पूरे शहर में नगर बिना रजिस्ट्रेशन वाली कैसे सरपट दौड़ लगा रही है. नगर परिषद की दर्जनों गाड़िया. पुलिस के इकबाल पर लोगो ने उठाया सवाल !

 बक्सर  पुलिस की इकबाल पर लोगो ने उठाया सवाल!पूछा क्या? कमजोरों पर ही जोर आजमाइश करती है बक्सर की पुलिस ! बिना नम्बर प्लेट के पूरे शहर में कैसे दौड़ रही है नगर परिषद कार्यालय की बड़ी-बड़ी दर्जनों गाड़िया!दुर्घटना हुई तो कौन होगा जिम्मेवार ???

बिना नम्बर प्लेट वाली गाड़िया

बक्सर- जिला मुख्यालय में नगर परिषद कार्यालय की दर्जनों गाड़िया, बिना नम्बर प्लेट के शहर में सरपट दौड़ लगा रही है. हैरानी की बात है.की कमजोरों पर अपनी ताकत का आजमाइश करने वाली बक्सर पुलिस इन गाड़ियों को देखते ही खुद को किनारे कर लेती है. जिसको लेकर अब बक्सर पुलीस की इकबाल पर लोग सवाल उठा रहे है. अपनी बूढ़ी माँ को लेकर सदर अस्पताल में इलाज कराने जा रहे, सिंहनपुरा गांव निवासी गोपाल कृष्ण ने बताया कि,  बिना हेलमेट के जा रहा था.पुलिस ने रुकवाई,लाख मिन्नत करने के बाद भी चलान काट दी. उसी समय नगर परिषद कार्यालय की कई बड़ी- बड़ी गाड़िया बना नम्बर प्लेट के जा रही थी. उसे किसी ने हाथ देना भी जरूरी नही समझा!क्या? सरकारी कार्यलय की गाड़ियों, एवं आम आदमी की गाड़ियों के लिए, देश में अलग अलग कानून है.या समर्थवान का कोई दोष नही होता!

बिना नम्बर वाली नगर परिषद का हाइवा

बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों का कैसे हो रहा है भुगतान?

 नगर परिषद कार्यालय के अधिकारियों की माने तो शहर के 42 वार्ड की साफ सफाई के लिए, कुल 13 करोड़ 80 लाख  रुपये प्रत्येक साल खर्च किया जाता है. कागजो पर इस शहर की सफा-सफाई में कुल 600 कर्मचारियों के अलावे ,19 टिपर, दो बड़ी हाइवा, 40 ई रिक्सा, 1 ट्रैक्टर,के अलावे, भाड़े की अन्य ट्रैक्टर, जेसीबी, समेत कुल लगभग 5 दर्जन गाड़ियो का इस्तेमाल किया जाता है. जिसमे से मात्र 5 -6 गाड़ियां ही रजिस्टर्ड है. शेष सभी वाहन बिना रजिस्ट्रेशन के ही सरपट दौड़ लगा रही है.ऐसे में सवाल उठना लाजमी है. कि जब गाड़ियों का  रजिस्ट्रेशन ही नही है. तो फिर सरकार के नुमाइंदे इन वाहनों का भुगतान कैसे कर रहे है?

खर्च का कैसे होगा ऑडिट.

अर्थशास्त्र के जानकारों की माने तो, नगर परिषद कार्यालय में एक साजिश के तहत बिना रजिस्ट्रेशन वाली दर्जनों कचड़ा ढोने वाली गाड़ियों को चलाया जा रहा है. जिससे कि खर्च का मन माफिक ऑडिट किया जा सके, और विभाग को चुना लगाया जा सके.इस दौरान कोई घटना और दुर्घटना हो जाये तो, उससे पल्ला झाड़ा जा सके!

क्या कहते है अधिकारी  ?

एक सप्ताह पूर्व ही इस मामले को लेकर जब नगर परिषद के कार्यपालक  पदाधिकारी से बात की गई तो, उंन्होने बताया कि, सम्बंधित पदाधिकारियों से इसका जावाब मांगा गया है. उसके बाद ही सही जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.एक सप्ताह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी. सम्बंधित अधिकारियों ने इसका जवाब नही दिया.

क्या कहते है ट्रैफिक प्रभारी

इस मामले को लेकर जब ट्रैफिक प्रभारी संजय कुमार से बात की गई तो, उन्होंने बताया कि जांच के दौरान जो भी वाहन गलत दिखाई देती है.उसका चलान काटा जाता है.सभी के लिए एक जैसे ही नियम है.

गौरतलाप है कि बिना नंबर प्लेट वाली नगर परिषद में चल रही गाड़ियों को लेकर, उप- चेयरमैन प्रतिनिधि सुनील मिश्रा ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि, यदि इन गाड़ियों से कोई घटना या दुर्घटना हो जाता है तो इसका जिम्मेवार कौन होगा? और जब यह गाड़ियां सड़क पर जा रही है., तो परिवहन विभाग, या ट्रैफिक पुलिस इन वाहनों पर कार्रवाई क्यो नही करती है? जबकि बाइक वालो से थोड़ा गलती हो जाये,तो पुलिस ऐसे व्यवहार करती है.मानो कितना बड़ा वह अपराधी है.

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