विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरी हुंकार ! कहा सनातन संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र है बक्सर फिर भी रहा उपेक्षित !
विश्वमित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह संयोजक राज कुमार चौबे ने भरी हुंकार , कहा सनातन संस्कृति का सबसे बड़ा धरोहर का केंद्र है बक्सर. उसके बाद भी रहा उपेक्षित! बाढ़ की विपदा में बक्सर वासियों को छोड़कर, कहा गायब है सांसद और विधायक ! भोट के लिए नही बक्सर के विकास के लिए विश्वमित्र सेना के मुहिम का बने हिस्सा !
राजकुमार चौबे विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्षबक्सर- उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा यह बक्सर शहर, अपने धार्मिक, और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है.उसके बाद भी धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस शहर को वह पहचान नही मिल पाई जिसका वह हकदार है. राजनेताओं में दृढ़ इक्षा शक्ति की कमी,एवं जिला प्रशासन के अधिकारियो की उदासीनता के कारण गौरवशाली बक्सर, विकास के रफ्तार में अपने सीमावर्ती जिलों से भी काफी पीछे रह गया है. इस जिले की पहचान को वापस लाने के लिए, विश्वमित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने मुहिम तेज कर दी है. इस दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, बक्सर में सनातन संस्कृति का विकास होगा. तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.और जब बाहर से पर्यटक आएंगे तो, सुविधाएं बढ़ेगी और लोगो को रोजगार मिलेंगा.
रामरेखा घाट की तस्वीर
अपनी जेब भरने के लिए नेताओ ने समृद्ध बक्सर को कर दिया कंगाल
नवम्बर 2022 में भारत सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, के द्वारा माता अहिल्या के उद्धार स्थली अहिरौली में, सनातन सांस्कृतिक समागम का आयोजन कराया गया.उस दौरान देश की कई बड़ी हस्तियों ने इस समागम में शिरकत की.सनातन के नाम पर करोड़ो रूपये पानी की तरह बहाया गया.मंत्री ने मंच से बक्सर को लेकर कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं की, तीन साल का समय गुजर गया.लेकिन एक भी घोषणा पूरा नहीं हुआ. और मंत्री के तमाम घोषणा जुमला बनकर रह गया.
1008 फ़ीट का लगनी थी भगवान राम की प्रतिमा !
भगवान राम का चरण पादुका
तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ने अहहिल्या के उद्धार स्थली अहिरौली में खुले मंच से यह घोषणा किया था कि , विश्व की सबसे ऊंची भगवान राम की प्रतिमा विश्वमित्र की पावन नगरी में लगेगी. जिसकी ऊंचाई 1008 फ़ीट होगी. .राम के इस कर्म भूमि को रमायण सर्किट से जोड़ने, एवं रामरेखा घाट पर आधुनिक लेजर शो की शुरुवात करने को लेकर कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गई लेकिन, सभी घोषणाएं केवल जुमला साबित हुआ.और एक भी काम धरातल पर नही उतरा.
विश्वमित्र सेना ने शुरू की अभियान !
धार्मिक, एवं पर्यटन की दृष्टिकोण से विकास के तेज रफ्तार में सबसे निचले पायदान पर खड़े इस बक्सर को, शीर्ष पर ले जाने के लिए, विश्वमित्र सेना ने पूरे देश भर में मुहिम छेड़ दी है. इस मुहिम के जनक राजकुमार चौबे, ने मीडिया से वार्ता के दौरान, बताया कि, बक्सर हमारा सबसे समृद्ध जिला था.लेकिन इस जिले के गौरव को यंहा के राजनेताओं, एवं प्रशानिक अधिकारियों ने अपने महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए, इसकी बलि चढ़ा दी. उतर प्रदेश से सटे इस जिले में एक एयरपोर्ट बहुत पहले बन जाना चाहिए था. लेकिन ढंग का एक बस अड्डा तक नही है. केवल बक्सर के लोगो को विकास का दिवा स्वप्न दिखाकर उन्हें समय -समय पर लुटा गया.
बक्सर बनेगा बिहार का धार्मिक नगरी !
वही उंन्होने कहा कि, स्थानीय लोगो की सहयोग से, उत्तरायणी गंगा की तट पर बसा मिनी काशी के नाम से मसहूर इस बक्सर शहर का विकास, जब तक अयोध्या, औऱ मिथिला की तर्ज पर नही हो जाता है. मैं चैन से बैठने वाला नही हूँ. हमारी पूरी जीवन इस बक्सर को समर्पित है.और बक्सर में सनातन की खोई हुई पहचान को वापस लाना ही जीवन का मकसद है.
गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने, विकास की मुद्दा को छेड़कर, राजनीतिक दल के नेताओ की चिंता बढ़ा दी है. बाढ़ की आपदा से जूझ रहे बक्सर वासियों के मदद के लिए, उंन्होने अपने निजी खजाने का मुंह खोलकर वर्तमान जनप्रतिनिधियों के मुंह पर ताला जड़ दी है. बाढ़ का दंस झेल रहे लोगो ने कहा. बक्सर को विपदा में छोड़कर ,मौज मस्ती करने गए है यंहा के सांसद और विधायक, भोट के समय देंगे अपने क्षेत्र में दर्शन



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