भाजपा को लगी राम का श्राप, वोट लेकर काम नही करने वालो को 10 बर्षों से जनता ने दिखाई बाहर का रास्ता. बोले विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष
अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है. राम की तपोभूमि ! विश्वामित्र सेना ने सरकार एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ खोला मोर्चा ! कहा राम के श्राप से 10 सालों से बक्सर से बेदखल है. राम को ठगने वाले भाजपा के नेता !
सनातन यात्रा बना जन आंदोलन सियासी गलियारे में हलचल
बक्सर - आजादी के 79 साल बाद भी उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा यह बक्सर जिला अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है. चुनाव के दौरान सौगातों की झड़ी लगाने वाले नेता जी! आजादी से लेकर अब तक चुनाव खत्म होते ही गायब हो जाते है.स्थानीय लोगो की जनसमस्याओं को लेकर मैदान में उतरी विश्वामित्र सेना का आंदोलन अब जनांदोलन का स्वरूप ले लिया है.जिसकी तस्वीर शुक्रवार के दिन जिले के कई ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला! विश्वामित्र सेना ने गिनाई सरकार , अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो की नाकामी!
बदहाल बक्सर की लम्बी लिस्ट इस प्रकार है.
मीडिया के सवालों का जवाब देते राष्ट्रीय अध्यक्ष
राजा रुद्रदेव का किला बना कचरा डंपिंग जोन, जनता की आस्था और धरोहर दोनों पर हमला
दलित-महादलित बस्तियों में प्रतिदिन गिराए जाते हैं 88 टन कचरा, बीमारियों से त्रस्त गरीब
सड़क निर्माण में कमीशनखोरी चरम पर, बालू से बनाई जा रही नालियां, कोई मानक नहीं
शिक्षा व्यवस्था की हालत बदतर, मास्टर साहब महीनों से नदारद, बच्चे धोते हैं बर्तन
राम से जुड़ी धार्मिक स्थलों की दुर्दशा, सड़क या गड्ढा – अब पहचानना मुश्किल
जिले में दो लाख से अधिक किसान, पर नहीं है मंडी, मजबूरी में व्यापारी तय करते हैं दाम
चुनाव जीतने के बाद गायब हो जाते हैं नेता, किसानों की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं
विश्वामित्र सेना ने खोला मोर्चा, बोले राजकुमार चौबे – सिर्फ विश्वामित्र कॉरिडोर ही बना सकता है विकसित बक्सर
युवाओं के लिए नही किया गया रोजगार का व्यवस्था केवल पर्यटन से विकसित जिला बन सकता है बक्सर
बिना प्राकलन बोर्ड लगाए ही अधिकारियों के नाक के निचे नली -गली निर्माण में खेला जा रहा है खेल सभी ने साधी चुप्पी
अस्पताल के नाम पर सदर अस्पताल से मरीजों को बरगला कर ले जाते है.दलाल मौन सहमति !
क्यो उपेक्षित है बिहार का बक्सर
पांच घण्टे में पटना पहुँचने का सरकारी दावाउत्तरायणी गंगा की पावन धारा के किनारे बसा बक्सर शहर रामायण काल से लेकर अब तक अपने धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन आज यह तपोभूमि प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. जहाँ एक ओर बक्सर के राजा रुद्रदेव का ऐतिहासिक किला विरासत का प्रतीक है, वहीं आज वह कचरे का डंपिंग जोन बन चुका है. नगर प्रशासन द्वारा इस धरोहर के बगल में कचरा गिराया जाता है, जो न केवल ऐतिहासिक धरोहर का अपमान है बल्कि शहर की छवि पर भी दाग लगा रहा है.
गरीबो के झोपड़ी के पास गिराया जा रहा है शहर का 88 टन कचड़ा
इसी तरह नया बाजार क्षेत्र में रह रहे दलित और महादलित समुदायों के झोपड़ियों से 50 मीटर की दूरी पर सामने प्रतिदिन 88 टन कचरा डाला जा रहा है. बरसात के दिनों में यह कचरा बीमारियों का कारण बनता है. गरीब परिवारों की हालत यह हो गई है कि वे दवा और इलाज में अपनी रोज की कमाई गंवा देते हैं. लेकिन न कोई सिस्टम है, न कोई अधिकारी जो संज्ञान ले.
सड़क में गढे या गढ़े में सड़क
बक्सर की सड़कों की स्थिति और भी भयावह है. हर गली, हर मोहल्ला कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुका है. निर्माण कार्यों में 51% कमीशन, 13% सीपी और 18% जीएसटी देने के बाद ठेकेदार केवल बालू और मिट्टी से नाली बनवा रहा है. मानक की बात तो दूर, कहीं कोई बोर्ड तक नहीं लगाया जाता. न प्राकलन राशि का जिक्र, न गुणवत्ता की गारंटी.
बदहाल है राम की शिक्षा स्थली
शिक्षा का हाल भी किसी से छुपा नहीं है. कहीं बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन धुलवाए जा रहे हैं, तो कहीं शिक्षक महीनों से स्कूल आए ही नहीं हैं. शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही आम बात हो गई है. पूरे जिले में सारा खेल ‘मैनेजमेंट’ का चल रहा है.
विलुप्त की ओर पंचकोशी धाम
धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पंचकोशी धाम और उनसे जुड़ी सड़कों की हालत भी दयनीय है. गड्ढों और टूटी सड़कों से यात्रा करना किसी यातना से कम नहीं. यही कारण है कि देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक अब इस पावन भूमि से पूरी तरह दूरी बना लिए है. और पंचकोशी धाम विलुप्त के कगार पर है.
किसानों की दुर्दशा कागजो में मिल रहा है सरकारी योजनाओं का लाभ
बक्सर जिले में 2 लाख 22 हजार 441 रजिस्टर्ड किसान हैं, जो 1 लाख 7 हजार हेक्टेयर भूमि पर कृषि कार्य करते हैं. लेकिन इन किसानों के पास अपनी उपज बेचने के लिए कोई सरकारी मंडी नहीं है. उन्हें मजबूरन व्यापारियों को औने-पौने दाम में अनाज बेचना पड़ता है. जिन नेताओं ने खुद को किसान हितैषी बताया, वे चुनाव जीतने के बाद सिर्फ सियासत करने लौटते हैं, समस्याओं को सुलझाने नहीं. सरकार से मिलने वाली योजना कागजो में किसानों के घर तक पहुँचाया जा रहा है.जमीन पर सरकारी कर्मी ही अनाज की चोरी कर घर ले जाते है.जिसकी तस्वीर कैमरे में कैद है.
विश्वामित्र सेना ने संभाला कमान तो सियासी गलियारे में मच गई हलचल
इस पूरे परिदृश्य में विश्वामित्र सेना ने आम जनता की आवाज बनने का बीड़ा उठाया है. सेना के संस्थापक राजकुमार चौबे ने 28 अगस्त को उत्तरायणी गंगा की तट से दो दिवसीय पंचकोशी यात्रा की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने धार्मिक स्थलों, सड़कों और आम जनता की समस्याओं को नजदीक से देखा. और सुना ! मीडिया से बातचीत के दौरान वह भावुक हो गए और बोले – "बक्सर को विकसित बक्सर बनाने का एक ही रास्ता है – विश्वामित्र कॉरिडोर।"उन्होंने बताया कि अगर बक्सर में कॉरिडोर बनता है तो देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक आएंगे. इससे जिले में रोजगार, विश्वविद्यालय, हॉस्पिटल और बेहतर माहौल विकसित होगा. लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जो नेता राम के नाम पर चुनाव जीतते हैं, वही राम को भूल जाते हैं. शायद यही कारण है कि पिछले दस वर्षों से बक्सर में भाजपा चुनाव जीतने के लिए तरस गई है. उन्हें राम का श्राप लग गया है.
आम जनता की सेवा के लिए हुई है विश्वामित्र सेना की उत्पत्ति
राजकुमार चौबे ने साफ कहा कि विश्वामित्र सेना की उत्पत्ति इन बहुरूपिए नेताओं को उनके औकात दिखाने और आम जनता की सेवा के लिए हुई है.बक्सर आज विकास के मोड़ पर खड़ा है, लेकिन राह रोकने वाले वही हैं जो प्रतिनिधि बनकर सत्ता की मलाई काट रहे हैं. अब जनता की बारी है कि वह सवाल पूछे, हिसाब मांगे और नई दिशा की ओर कदम बढ़ाए.



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