गजब का खेल ! कैसर-ए-हिन्द की जमीन पर कैसे मिल गया नगर परिषद को मालिकाना हक ! कही साहब की मौन सहमति से तो नही भरा जा रहा है राजा रुद्रदेव का किला ????

 कैसर-ए हिन्द की जमीन पर कैसे मिल गई नगर परिषद के अधिकारियों को मालिकाना हक ! कही साहब की मौन सहमति से तो नही भरा जा रहा है राजा रुद्रदेव के किला!  क्या ? पुरातत्व विभाग से मिला है एनओसी ! किले को बचाने के लिए आगे आये कई स्थानीय लोगो ने उठाया सवाल !

कैसर-ए -हिन्द की जमीन पर नप कर रहा है कब्जा !

बक्सर- जिले में जिला प्रशासन के नाक के नीचे, बक्सर नगर परिषद के अधिकारी, एवं कर्मचारी गजब का खेल, खेल रहे है! 1054 ईस्वी में स्थापित राजा रुद्रदेव के किले की पहचान को शातिराना तरीके से मिटाने के लिए, रातो-रात किले की सुरक्षा के लिए बनाए गए गढ़े में नप के अधिकारी पहले अपनी नाकामियों  का 39 हजार 872 टन कचड़ा डालते  है.  फिर शहर के सफेदपोश अपनी कामयाबी की मिट्टी, डालकर कैसर-ए- हिन्द के अरबो की जमीन पर अपना मालिकाना हक कायम करने में लगे हुए है. जिसको लेकर अब स्थानीय लोगो ने मोर्चा खोल दिया है.जदयू, भाजपा के साथ ही राजद के नेताओ ने जिला प्रशासन, एवं नगर परिषद के अधिकारियों संग नए सरकार के संचालको पर तंज कसते हुए कहा की,  वाह रे जनता की सरकार ! जिले के इत्तिहास को मिटाने में इतनी दिलचस्पी क्यो ? बक्सर के लोगो की खामोशी को उनकी कमजोरी समझने का भूल न करे, नही तो बक्सर के लोग कुर्सी से पहचान मिटा देंगे.और ऐसा आंदोलन होगा जिसका कल्पना भी किसी ने नही की होगी !

हर रोज यंहा से गुजरते है जिला प्रशासन के अधिकारी ??

माल महाराज के मिर्जा खेले होली !

शहर के बीचोबीच उत्तरायणी गंगा की तट पर 1054 ईस्वी में स्थापित, राजा रुद्रदेव के किले की  जमीन कैसर - ए हिन्द की जमीन है. फिर उसमें कचड़ा डालकर उसे भरने, एवं इत्तिहास को मिटाने का मालिकाना हक नगर परिषद के अधिकारियों, एवं कर्मचारियों को कैसे मिल गया!  किले की सुरक्षा के लिए बनाए गए गढ़े को भरने से पहले, क्या ? पुरातत्विक विभाग से अनुमति ली गई थी!  और यदि नही, तो जिला प्रशासन के अधिकारियों की खामोशी को उनकी मौन सहमति तो मान ली जाए, क्योकि ? कैसर -ए हिन्द की जमीन जिलाधीकारी के अधीन होता है.

खूबसूरत बक्सर के चेहरे पर 14 करोड़ वाले कचड़े का बदनुमा दाग !

  शोधकर्ता राजा रुद्रदेव के किले में कचड़े पर करेंगे शोध !

 बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित राजा रुद्रदेव का किला, ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है., क्योंकि ? यह 1764 में लड़े गए बक्सर के युद्ध का साक्षी रहा है, जिसमें अंग्रेजों ने शुजाउद्दौला, मीर कासिम और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को हराया था. किले का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा रुद्रदेव द्वारा कराया गया था. यहाँ की दीवारें, प्राचीर, और पुराने कक्ष आज भी उस युद्धकालीन रणनीति और संरचना को दर्शाते हैं. आज भी यह स्थल इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. यहाँ से गंगा का दृश्य भी अत्यंत मनोहारी लगता है, जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है.  किले के अंदर आज भी बारूद घर मौजूद है.इत्तिहास के जानकारों की माने तो, इसमें अंग्रेज अपना गोला ,बारूद रखते थे. जिसका जीता जागता कई साक्ष्य आज भी मौजूद है. इतने महत्वपूर्ण किले की इत्तिहास को मिटा देने की साजिश दुर्भाग्यपूर्ण है!

झूठ पर झूठ बोल रहे है नप के अधिकारी !

नगर परिषद के अधिकारी, एक झूठ को छुपाने के लिए, एक और नया झूठ बोलकर अपने ही बुने हुए जाल में उलझते जा रहे है. किला मैदान में नप के अधिकारियों के द्वारा गिरवाये जा रहे कूड़े पर, जब जिलाधीकारी डॉक्टर विद्यानंद सिंह ने संज्ञान ली. तो बताया गया की ! रास्ते के अभाव के कारण वंहा कूड़ा रखा गया है.जल्द ही हटा लिया जाएगा ! रात के अंधेरे में कूड़े को किले की दीवार के पास फैला दी गई. जिसकी जांच जिलाधीकारी कराए, तो सारा राज खुल जायेगा!

लिगेसी वेस्ट के लिए रखा गया है कचड़ा !

 यह सवाल जब नप के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार, से  पत्रकारों ने पूछा तो उंन्होने वताया की, लिगेसी वेस्ट के लिए 39 हजार 872 टन कचड़ा रखा गया है . जिसका जल्द ही निस्तारण हो जाएगा! जबकि स्वच्छता पदाधिकारी रवि कुमार ने बताया कि इस कूड़े का लिगेसी वेस्ट के लिए टेंडर हो गया है. जल्द ही काम शुरू होने वाला है. तीसरे ही दिन जब मीडिया ने 39 हजार 872 टन कचड़े घोटाले की खबर प्रकाशित की, तो अधिकारियों ने बयान बदल ली! स्वच्छता पदाधिकारी ने फोन पर बताया कि, टेंडर रद्द हो गया है! सवाल सीधा है. कचड़ा गायब होने के बाद टेंडर रद्द हुआ था. या पहले ?  और जब पहले ही टेंडर रद्द हो गया था. तो दिन पहले गलत जानकारी क्यो ? दी गई! जबकि अधिकारी का तबादला दो महीने पहले ही हो गया था.

राजद नेता ने पूछा सवाल !

किले की पहचान को मिटाने के लिए रचे जा रहे षड्यंत्र को लेकर, राजद नेता संतोष भारती ने जिला प्रशान,एवं नगर परिषद के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि, बक्सर के इत्तिहास को मिटाने का अधिकार उनको किसने दे दिया! बक्सर कोई चारागाह नही है. जंहा अधिकारी आये लूटपाट करे और निकल जाए,  बक्सर की किला, बक्सर की गौरवशाली इतिहास की पहचान है. और  हमारा पहचान मिटाने का साजिश करे तो उसे बक्सर के लोग बर्दास्त नही करेंगे!

गौरतलब है कि, राजा रुद्रदेव के किले की  जिस जमीन के जिस जमीन टुकड़े पर, कचड़ा डालकर नगर परिषद के अधिकारी कब्जा करने के फिराक में लगे हुए है. वह जमीन कैसर-ए- हिन्द की जमीन है.विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोटी रकम लेकर उस जमीन पर पार्किंग जोन बनाने के बहाने भू-माफियाओ को देने की तैयारी 2 बर्षो से चल रही है. बिना किसी टेंडर का वँहा कैसे हजरो टन कचड़े के ऊपर मिट्टी का वर्क हो गया.और इसकी भनक तक जिला प्रशासन के अधिकारियों को नही है????

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