विश्वामित्र सेना का सनातन संस्कृति अभियान ने लिया जन आंदोलन का स्वरूप बक्सर से निकली सनातन की चिंगारी का राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी चर्चा !

 सनातन संस्कृति ने लिया जन आंदोलन का स्वरूप, सनातन के नाम पर वोट का सियासत करने वाले राज नेताओं को भी अब सनातन की सताने लगी चिंता! बक्सर से निकली सनातन की चिंगारी का राष्ट्रीय स्तर पर  होने लगी चर्चा . संगठन से जुड़ने के लिए लोगो में दिखा उत्साह ! विश्वामित्र सेना ने ग्रामीण इलाकों में चलाया जनसंपर्क महाअभियान, बोले राजकुमार चौबे - "बक्सर को चाहिए विश्वमित्र कॉरिडोर" बिहार की धार्मिक राजधानी बनेगा हमारा जिला ! राम के शिक्षा स्थली की उपेक्षा बर्दास्त नही करेंगे बक्सर के लोग!

सनातन की चिंगारी ने लिया जनांदोलन का स्वरूप

बक्सर- जिले में सनातन संस्कृति की गौरवशाली इत्तिहास को पुनः जीवित करने के लिए, विश्वामित्र सेना ने एक बड़े जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की है. विश्वमित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर, यह अभियान विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में चलाया जा रहा है. जहाँ विश्वामित्र सेना के सदस्य लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं और सनातन संस्कृति के महत्व को समझा रहे हैं. इस अभियान की अगुवाई कर रहे विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने बक्सर को एक प्रमुख धार्मिक स्थल बनाने के लिए "विश्वामित्र कॉरिडोर" के निर्माण की मांग की है.

ग्रामीण इलाको में जन सम्पर्क करते 

क्या कहते है विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ?

विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने बताया कि, "बक्सर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत गहरा है. यह वही स्थान है जहाँ महर्षि विश्वामित्र ने सनातन धर्म की नींव रखी थी. बक्सर के गौरवशाली इतिहास के अनरूप ! इसे धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. अगर हम अयोध्या और जनकपुर के तर्ज पर बक्सर में भी धार्मिक स्थानों का विकास करें, तो यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से भी बक्सर को एक नया मुकाम मिलेगा" यंहा के युवाओं को बेरोजगारी का दंश नही झेलना पड़ेगा. 

नही चाहिए बक्सर को चुनावी चॉकलेट !

ग्रामीण इलाकों में पहुँची विश्वामित्र सेना

वही उंन्होने  कहा कि बक्सर को अब चुनावी "चॉकलेट" नहीं चाहिए, जो केवल चुनावी वादों तक सीमित रहे, बक्सर को एक स्थायी और स्थिर विकास की आवश्यकता है. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बक्सर को अब एक ऐसा धार्मिक और सांस्कृतिक कॉरिडोर चाहिए, जो यहाँ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया भर में प्रस्तुत कर सके. जिससे देश दुनिया से बड़ी संख्या में पर्यटक यंहा आएंगे.तो बक्सर शैक्षणिक और आर्थिक रूप से समृद्ध होगा. यंहा के माहौल में परिवर्तन आएगी.

भगवान राम से जुड़े स्थलों का हो संरक्षण !

आज भगवान राम, एवं महर्षि विश्वामित्र से जुड़े स्थलों की क्या ? हालात है! चरित्रवन में जिस जगह तड़का का मूर्ति लगाया गया था. करोड़ो के उस जमीन को भू माफियाओ ने कब्जा कर लिया. वही हालात विश्वामित्र सरोवर की है. जनप्रतिनधियो एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों की उदासीनता के कारण आज बक्सर का यह दुर्दशा हो रहा है. आज इतने महत्वपूर्ण स्थल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. मैं चाहता हूँ कि,सबसे पहले इन स्थलों का संरक्षण और प्रचार किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक धरोहर का सही ज्ञान हो सके।"

सनातन संस्कृति का लड़ाई बना जन-  आंदोलन

विश्वामित्र सेना के द्वारा शुरू की गई सनातन संस्कृति की लड़ाई अब जन आंदोलन का रुप ले चुका है. कई पार्टी के नेता.भी अब सनातन संस्कृति पर चर्चा कर खुद को सनातन की सबसे बड़ा हिमायती बताने में लगे हुए है.इधर विश्वामित्र सेना अब इस मुहिम को लेकर ग्रामीणों इलाको में पहुँच गई है.बक्सर सदर प्रखंड के नाट, बड़कागांव, उपाध्यापुर, समेत आधा दर्जन गांवों में जन सम्पर्क अभियान चलाकर लोगो को इसके उद्देश्य के बारे में बताते हुए, लोगों से  अपील की कि वे इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लें और बक्सर को एक धार्मिक और सांस्कृतिक हब बनाने के इस संघर्ष में योगदान दें.

गौरतलब है कि, विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने 2 बर्ष पहले  बक्सर की पावन भूमि से जिस सनातन संस्कृति की लड़ाई को हवा दी थी. आज उसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी है. और अब इस आंदोलन ने जन आंदोलन का रूप ले लिया है. लोग इससे जुड़ने के लिए उत्साहित दिखाई दे रहे हैं. राजकुमार चौबे की माने तो, "हमारी सनातन संस्कृति का संरक्षण सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता है. बक्सर जैसे ऐतिहासिक स्थल को पुनः गौरवमयी बनाना हम सभी का कर्तव्य है।"

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