चुनावी साल में भ्रष्टाचारियों के बारात का दूल्हा कौन ??? 12 करोड़ 16 लाख की योजना में ईंट तक है फर्जी!
चुनावी साल में भ्रष्टाचारियों के बारात का दूल्हा कौन ??? 12 करोड़ 16 लाख की योजना में ईंट तक है फर्जी! भराठ लाल ईंट, जंग लगी सरिया से बन रही है सरकारी इमारत की रेत की दीवार! स्थानीय लोगो ने उठाया सवाल क्या ? चुनावी साल में मिशन कमीशन के लिए अधिकारियों ने मुंह पर लगा रखी है ताला!
कैसे मिल गई लूट की खुली छूट
बक्सर - ये बिहार का बक्सर जिला है साहब ! यंहा सुदूर ग्रामीण इलाकों में नही जिला प्रशासन के अधिकारियों के नाक के नीचे जिला मुख्यालय में लूट की खुली छूट दी गई है! जिसको लेकर अब आम लोग सहजता से जिला प्रशासन के अधिकारियों से यह सवाल पूछना शुरू कर दिया है. की इस भ्रष्टाचार की बारात का दूल्हा कौन है? चुनावी साल में जिस योजना का शिलान्यास 15 फरवरी 2025 को खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बक्सर पहुँचकर की हो, उस योजना में किसके सह पर, सारे नियम को ताक पर रखकर इतना घटिया निर्माण कार्य कराया जा रहा है. 12 करोड़ 16 लाख की लागत से बनने वाले एक्सपीरियंस सेंटर रेस्टोरेंट का निर्माण कार्य में लूट की खुली छूट ठेकेदार को किसने दे दी है साहब ?
सरकारी इमारतों में नही करनी है लाल ईट का प्रयोग !
कार्य स्थल पर काम करते कर्मीसरकारी विभाग के इंजीनियरों की माने तो नियमों के अनुसार सरकारी भवनों में एक भी लाल ईंट का प्रयोग प्रतिबंधित है, केवल फ्लाई एस ईट का ही इस्तेमाल करना है. वह भी सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली! लेकिन इस भवन के निर्माण में जिस स्तर के ईट का उपयोग हो रहा है. उससे रेत की दीवाल ही बनेगी! बिहार में इतना पुल -पुलिया गिर रहा है. उसके बाद भी सभी लोग चुप्पी साधे हुए है.जिसका अर्थ तो सभी लोग समझ रहे है.
दो मीटर ऊंचाई से गिराने के बाद भी नही टूटेगा अच्छी गुणवत्ता वाली ईंट
लाल ईंट उद्योग में लगे लोगो की दावा है कि अच्छी गुणवत्ता वाली ईंट को दो मीटर की ऊंचाई से भी गिराने पर वह नही टूटेगा. लेकिन निर्माण स्थल पर जो ईंट का प्रयोग हो रहा है.उसका इस्तेमाल सड़क पर बने गढ़े को भरने में ही किया जाता है.जो लोग जैसा ऑर्डर देते हुए वैसा ईंट उनके यंहा भेज दिया जाता है.
निर्माण स्थल पर रखे गए फ्लाई एस ईंट
निम्न स्तर का है फ्लाई एस ईंट!
निर्माण स्थल पर रखे गए फ्लाई ऐश ईंट भी दो नंबर का है! जिसे किनारे रखकर उसके आड़ में लाल ईंट का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिसका तस्वीर कैमरे में कैद होने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों से लेकर काम करवाने वाले इंजीनियरों ने भी चुप्पी साध ली है!
राजधानी पटना में है इंजीनियर साहब !
पर्यटन कार्यालय से उपलब्ध कराए गए एक्सक्यूटिव इंजीनियर एवं जूनियर इंजीनियर के मोबाइल नम्बर पर इस मामले को लेकर जब बात की गई तो दोनों साहब ने बताया कि वह पटना में है. दो दिन बाद बक्सर आने के बाद ही जानकारी उपलब्ध करा पाएंगे ! जबकि तीन दिन बाद भी कोई जानकारी नही दी गई! वही पर्यटन विभाग के अधिकारी की माने तो इस योजना में उनके पास ना तो प्रशासनिक पावर है. और न ही वितीय पावर सीधे सीएम सचिवालय से ही सब कुछ हो रहा है.
सूचना जन सम्पर्क अधिकारी ने भी नही उपलब्ध कराई जानकारी !
सरकारी योजना में हो रहे इस लूट को लेकर तीन दिन से समय लेने के बाद भी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी जानकारी उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे.पहले तो उन्होंने पर्यटन विभाग के प्रभारी अधिकारी के पास भेज दी, पुनः जिलाधीकारी से बात करके सूचना उपलब्ध कराने की बात कहकर पूरे मामले पर तीन दिन बाद भी जानकारी उपलब्ध नही कराई ! जिसके बाद जब जिलाधीकारी से फोन पर बात की गई तो उन्होंने वीसी में होने की बात कही जिसके कारण प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष नही मिल पाया!
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर स्थानीय लोगो से जब बात की गई तो लोगो ने बताया कि, चुनावी वर्ष होने की वजह से कमीशनखोरी का खेल और तेज हो गया है. ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं और अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं. सवाल उठता है कि क्या अफसरशाही और ठेकेदारों के बीच सांठगांठ ने इस परियोजना को लूट का अड्डा बना दिया है?




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