विश्वामित्र सेना का सनातन जोड़ो यात्रा बना जन आंदोलन सनातनियो के हुंकार से हिले सियासी गलियारे !
विश्वामित्र सेना का सनातन जोड़ो यात्रा ने लिया जन आंदोलन का स्वरूप ! हजारों साधु संतो, एवं स्थानीय लोगो के साथ विश्वामित्र सेना ने भरी हुंकार ! जय श्रीराम के जयघोष से हिले सियासी गलियारे ! सोशल मीडिया से लेकर चौक -चौराहों पर अब उठने लगे है सवाल ! धार्मिक धरोहरों के बदहाली का कौन है जिम्मेवार ?
साधु संतों के साथ गंगा पूजन करते विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्षबक्सर- धर्म की धरा, तप और तीर्थ की भूमि बक्सर एक बार फिर सनातन संस्कृति की आवाज़ बनकर गूंज उठी है. विश्व प्रसिद्ध रामरेखा घाट से वृहस्पतिवार के दिन , विश्वामित्र सेना के नेतृत्व में "सनातन जोड़ो यात्रा" का भव्य शुभारंभ हुआ. यात्रा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, और गंगा पूजन से की गई, जिसमें हजारों सनातन अनुयायियों ने भाग लिया. ढोल, नगाड़ो के बीच सनातनियो के जय श्रीराम के जयघोष से इलाके का जर्रा-जर्रा कांप उठा. जिससे सियासी गलियारे में हलचल सी मच गई है. बक्सर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले राष्ट्रीय पार्टी के नेता, सोशल मीडिया में विश्वामित्र सेना की तुलना शिवसेना से कर, अपनी घबराहट को बताने में लगे हुए है!
प्रभु श्रीराम ने जंहा से की थी पंचकोशी यात्रा की शुरुवात ! विश्वामित्र सेना ने उसी रामरेखा घाट से की शंखनाद !
यात्रा के दौरान ली गई तसवीर
त्रेतायुग युग में प्रभु श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र, लक्ष्मण, एवं 84 हजार साधु संतों के साथ, जिस उत्तरायणी गंगा की तट से पंचकोशी यात्रा की शुरुवात की थी. मिनी काशी के उसी रामरेखा घाट से विश्वामित्र सेना ने सनातन जोड़ो इस यात्रा का शुरुवात कर, राजनीतिक दल के नेताओ की बेचैनी बढ़ा दी है. सनातन के नाम पर आजादी से लेकर अब तक, बक्सर के साथ विश्वासघात करने वाले नेताओं के सामने एक नई चुनौती पेशकर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने उनके रातों का नींद हराम कर दिया है., इस यात्रा का उद्देश्य सनातन संस्कृति, धर्म और परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाना है, साथ ही बक्सर की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को संरक्षित कर पुनर्जीवित करना है.
क्या ? कहते है विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष
शहर के ऐतिहासिक रामरेखा घाट पर सनातन जोड़ो यात्रा के दौरान, मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, राजकुमार चौबे ने कहा कि, बक्सर की पहचान गुरु विश्वामित्र, वेद, तड़का वध, वामन औतार, रामायण, राम की शिक्षा स्थली, पंचकोशी ,परशुराम और कई ऋषियों की तपस्थली के रूप में रही है, लेकिन दुर्भाग्य है कि यहाँ के जनप्रतिनिधियों—चाहे सांसद हों या विधायक—सभी ने इस ऐतिहासिक नगरी को बदहाल बना दिया. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “धार्मिक धरोहरों को तिनके की तरह बिखेर दिया गया.समृद्ध बक्सर को बदहाल बक्सर बना दिया गया” और राम के नामों का इस्तेमाल केवल कुर्सी पाने के लिए किया गया. नही तो आज यह बकसर सनातन की धार्मिक राजधानी बन गई होती!
नेताओ की निष्क्रियता के कारण अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है बक्सर !
विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे की हुंकार और उनके समर्थकों की भारी उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. स्थानीय राजनीतिक दलों के नेताओं में बेचैनी देखी जा रही है, क्योंकि ? यह यात्रा न केवल धर्म के पुनर्जागरण की बात कर रही है, बल्कि शासन और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर सीधा सवाल भी उठा रही है.यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और युवाओं ने ‘जय सनातन’, ‘बक्सर जागो’, और ‘धर्म की जय हो’ के नारे लगाए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भगवा ध्वज और साधु-संतों की अगुवाई में निकली यह यात्रा एक सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है.
गौरतलब है कि विश्वामित्र सेना की सनातन जोड़ो यात्रा, अब केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रही, बल्कि यह एक जन आंदोलन बनती जा रही है.रामरेखा घाट से उठी यह आवाज़ सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि बक्सर को उसके गौरवशाली अतीत से जोड़ने और सत्ता सुख लेने वाले नेताओं के मुंह पर तमाचा है.



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