चीत्कार से, सदर अस्पताल समेत पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया.परिजनों को इंसाफ दिलाने के लिए, स्थानीय लोगो ने सड़क जाम कर दी.जिसके बाद लगभग एक दर्जन थाने की पुलिस ने मोर्चा संभाला.और लोगो को समझा बुझाकर शांत कराया.स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों ने पोस्टमार्टम के बाद मौत के कारण पता चलने की बात कहकर, मासूम की पोस्टमार्टम करा दी.जिसके बाद पूरा महकमा सवाल के घेरे में है.की पूरे जिले में जब एक भी फॉरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर नही है.तो क्या ? कोई एमबीबीएस डॉक्टर. मौत की असली वजह बता सकता है ?
हस्ते खेलते अस्पताल आई थी बच्ची!
घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार! औधोगिक थाना क्षेत्र के बिठलपुरवा वरुणा गांव निवासी,दीपक यादव. की 7 वर्षीय बेटी सजल कुमारी दोपहर करीब 2-3 बजे घर के बाहर खेल रही थी, तभी एक कुत्ते ने उसे काट लिया. परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल पहुँचे जंहा एआरबी के इंजेक्शन देने के चंद मिनट बाद बच्ची ने दम तोड़ दी.जिसके बाद अस्पताल के सभी डॉक्टर एवं स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग निकले. सूचना के बाद दलबल के साथ एसडीएम अविनाश कुमार, एसडीपीओ गौरव पांडेय, नगर थाने के थानेदार मनोज कुमार सिंह, समेत एक दर्जन थाने की पुलिस अस्पताल पहुची. और लोगो को समझा बुझाकर शांत कराया. बच्ची की शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के हवाले कर दिया गया.
पोस्टमार्टम के नाम पर खानापूर्ति !
शव के सामने रोते बिलखते परिजन
स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से बच्ची की हुई मौत के बाद पूरा महकमा इस मामले की लीपापोती करने में जुट गया है.जिले के सिविल सर्जन की माने तो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों का पता चलेगा.उसके बाद दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी. .ऐसे में सवाल उठता है कि, जब जिले में एक भी फॉरेंसिक मेडिसिन का डॉक्टर नही है. तो क्या ? कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौत के कारण को बताने में सक्षम है?या पूरा महकमा पोस्टमार्टम के नाम पर लोगो के भावनाओ से खिलवाड़ कर रहा है.
क्या कहते है अधिकारी ?
इस मामले को लेकर, एसडीएम अविनाश कुमार ने बताया कि, पहले भी इस अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है.एक कमिटी बनाकर पूर्व मामले की जांच कराई जाएगी. वही नगर थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि, 7 वर्षीय सज्जल कुमारी का पोस्टमार्टम करा शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया है. परिजन जैसे ही लिखित शिकायत करते हैं. आरोपी स्वास्थ्य कर्मी पर एफआईआर कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
जिले में नही है एक भी फॉरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर !
7 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद, जब सदर अस्पताल के मैनेजर दुष्यंत सिंह से बात की गई. तो उन्होंने बताया कि ,वह ट्रेनिंग पर बक्सर से बाहर हैं! लेकिन वही जब उनसे यह पूछा गया कि जिले में कही भी फॉरेंसिक मेडिसिन का डॉक्टर जब उपलब्ध ही नही है. तो मौत के कारणों का खुलासा कैसे होगा.? क्या ? कोई एमबीबीएस डॉक्टर के पास मौत की वजह बताने की क्षमता है., जिसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों से लेने की बात कही!
गौरतलब है कि बक्सर जिला इन दिनों भगवान भरोसे चल रहा है.किसी भी मामले की जानकारी न तो उपलब्ध कराई जा रही है. और न हो कोई जिम्मेवारी लेने को तैयार है.विभाग अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए कई तरह की कहानियों को गढ़ लोगो के भावनाओ के साथ खिलवाड़ कर रहा है.जब जिले में एक भी फॉरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर ही नही है.तो पोस्टमार्टम के नाम पर लोगो की भावनाओ के साथ क्यो खिलवाड़ किया जा रहा है?



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