टूटी सड़के, बीमार सरकारी अस्पताल और खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ रहे सरकारी स्कूल के बच्चे दिखा रहे है राजनेताओं को विकसित बक्सर की असली तस्वीर !

 जनप्रतिनिधियों पर विश्वामित्र सेना प्रमुख का हमला – आज़ादी के 79 साल बाद भी बक्सर बदहाल" कौन है इस बदहाली का जिम्मेवार !

विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष

बक्सर-विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज कुमार चौबे ने जिले की बदहाली को लेकर जनप्रतिनिधियों पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक बक्सर ने दर्जनों सांसद और विधायक दिए, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं. नेताओं ने राम के नाम पर राजनीति की, सत्ता सुख भोगा, लेकिन बक्सर को विकास के रास्ते पर ले जाने में विफल रहे. चौबे ने तंज कसते हुए कहा कि हाल यह है कि सेंट्रल जेल की चारदीवारी से भगवान वामन तक को बाहर निकालने की हिम्मत नेताओं में नहीं दिखी और वही नेता चुनाव के अंतिम सप्ताह में आज विकसित बक्सर बनाने का दावा कर रहे हैं.जिस बक्सर के गौरवशाली धर्मिकि इतिहास की चर्चा धर्म गर्न्थो में है.यह वह आध्यात्म की नगरी है. जंहा भगवान राम ने शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा ली .जिसके चर्चा के बिना रमायण जैसे मकाव्य नही लिखा पाता उस बक्सर का उपेक्षा सनातन की उपेक्षा है. बक्सर की उपेक्षा है.

किसानों की बदहाली पर सवाल !

अपने खेत में काम करते किसान

राज कुमार चौबे ने किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जिले में सरकार की सूची में दर्ज 2 लाख 22 हजार किसान हैं. ये किसान धान, गेहूं, मक्का, चना और सब्जी की खेती लगभग 1 लाख 7 हजार हेक्टेयर जमीन पर करते हैं. लेकिन विडंबना यह है कि आज़ादी के 79 साल बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी कृषि मंडी नहीं बन सकी. उन्होंने कहा – "यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि दूसरे की भूख मिटाने वाले किसान खुद अपनी उपज बेचने के लिए मंडी तक के मोहताज हैं. मजबूरी में उन्हें औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ती है और कई तो रोज़गार की तलाश में महानगरों की ओर पलायन कर जाते हैं." आखिर सियासत के केंद्र बिंदु में रखकर जिस किसानों के नाम पर पूरे देश में सभी पार्टियां सियासत करती है. वही किसान आज कर्ज के बोझ में क्यो दबा हुआ है?

पर्यटन की अनदेखी से बक्सर बना बदहाल !

रामरेखा घाट की तस्वीर

विश्वामित्र सेना प्रमुख ने बक्सर की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिले का सबसे मजबूत पक्ष पर्यटन है, लेकिन इस पर किसी भी जनप्रतिनिधि ने गंभीरता से काम नहीं किया. गंगा घाट, ऐतिहासिक स्थल, धार्मिक महत्व वाले मंदिर – ये सभी बक्सर को पर्यटन नगरी बना सकते हैं, लेकिन नेताओं की बेरुखी ने इस संभावना को भी दम तोड़ने पर मजबूर कर दिया.बिहार के पूर्वांचल में एयरपोर्ट की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है, लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बक्सर में अब तक हवाई अड्डे का निर्माण नहीं हुआ. चौबे ने सवाल उठाया – "बक्सर को पर्यटन नगरी बनाने से आखिर किसको तकलीफ है? क्या वजह है कि यहां एयरपोर्ट तक नहीं बन पाया, जबकि यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है."

"चुनाव लड़ने नहीं, बक्सर को विकसित बक्सर बनाने आया हूं"।

राज कुमार चौबे ने स्पष्ट किया कि वह चुनाव लड़ने या किसी को लड़ाने के लिए राजनीति में नहीं आए हैं. उनका मकसद केवल बक्सर को विकसित बक्सर बनाना है. उन्होंने कहा कि अगर यहां रोजगार के साधन और उद्योग स्थापित हों तो बक्सरवासी अपने ही जिले में सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे. उन्होंने भ्रष्टाचार पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि जिले में "भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है।"

नेताओं पर सीधा वार !

वही उन्होंने कहा कि आज जिले की सड़कें टूटी हुई हैं, किसान बेहाल हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है. बावजूद इसके जनप्रतिनिधि केवल सत्ता सुख भोगने में लगे हैं. उन्होंने सवाल किया कि आज़ादी से लेकर अब तक बक्सर की असल तस्वीर क्यों नहीं बदली? क्या नेताओं का काम सिर्फ वादों तक सीमित रहना है?

गौरतलब है कि राज कुमार चौबे का बयान जिले के लोगों की उस पीड़ा को सामने लाता है, जिसे वे दशकों से झेलते आ रहे हैं. भले ही चुनावी मंचों पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन सच्चाई यही है कि किसान से लेकर नौजवान तक बक्सर की स्थिति को लेकर निराश है. रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की घोर कमी आज भी जिले की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है.

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