राजपुर में चुनावी सिंबल लेकर आ रहे है पूर्व मंत्री संतोष निराला ! जनता की आशीर्वाद से जीत की पटकथा लिखने की है पूरी तैयारी 10 से 17 अक्टूबर के बीच शुभ मुहूर्त में राजपुर के मतदाता मालिको की उपस्थिति में करेंगे नामांकन !
राजपुर में सिंबल लेकर लौट रहे हैं संतोष निराला ! पटना में सिंबल ग्रहण, राजपुर में नामांकन की तैयारी ! 10 से 17 अक्टूबर के बीच होगा नामांकन. पूर्व मंत्री संतोष कुमार निराला के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही मांगा था जनता से आशीर्वाद ! पिछली हार से सबक, इस बार जीत की नई पटकथा लिखने की है पूरी तैयारी !
सिंबल लेकर राजपुर में लौट रहे है संतोष निरालाबक्सर- बिहार की सियासत में एक बार फिर पुराने खिलाड़ी पूरे दमखम के साथ सियासी मैदान में उतरने को तैयार हैं ! जिले की 202 राजपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री संतोष कुमार निराला बुधवार को पटना स्थित एनडीए कार्यालय से औपचारिक रूप से गठबंधन का सिंबल ग्रहण करने पहुँचे है. इस दौरान संतोष निराला ने कहा कि “राजपुर की भगवान रूपी जनता के आशीर्वाद से ही नामांकन की तिथि तय की जाएगी, जो 10 से 17 अक्टूबर के बीच होगी !”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे पहले की थी संतोष निराला के नाम का एलान !
इसी मंच से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था एलान2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान राजपुर विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री संतोष कुमार निराला को जदयू का प्रत्याशी घोषित कर सियासी तापमान को बढ़ा दिया था. संतोष निराला बिहार के ऐसा पहला प्रत्याशी बने जिन्हें गठबंधन में सीट बंटवारे से पहले ही नीतीश कुमार ने प्रत्याशी घोषित कर दिया था. और उनके लिए जनता से आशीर्वाद भी मांगे . जिससे यह साफ हो गया कि एनडीए ने इस सीट पर अपना दांव फिर से पुराने और आजमाए हुए खिलाड़ी पर ही लगाकर एक संदेश देने का प्रयास किया है.
एनडीए में सीट शेयरिंग का सम्भावित फार्मूला पर मंथन जारी !
एनडीए में सीट शेयरिंग के संभावित फार्मूला के अनुसार जदयू 103, बीजेपी 102 , लोजपा रामबिलास 25, हम 8 , आरएलएम के 5 सीट पर चुनाव लड़ने का मंथन जारी है. हालांकि यह फार्मूला सम्भावित है.
राजपुर का चढ़ा सियासी तापमान !
संतोष निराला का नाम सामने आते ही राजपुर विधानसभा का राजनीतिक पारा अचानक बढ़ गया है. पिछली बार 2020 के चुनाव में निराला को कांग्रेस के विश्वनाथ राम ने हराया था, लेकिन इस बार परिस्थितियाँ और समीकरण दोनों बदले हुए नजर आ रहे है ! राजपुर में एनडीए गठबंधन के पास अब जातीय आधार + प्रशासनिक अनुभव + चेहरे की पहचान तीनों का संतुलित फार्मूला है!
जनता के बीच “पुनर्वापसी की अपील”
राजपुर में निराला की वापसी को “पुनर्वापसी अभियान” के रूप में देखा जा रहा है. एनडीए की रणनीति साफ है ! पुराने भरोसेमंद नेता को जनता के बीच फिर से पेश किया जाए, ताकि वोटर को ‘स्थिरता’ और ‘पहचान’ दोनों का भरोसा मिले.निराला के समर्थक इसे “जनता से सीधा संवाद” का प्रतीक बता रहे हैं. पार्टी स्तर पर उनका नामांकन कार्यक्रम को अद्भुत बनाने के लिए जनसभा, रोड शो और आशीर्वाद यात्रा की रूप में रूपरेखा तैयार की जा रही है!
राजपुर का समीकरण और स्टंट पॉलिटिक्स !
राजपुर की सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील और सामाजिक समीकरणों के कारण अहम रही है! यह आरक्षित सीट होने के बावजूद, इसके रुझान अक्सर पूरे बक्सर जिले के राजनीतिक मूड को दर्शाते हैं! संतोष निराला के लिए यह चुनाव मात्र एक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि छवि सुधार अभियान भी है! 2015 से 2020 के बीच बतौर मंत्री उनके ऊपर “विकास ठहरने” और “जनसंपर्क कमजोर होने” के आरोप लगे थे. अब वे इसी छवि को बदलने के लिए भावनात्मक अपील कर रहे हैं !
“मैं राजपुर के हर उस घर का बेटा हूँ, जहाँ से कभी मुझे मंत्री बनने का आशीर्वाद मिला था. अब वही आशीर्वाद पुनः मांगने आया हूँ!”
एनडीए की रणनीति और विपक्ष की चुनौती
राजपुर सीट पर इस बार मुकाबला सीधा एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच तय माना जा रहा है. एनडीए के नेता जहां निराला के अनुभव और संगठन पर भरोसा कर रहे हैं, वहीं विपक्ष समाजिक न्याय और रोजगार जैसे मुद्दों को उछालने की तैयारी में है.एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस सीट पर प्रचार में उतर सकते हैं! क्योंकि वे पहले ही राजपुर के लोगों से आशीर्वाद की अपील कर चुके हैं.वही कांग्रेस के विधायक विश्वनाथ राम भी पहले ही अपने पांच बर्षो का रिपोर्ट कार्ड जारी कर चुनावी वादों से ज्यादा काम करने का दावा कर रहे है. लेकिन क्षेत्र की जनता कि चुप्पी ने राजनेताओं की बेचैनी को बढ़ा दिया है.
क्या कहते है चुनावी पंडित?
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता का बदला हुआ तेवर को देख राजनीति के जानकर भी हैरान है ! सोशल मीडिया में वर्तमान विधायक के प्रति लोगो की नराजगी ! एवं पूर्व मंत्री संतोष निराला के व्यवहार में सरलता ने इस लड़ाई को और दिलचस्प बना दिया है.
गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की रणभूमि सज चुकी है राजपुर का रण अब सिर्फ चुनाव नहीं, भावनाओं और विश्वास की परीक्षा भी बन चुका है. संतोष निराला अपने अनुभव, संगठन और मुख्यमंत्री के समर्थन के बल पर जनता का दिल जीतने की तैयारी में हैं. वही कांग्रेस विधायक विश्वनाथ राम को अपने नेता राहुल गांधी! पर भरोसा है.



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