हद हो गई शाहब ! वीके ग्लोबल अस्पताल में मरीज के परिजनों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद भी पंगु है जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य महकमे का अधिकारी !
हद हो गई साहब ! वीके ग्लोबल अस्पताल में इलाज कराने पहुँचे परिजनो के साथ मारपीट करने का वीडियो सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य महकमे का जिले के सबसे बड़े अधिकारी सीएस ने कहा कार्रवाई करने के अधिकार क्षेत्र से बाहर है निजी अस्पताल ! पावर बराबर शून्य
एक झलक वेडियो से ली गई स्क्रीन शॉट
बक्सर. जिले के नगर थाना क्षेत्र के सिंडिकेट गोलंबर पर स्थित वीके ग्लोबल अस्पताल में गर्भवती महिला का इलाज कराने पहुँचे परिजनों के साथ मारपीट की गई है. परिजनों की माने तो 6 महीने की गर्भवती महिला को परेशानी होने के बाद , उसे इलाज कराने के लिए वीके ग्लोबल अस्पताल में ले गए थे. जंहा घड़ी की सेंकेड की सुई से भी अधिक रफ्तार से बढ़ रहे हॉस्पिटल का बिल को देख परिजन चक्राने लगे. और कुछ ही घण्टे में 65- 70 हजार का बिल थमा दी.परिजन जब अपने मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए दबाओ बना रहे थे.इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई जिसका एक वीडियो भी सामने आया है.परिजनों के द्वारा लगाए गए आरोप को लेकर जब पत्रकारों ने डॉक्टर वीके सिंह से बात की, तो उन्होंने परिजनों पर अस्पताल में हंगामा करने का आरोप लगाते हुए, अस्पताल को बेदाग बताया. हालांकि जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें एक महिला यह कहते नजर आ रही है . की महिला का जान लेब लोग का. यह पूरा मामला शनिवार के दिन की है.
आरोप कमरे में बंद कर लाठियों से पीटा !
मिली जानकारी के अनुसार ,बेलाउर गांव निवासी नागेंद्र तिवारी अपनी छह माह की गर्भवती पत्नी को लेकर वीके ग्लोबल अस्पताल पहुंचे थे. परिजनों का आरोप है कि भर्ती होते ही उनसे दवाइयों और जांच के नाम पर मनमाने ढंग से पैसे मांगे जाने लगे. जब उन्होंने आपत्ति जताई तो अस्पताल कर्मियों और प्रबंधन से जुड़े लोगों ने न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया बल्कि मारपीट तक कर दी. परिजनों का कहना है कि उन्हें कमरे में बंद कर लाठियों से पीटा गया. किसी तरह जान बचाकर वे गर्भवती महिला को बीएचयू ले गए, जहां बच्चे की मौत हो गई.
मानवता पर भारी पड़ा अर्थतन्त्र !
पीड़ित परिजनों की माने तो आर्थिक दोहन, और इलाज में लापरवाही ही इस दुखद घटना का कारण बनी है. पैसे देने के बावजूद गर्भवती महिला को सही उपचार नहीं मिला और आखिरकार बच्चे की जान चली गई.
अस्पताल के डायरेक्टर ने कहा अस्पताल है बेदाग !
वही इस प्रकरण को लेकर, अस्पताल प्रबंधन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. अस्पताल के निदेशक डॉक्टर वीके सिंह ने कहा कि मरीज पक्ष का आरोप निराधार है. उल्टे परिजनों ने ही अस्पताल कर्मियों और महिला चिकित्सक के साथ दुर्व्यवहार किया. गार्ड और चिकित्सा कर्मियों का कहना है कि मरीज के परिजन आईसीयू तक में घुस गए और धक्का-मुक्की करने लगे.
बिहार के सरकारी स्वास्थ्य महकमा को नेताओ ने बनाया पंगु !
निजी अस्पताल में इलाज के लिए पहुँची महिला मरीज के परिजनों के साथ हुई इस मारपीट की घटना का वीडियो सामने आने के बाद, जिले का सिविलसर्जन इस पूरे मामले में खुद को पंगु बताते हुए कहा. की निजी अस्पताल चाहे कुछ भी कर ले! सिविल सर्जन के पास कार्रवाई करने का कोई पावर नही है. चाहे परिजन लिखित शिकायत कर ले या मौखिक ! हम जांच तो करेंगे लेकिन कार्रवाई नही !
दो साल पहले भी इस अस्पताल ने ग्यारह हजार रुपये के लिए शव को बनाया था बंधक
दो साल पहले भी इलाज के दौरान इस अस्पताल में एक व्यक्ति की मौत होने के बाद ग्यारह हजार रुपये के लिए शव को ही बंधक बना लिया गया था. शांतिनगर के लोगो ने जब स्थानीय लोगो के साथ मिलकर नेशनल हाइवे को जाम कर दिया.तो तत्कालीन नगर थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने अस्पताल से शव की निकलवाकर आक्रोशित लोगों की मदद की थी.
गौरतलब है कि सिविल सर्जन के इस बयान के बाद लोगो की गुस्सा सातवें आसमान पर पर. स्थानीय लोगो की माने तो,सत्ता में बैठे राजनेताओं ने अपनी आमदनी और कमीशन बढ़ाने के लिए निजी अस्पताल को मनमानी करने की खुली छूट दे रखी है.यही हालत रहा तो वह दिन दूर नही जब जिला प्रशासन के अधिकारी तमाशबीन बने रहेंगे और लोग क्रांति कर नए इत्तिहास लिख देंगे



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