गजब का खेल खेल रहे है नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी, जादुई छड़ी से कचड़ा को बना दी रातोरात मिट्टी

 ठेकेदारों से मिलकर गजब का खेल-खेल रहे है नगर परिषद के अधिकारी, और कर्मचारी ! 39 हजार 872 टन कचडा  घोटाले का खुल गया राज ! नप के कर्मीयो ने जादुई छड़ी से कचड़े को रातों रात बना दी मिट्टी. कार्यपालक पदाधिकारी ने,अधिनस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मांगी पूरी रिपोर्ट तो मच गया हड़कम्प !

रुद्रदेव के किले के चारो तरफ कचड़े के ऊपर हो रहा है मिट्टी की भराई !

बक्सर-शहर के ऐतिहासिक किला मैदान, एवं राजा रुद्रदेव के किले के बीच से गायब 39 हजार 872 टन कचड़े का राज खुल गया है. शहरी क्षेत्र के घरों से निकलने वाली यह गंदगी, अब नप कर्मियो के गले का फ़ांस बनते जा रहा है.राजा रुद्रदेव के किले की पहचान मिटाने ,  एवं जादुई छड़ी से कचड़े को रातों रात मिट्टी बना देने की पूरी खेल का रिपोर्ट कार्यपालक पदाधिकारी ने सोमवार तक अपने अधीनस्थ अधिकारियो से मांगी है. जिसके बाद विभाग में हड़कम्प मच गया है. विभागीय सूत्रों की माने तो, राजा रुद्रदेव के किले के चारों तरफ किले की सुरक्षा के लिए बने हजारों साल पुराने गड्ढे में कचड़ा डालकर ऊपर से मिट्टी डालते  समय किसी ने नही सोचा था कि उनका यह राज खुल जायेगा. और अपने ही बने हुए जाल में कर्मी उलझ जाएंगे.

कचड़े को मिट्टी बनाने का बर्षो से खेला जा रहा है खेल ! 

राजा रुद्रदेव के किले के हजारों साल पुराने खाई को भरवाकर भू माफिया को कब्जा करने की है तैयारी !

नाम नही छापने के शर्त पर नप के कर्मचारी ने बताया कि, कचड़े को मिट्टी बनाने का खेल बर्षो पुराना है. शहर के ज्योतिचौक से लेकर बस स्टैंड

तक, रात के अंधेरे में पहले कचड़ा, और ऊपर से मिट्टी गिराकर जमीन कब्जा करा दिया गया.जिस पर लोग अब गिट्टी, बालू, सीमेंट, के साथ ही अन्य रोजगार कर रहे है.ठीक उसी फार्मूला का इस्तेमाल शहर के ऐतिहासिक किला मैदान, एवं सर्किट हाउस के बीच की जमीन पर  किया गया है.जिसमे लाखो की हेराफेरी की गई है. शहर के इस बेशकीमती जमीन पर भू माफियाओ का नजर है.पार्किंग स्थल के नाम पर उनको टेंडर देकर, पूरी जमीन उनके हवाले कर देने की तैयारी है. जैसे रामरेखा घाट के सामने किया गया.

 जादुई छड़ी से रातों रात कचड़ा बना मिट्टी !

किले की पहचान मिटाने की कैसे मिल गई अनुमति

30 साल पुराना  39 हजार 872 टन कचड़े गायब होने की सूचना के बाद नप के कर्मीयो का खूब किरकिरी हो रहा है.स्थानीय लोगो ने नप कर्मीयो पर तंज कसते हुए कहा कि, रातों-रात कचड़े को मिट्टी बनाने का नए फार्मूला का ईजाद कर बक्सर नगर परिषद के अधिकारियों ने इत्तिहास रच दिया है.  

क्या कहते है बक्सर के लोग ?

संदीप ठाकुर जदयू नेता

30 साल से जमा 39 हजार, 872 टन कचडा घोटाले को लेकर, जदयू युवा प्रदेश महासचिव संदीप ठाकुर, ने बताया कि, सारे नियम, कानून को ताक पर रखकर, नप के सम्बंधित अधिकारियों, एवं कर्मचारियों ने 1054 ईसवी में बने राजा रुद्रदेव के किले, की इत्तिहास  को रातो-रात मिटाने का जो खेल  खेला है.उस खेल को हर कोई समझ रहा है. सिष्टम में बैठे राजनेता, हो या संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी, उन्हें चिंता इतिहास और भविष्य का नही है.यदि होता तो इत्तिहास के इस धरोहर के साथ छेड़छाड़ नही करते.हैरानी की बात है.की राजा रुद्रदेव के किले की पहचान मिटाने के लिए इन्हें पुरात्विक डिपार्टमेंट ने परमिशन दी है.या खुद ही 40 हजार टन कचड़ा उठाने से लेकर दबाने तक के खेल में करोड़ो डकार गए. और मिटी की लेप चढ़ा दी.

जिलाधीकारी को भी किया गया गुमराह !

हाल ही में जिलाधीकारी डॉक्टर विद्यानन्द सिंह, ने नप के कार्यपालक पदाधिकारी से जव यह पूछा कि, शहर के ऐतिहासिक किला मैदान में कचड़ा कैसे गिर रहा है. जिसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार ने, जिलाधीकारी को गुमराह करते हुए, खतीबा में बने डंपिंग जोन की सड़क खराब होने का हवाला देते हुए, जल्द ही कचड़ा का उठाव करा लेने की बात कही थी. लेकिन उस कचड़े को उठाने के बजाए उसे वही पसार दिया गया.जिसकी जांच जिलाधीकारी कराए तो नप के नए कारनामे का पोल ही खुल जायेगा.जिसकी तस्वीर कैमरे में कैद है.

अधिकारी ने मांगी रिपोर्ट !

बक्सर के इत्तिहास के साथ खिलवाड़ करने का मामला प्रकाश में आने के बाद,नप के प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार, ने कहा की सारे सवालों का विस्तृत रिपोर्ट सम्बंधित  अधिकारियों, एवं कर्मचारियों से मांगी गई है. दो दिनों के अंदर इस बात की जानकारी मीडिया को दी जाएगी. कि राजा रुद्रदेव के किले के चारो तरफ किसके आदेश पर,पहले कचड़े, और फिर मिट्टी की भराई की गई है. क्या ? उसके लिए बोर्ड की बैठक बुलाकर कोई निर्णय लिया गया था. या मौखिक ही टेंडर निकाला दिया गया. क्या ? इत्तिहास के हजारों साल पुराने इस धरोहर को मिटाने का अधिकार नप को है. इन तमाम सवालों का विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी .

गौरतलब है कि, एक हजार साल पुराने किले की इत्तिहास को मिटाने के लिए , जिस चालाकी के साथ, 30 साल पुराने रसायनिक कचड़े को जमीन में दफना दिया गया. उसके खिलाफ पुरातात्विक डिपार्टमेंट ,एवं बिहार पॉल्यूशन डिपार्टमेंट में शिकायत करने के लिए स्थानीय लोग तैयारी में जुट गए है. हैरानी की बात है कि शहर के बीचोबीच खेले जा रहे इस खेल पर साहब क्यो चुप है?

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