यह बिहार का बक्सर है साहब ! न टेंडर न निविदा तो क्या ? पॉकेट की पैसे से खेल दी इतनी बड़ी खेल !
यह बिहार का बक्सर है साहब ! यहां के नगर परिषद के अधिकारी न टेंडर निकालते है, और न ही निविदा ! तो क्या ? अपनी जेब से मिट्टी गिराकर भर दी राजा रुद्रदेव के किले की सुरक्षा के लिए बनाई गई खाई ! साहब की चुप्पी पर लोग उठा रहे है सवाल ! स्थानीय लोगो ने कहा" गइल माघ 29 दिन बाकी" !
गौरवशाली बक्सर
बक्सर- यह बिहार का बक्सर जिला है साहब ! यंहा के विभागीय अधिकारियों और तथाकथित समाज सेवको के नए-नए कारनामे को देखकर, शर्म भी शर्माकर अदब से अपने सर को झुका लेता है. मामला बक्सर नगर परिषद से जुड़ा हुआ है.जंहा लिगेसी वेस्ट के लिए रखे गए 39 हजार 872 टन कचड़े की इतनी बारीकी से घोटाला की गई! जिसकी भनक इस खेल के खिलाड़ियों के अलावे किसी को नही लगी! पूरे कचड़े को 1054 ईस्वी में बने राजा रुद्रदेव के किले की सुरक्षा के लिए बनाई गई खाई में डालकर, ऊपर से मिट्टी डाल दी गई ! और जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के रूप में दी हुई, लाखों रुपये निगलकर जिम्मेवरानो ने डकार भी नही ली! 6 महीने बाद, जब मीडिया ने जड़े खोदना शुरू की, तो परत दर परत राज खुलने लगा है. कई हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई है.
मुख्यमंत्री के यात्रा के आड़ में तथाकथित समाज के सेवको ने अधिकारियों से मिलकर खेल दी खेल !
15 फरवरी 2025 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रगति यात्रा पर बक्सर जिला मुख्यालय में पहुँचे हुए थे. प्रदेश के मुख्यमंत्री को बदहाल बक्सर की वास्तविक सूरत न दिख जाए , इसके लिए 1 महीने पहले से ही, बड़े पैमाने पर तैयारिया शुरू की गई थी. कही पर्दे लगा दिए गए, तो कही कचड़े के ऊपर मिट्टी गिराकर दिवालो पर खूबसूरत पेंटिंग बना दी गई ! राजा रुद्रदेव के किले की पुरानी भवनों को गिराकर, उसमें बने अतिथिगृह के प्रवेश द्वार से लेकर, मुख्य सड़क तक फूलों के गमले सजा दिए गए.अतिथिगृह के हरे -भरे दर्जनों पेंड को जमींदोज कर दिया गया. सीएम के इसी यात्रा के आड़ में, नगर परिषद के अधिकारियों एवं तथाकथित समाज के बड़े सेवको ने,राजा रुद्रदेव के किले की सुरक्षा के लिए बनाई गई खाई में भी मिट्टी डालकर, अपना काम निकाल लिया! भू माफिया कैसर-ए -हिन्द के इस जमीन को दखल करते, उससे पहले ही इनकी पूरी पोल खुल गई है. चौतरफा फजीहत होता देख , अब अधिकारी संग सफेदपोश, पूरे मामले की लीपापोती करने में जुट गए है!
प्रगति यात्रा के दौरान की ली गई तस्वीरनप के अधिकारियों के भी नही सुनते है कर्मचारी !
राजा रुद्रदेव के किले की पहचान मिटाने की हो रही साजिश की खुलासा होने के बाद .नगर परिषद के प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार, ने त्वरित कार्रवाई करते हुए, विभाग के ही बड़ा बाबू यसवंत कुमार सिंह. को निर्देश दिया था की, सम्बंधित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियो से कुल 9 बिंदुओ पर जवाब मांगकर लिखित रूप से मीडिया को उपलब्ध कराया जाए, बड़ा बाबू द्वारा पत्रचार करने के 15 दिन का समय गुजर जाने बाद भी किसी ने कोई जवाब नही दिया!
क्या कहते है नप के बड़ा बाबू ?
हमारा गौरवशाली बक्सर की वास्तविक तस्वीरबक्सर नगर परिषद के बड़ा बाबू यसवंत कुमार सिंह ने, फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि, इन बिंदुओं पर सभी सम्बंधित कर्मचारियों से जवाब मेरे द्वारा मांगा गया था.लेकिन सभी ने चुप्पी साध ली है.
1-राजा रुद्रदेव के किले की सुरक्षा के लिए चारो तरफ से बनाये गए खाई में कूड़ा डंप किसके इजाजत से की गई है. ? क्या ? इसके लिए कोई नोटिफिकेशन निकाला गया था.
2- 30 साल पुराने 39 हजार 872 टन कचड़े को, सर्किट हाउस एवं किला मैदान के बीच पसारने, और उसके ऊपर से मिट्टी डालने का परमिशन किसने दी ? क्या ? मिट्टी और कूड़े का टेंडर मौखिक था, या लिखत!
3- कैसर -ए-हिन्द की जमीन पर 1054 ईस्वी में बने राजा रुद्रदेव के किले की इत्तिहास को मिटाने का अधिकार क्या ? नगर परिषद कार्यालय के अधिकारियों को है. और यदि नही किले के चारो तरफ बने खाई में कैसे मिट्टी की भराई कर दी गई?
4-बिना नम्बर प्लेट की गाड़ियां नगर परिषद कार्यालय में कैसे चल रही है. यदि कोई घटना या दुर्घटना हो जाती है तो इसका जिम्मेवार कौन होगा?
5- शहर की साफ सफाई का टेंडर कितने का है? एक वार्ड में सफाई कर्मियों वास्तविक संख्या कितनी है?
6- जिलाधीकारी के आदेश के बाद भी बक्सर सदर अस्पताल से प्रत्येक दिन कचड़े की उठाव क्यो नही हो रहा है?
7- पूरे शहर की साफ-सफाई में कितने मानव बल काम कर रहा है. और कितना टन कचड़े प्रत्येक दिन शहर से निकलता है.
8-नगर परिषद की लापरवाही के कारण 20 से अधिक हरे भरे पेंड जलकर सुख गए, उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
गौरतलब है कि राजा रुद्रदेव का किला बक्सर जिले की गौरवशाली इतिहास की पहचान है.एक साजिश के तहत इस जिले की पहचान को मिटाने के लिए रात के अंधेरे में खेल खेला जा रहा है.जिले के नौजवानों से अपील है, कि अपने किले,और इत्तिहास के धहरोहर की पहचान को बचाने के लिए, आगे आये.यह जिला आपकी है.यह गौरवशाली इतिहास आपके है.



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