विश्वामित्र सेना की हुंकार बक्सर को विश्वामित्र कॉरिडोर की सौगात दे सरकार.,चुनावी चॉकलेट नही पर्यटन को मिले बढावा !

 बक्सर में विश्वामित्र कॉरिडोर बनाने की मांग को लेकर, विश्वामित्र सेना ने भरी हुंकार ! बोले विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे, नाखून कटवाकर शहीद बनने की कोशिश ना करे केंद्र, एवं राज्य की सरकार ! चुनावी चॉकलेट नही बक्सर को चाहिए विश्वामित्र कॉरिडोर !

विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तस्वीर

बक्सर- जिले में सनातन संस्कृति की गौरवशाली इतिहास को पुनर्स्थापित करने के लिए, विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सह संयोजक राजकुमार चौबे के नेतृत्व में शुरू की गई मुहिम रंग ला रही है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, बक्सर वासियों की हुंकार से घबड़ाई एनडीए की सरकार  ने महर्षि विश्वामित्र पार्क की सौगात दी है! जिसे चुनावी चॉकलेट बताया जा रहा है. स्थानीय लोगो की माने तो बक्सर को चुनावी लॉलीपॉप नही! पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, विश्वामित्र कॉरिडोर की सौगात चाहिए ! राम के नाम पर राजनीति कर सत्ता सुख भोगने वाले राजनेता!प्रयास किये होते तो आज हमारा बक्सर उपेक्षित नही होता!

विश्वामित्र सेना का सवाल , राम के शिक्षा स्थली का उपेक्षा क्यो  कर रही है सरकार ?

ताड़का वध का सिमबॉलिक तस्वीर

सनातन संस्कृति की आवाज को बुलंद कर रहे, विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजकुमार चौबे, ने केंद्र, एवं राज्य की सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, भगवान राम के जन्म स्थली अयोध्या में, राम मंदिर के निर्माण में कुल 1800 करोड़ रुपये खर्च कर उसे भव्यता प्रदान की गई. सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में 882.87 करोड़ की लागत से, अयोध्या के राम मंदिर के तर्ज पर, जानकी मंदिर का निर्माण कराने का आधारशिला केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने रख भी दी है. फिर बक्सर की उपेक्षा सरकारें  क्यों कर रही है? जिस बक्सर की धरती पर महर्षि विश्वामित्र जैसे गुरु से ज्ञान पाकर, भगवान राम ने तड़का राक्षसी का वध कर पूरे विश्व में पराक्रमी राम कहलाये, उस राम के शिक्षा स्थली की उपेक्षा केंद्र, एवं राज्य की सरकार  क्यो कर रही है? विश्वमित्र सेना के द्वारा बक्सर में विश्वामित्र कॉरिडोर निर्माण की मांग को लेकर, मुहिम चलाया जा रहा है. जिससे कि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके!हमारे नौजवानों को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े.

नारी हत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए, भगवान राम ने की थी पांच कोष की यात्रा!

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में ताड़का राक्षसी का वध करने के बाद. नारी हत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए, भगवान राम, अपने भ्राता लक्ष्मण, महर्षि विश्वामित्र संग 84 हजार साधु संतों के साथ उत्तरायणी गंगा में स्नान कर, बालू की रेत से ही भगवान  शिव के लिंग की स्थापना की विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद, पांच कोष की परिक्रमा यात्रा की शुरुवात की. जिसे आज भी पंचकोशी यात्रा के नाम से जाना जाता है. प्रत्येक साल अगहन मास में लाखो श्रद्धालु, देश -विदेश से चलकर इस यात्रा में शामिल होने के लिए बक्सर आते है. जिस जगह उत्तरायणी गंगा में भगवान राम ने डुबकी लगाई थी उसे आज रामरेखा घाट के नाम से जाना जाता है.

 बक्सर में उपेक्षित है भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थल!

पत्थर रूपी अहिल्या के उद्धार की सिमबॉलिक तस्वीर

त्रेतायुग में भगवान राम अपने यात्रा के पहले पड़ाव में गौतम ऋषि के आश्रम अहिरौली पहुँचे. जंहा पत्थर रूपी अहिल्या का उंन्होने उद्धार की.दूसरे पड़ाव में नारद मुनि का आश्रम नदांव पहुँचे.तीसरे पड़ाव में भार्गव ऋषि के आश्रम भभुअर, चौथे पड़ाव में उद्दालक ऋषि के आश्रम उन्नवास, एवं पांचवे और अंतिम पड़ाव में चरित्र वन बक्सर पहुँचकर उंन्होने लिट्टी चोखा का भोग लगाया था. विश्राम सरोवर पर विश्राम करने के बाद.महर्षि विश्वामित्र एवं भ्राता लक्ष्मण के साथ जनकपुर के लिए प्रस्थान किये.भगवान राम से जुड़े ये सभी  स्थल आज अपने बदहाली पर आंसू बहा रहे है. इन आश्रम के तलाब, और जमीन के अधिकांश हिस्से  पर भू-माफियाओ ने कब्जा जमा लिया. और प्रशासन मूकदर्शक बन, केवल पंचकोशी के आयोजन के नाम पर कागजो में ही कोरम पूरा कर रहा है.

गौरतलब है कि उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा यह बक्सर शहर जनप्रतिनिधियों, एवं जिला प्रशासन के अनदेखी के कारण अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है.जिस रामरेखा घाट पर एक दिन में, 10 लाख लोग केवल मुंडन संस्कार करने के लिए आते है. वैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर एक शौचालय तक नही है.मजबूरन लोग गंगा नदी के तट पर ही मलमूत्र का त्याग करते है.और सरकार नमामि गंगे के नाम पर अब तक अरबो रुपये पानी की तरह बहा चुकी है.

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