लापरवाह सिष्टम के बेपरवाह अधिकारी ! 20 दिनों से सड़कों पर बह रहा है पीएचडी के नल- जल का पानी.
लापरवाह सिष्टम के बेपरवाह अधिकारी ! 20 दिनों से सड़कों पर बह रहा है पीएचडी के नल- जल का पानी. ग्रामीणों ने कहा जिले में चल रहा है साहब की मनमानी!
बक्सर-जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत जगदीशपुर पँचायत के वार्ड नम्बर 10 में, पिछले एक महीने से पीएचडी डिपार्टमेंट के द्वारा लगाए गए हर घर नल का जल लोगो के कंठ का प्यास बुझाने के बजाए, सड़को पर होली खेल रहा है. ग्रामीणों के द्वारा अब तक 43 बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी, न तो साहब की निंद्रा टूटी. और न ही आमलोगों की तकलीफों को दूर करने का कोई उपाय किया गया. यही कारण है कि लोग लापरवाह सिष्टम के बेपरवाह अधिकारियो के खिलाफ, अब सड़क जाम करने का ठान लिए है. ग्रामीणों की माने तो इस जिले में बिना सड़क पर उतरे मृत्यु का मुआवजा तक नही मिलता है. तो पानी कैसे मिलेगा.
क्या कहते है ग्रामीण ?
कुल्हड़िया गांव निवासी व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता, सह राजद नेता, अयोध्या यादव उर्फ गुड्डू यादव ने बताया कि, कुल्हड़िया गांव में 400 से अधिक हाउस होल्डर है. जो सभी किसान या मजदूर बर्ग से आते है. मार्च महीने से ही 90 प्रतिशत घरों के चप्पा कल फेल कर गया है. बून्द - बून्द पानी के लिए ग्रामीण तरस रहे है. वार्ड नम्बर 10 में पीएचडी के द्वारा लगाए गए हर घर नल का जल लोगो का प्यास बुझाने के बजाए, सड़को का प्यास बुझा रहा है. ऐसा लगता इस जिले का कोई माई बाप ही नही है. नौकरशाह खुद को मालिक समझने लगे है. ऐसे अधिकारियों का नींद तोड़वाना भी किसान जानते है. नेशनल हाइवे को जाम करने के बाद ही पीएचडी डिपार्टमेंट अब इस नल जल के पाइप को ठीक कराएगा. अब तक लोगो ने किसानों का धैर्य देखा है. अब उनके फौलादी हौसले को भी देखेगा.
वार्ड नम्बर 10 के रहने वाली सीता देवी ने बताया कि, एक महीने से बीच सड़क पर पाइप टूटकर पानी बह रहा है. कई बार ऑन लाइन मेल की, व्हाट्सप पर फोटो भेजी लेकिन, कुछ नही हुआ. अब राहगीर उसी पानी मे खड़े होकर पैर और साइकल धो रहे है. अप्रैल महीने में जिलाधीकारी ने टोल फ्री नम्बर जारी कर, सभी खराब पड़े नल- जल से लेकर चप्पा कल को ठीक करने का आदेश दिया था. लेकिन यह पहला जिला है. जंहा के विभागीय अधिकारी खुद को, जिलाधीकारी से बड़ा समझते है. लोकतंत्र में आंदोलन जनता का अधिकार है. और आज की महिलाएं अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना जानती है.
गौरतलब है की पूरे जिले की यही हालात है. ग्रामीण इलाके के लोगो की माने, तो इस जिले का कोई माई बाप नही है.एक छोटे से काम के लिए दौड़ते दौड़ते चप्पल का फीता टूट जाता है.लेकिन अधिकारियों के कान पर जू।नही रेंगता
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