24 करोड़ की लागत से बनेगा महर्षि विश्वामित्र पार्क, विश्वामित्र सेना की हुंकार से सियासी दलों की बढ़ी बेचैनी
विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे
बक्सर को धार्मिक पर्यटन नगरी बनाने की ओर सरकार ने बढ़ाई कदम, 24 करोड़ की लागत से बनेगा महर्षि विश्वामित्र पार्क, विश्वामित्र सेना की हुंकार से सियासी दलों की बढ़ी बेचैनी
बक्सर- इतिहास, धर्म और संस्कृति से समृद्ध बक्सर अब नए युग में प्रवेश करने को तैयार है. जिले में 24 करोड़ की लागत से महर्षि विश्वामित्र पार्क का निर्माण होने जा रहा है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास राज्य के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन मंत्री सुनील कुमार ने किया. इस अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन शहर के नाथ बाबा घाट पर किया गया .इस मौके पर औधोगिक थाना क्षेत्र के अहिरौली में विश्वामित्र सेना के नए कार्यालय का भी उद्दघाटन किया गया. विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सरकार और सियासी दलों को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि, बक्सर को भीख नही उसका अधिकार चाहिए, और उसके अधिकार से अब कोई वंचित नही रख पायेगा. हमारा गौरवशाली और धार्मिक इत्तिहास होने के बावजूद भी अयोध्या, काशी, सीतामढ़ी, मथुरा के तर्ज पर इस जिले का विकास क्यो नही हो पाया?
महर्षि विश्वामित्र पार्क का शिलान्यास में मंत्री के साथ अन्यविश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हुंकार से उड़ी नेताओ की नींद!
विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन के नए कार्यालय का उद्घाटन के दौरान,गर्जना करते हुए कहा, “बक्सर केवल शिलान्यास का मोहताज नहीं, अब काम जमीन पर दिखना चाहिए. महर्षि विश्वामित्र पार्क की शुरुआत के साथ ही अब विश्वामित्र सेना की अगला कदम बक्सर में महर्षि विश्वामित्र कॉरिडोर और एक आधुनिक एयरपोर्ट का निर्माण करवाने की दिशा में बढ़ेगा. आजादी के बाद से इस बक्सर ने न जाने अब तक कितने सांसद, विधायक और मंत्री दिया. लेकिन उन जनप्रतिनधियो से पूछना चाहता हूँ.की उनलोगों ने इस बक्सर को क्या दिया है? सरकार बक्सर को अब अयोध्या, मथुरा और काशी की तर्ज पर विकसित करे ताकि पर्यटन के रूप में इस जिले की पहचान अंतराष्ट्रीय स्तर पर हो सके. और हमारे यंहा भी आगरा, उत्तराखंड , नैनीताल, अयोध्या,काशी की तरह विदेशी पर्यटक आये और रोजगार के नए नए साधन डेवलप हो,
वेदों का जन्मदाता है बक्सर ! उसके बाद भी नही बना शिक्षा का हब !
विश्वामित्र सेनावही उन्होंने कहा कि बक्सर वेदों की जन्मस्थली है, यहीं च्यवनप्राश का सूत्रपात हुआ, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि आज जिन कंपनियों ने यहां की विरासत को ब्रांड बना अरबों कमाए, उनके लाभ का हिस्सा यहां के युवाओं तक नहीं पहुंचा. युवा बेरोजगार हैं, जबकि बक्सर की पहचान देशभर में एक पवित्र नगर के रूप में होती है. इस दौरान राजनीतिक दल के नेताओ पर भी तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे दोहरे चरित्र वाले नेता आखिर कैसे करेंगे बक्सर का उद्धार?” जंहा स्वयं भगवान राम ने शिक्षा ग्रहण किया था.वह पवित्र भूमि शिक्षा का हब क्यो नही बन पाया!
चुनावी चॉकलेट नही बक्सर को चाहिए उसका अधिकार !
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, बक्सर की अधिकार का मुद्दा छेड़कर विश्वामित्र सेना ने सियासी दलों के नेताओ की नींद उड़ा दी है. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने सम्बोधन के दौरान कहा कि, जनता को केवल चुनावी चॉकलेट नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं की सौगात चाहिए ! अब "भावनाओं से खेलना नहीं चलेगा", बक्सर को उसका हक़ और सम्मान चाहिए. बक्सर भगवान वामन की जन्मस्थली और देवी अहिल्या के उद्धार स्थली के रूप में जाना जाता है, और इसका अपमान अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
क्या कहते है मंत्री जी
वहीं मंत्री सुनील कुमार ने भी बक्सर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. महर्षि विश्वामित्र पार्क इसी दिशा में एक ठोस कदम है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा.
गौरतलब है कि बक्सर अब जुमलों का नहीं, ज़मीन पर दिखने वाले कार्यों की मांग कर रहा है. जनता की ताकत और अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर के बदौलत अब यह जिला खुद को अयोध्या, मथुरा और काशी की बराबरी में देखना चाहता है.जिसकी शुरुआत भी हो गई है. आने वाले वर्षों में देश की सबसे बड़ी धार्मिक-पर्यटन नगरी बक्सर बन सकता है.



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