ओम जी यादव अब राजनीति के मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इंडिया और एनडीए के धुरंधरों को चुनौती दे रहे है. जिस
निर्दलीय उम्मीदवारी से बदलेंगे बक्सर का चुनावी समीकरण! समाज सेवा से राजनीति में कदम रखने वाले ओमजी यादव कुर्सी के लिए नही गरीबो के आवाज बनने के लिए लड़ रहे है चुनाव ! धनबल और वंशवाद के धुरंधरों का भी छूटने लगा है पसीने !
दलित बस्ती में असहस्यो की समस्या सुनते ओम जी यादव !बक्सर- बिहार की सियासत में जहां वंशवाद और धनबल की चर्चा आम है, वहीं बक्सर विधानसभा क्षेत्र में इस बार एक अलग तरह का चेहरा चर्चा में है जिनका नाम है ओम जी यादव, जो किसी राजनीतिक परिवार से नहीं बल्कि जनता के बीच अपनी सेवा भावना के लिए पहचाने जाते हैं. वर्षों तक बक्सर रेलवे स्टेशन के आसपास गरीबों और असहायों को भोजन कराने वाले ओम जी यादव अब राजनीति के मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इंडिया और एनडीए के धुरंधरों को चुनौती दे रहे है. जिससे पूरा राजनीतिक समीकरण बदला सा गया है. एक साधारण परिवार से आने वाला यह नौजवान गरीबो को भोजन कराने के लिए रोटी बैंक के नाम से सैकड़ो लोगो को प्रत्येक दिन भोजन कराने से लेकर ,उनके जरूरतों में खड़ा होने का साहस रखता है.
महलों से नही झुग्गी झोपड़ी से शुरू किया चुनावी महाभियान !
नामांकन दाखिल करने के बाद से ही ओम जी यादव लगातार बक्सर की गलियों और बस्तियों का दौरा कर रहे हैं. वे किसी बड़े मंच या तामझाम के बिना सीधे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं. एवं उसका निदान करने का प्रयास करते दिखाई दे रहे है. ओम जी यादव का कहना है की “यह चुनाव किसी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज़ उठाने के लिए है, जिन्हें अब तक राजनेताओ ने भुला दिया है.”
समाज सेवा से राजनीति में रखा कदम
बर्षो से करते आ रहे है गरीबो का सेवा !
ओम जी यादव की छवि एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता की रही है, जिसने सेवा को ही साधना बनाया. रेलवे स्टेशन पर हर दिन गरीबों को भोजन कराना, बुजुर्गों की मदद करना और युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी के लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है. यही सादगी और सेवाभाव अब उनके राजनीतिक अभियान की सबसे बड़ी ताकत बन गई है.बक्सर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरना आसान नहीं होता, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यादव की सच्चाई और जनसेवा की छवि उन्हें दूसरों से अलग बनाती है. कई स्थानीय मतदाता मानते हैं कि ओम जी यादव राजनीति में उन मूल्यों को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अब धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं . ईमानदारी, संवेदनशीलता और जनता के प्रति जवाबदेही के साथ वह चुनावी मैदान में है.
क्या कहते है राजनीतिक समीक्षक ?
राजनीतिक समीक्षक भी मानते हैं कि ओम जी यादव का चुनावी मैदान में उतरना पारंपरिक समीकरणों को बदल सकता है. भाजपा, राजद, कांग्रेस, जनसुराज और जदयू जैसे दलों के बीच जहां टिकट को लेकर गहमागहमी है, वहीं यादव की निर्दलीय एंट्री आम मतदाताओं के मन में एक नई उम्मीद जगा रही है. उनका प्रचार अभियान महंगे पोस्टरों और जुलूसों से अलग हटकर संवाद और विश्वास पर आधारित है.
क्या कहते है निर्दलीय प्रत्याशी?
“जनता के बीच से जनता का प्रतिनिधि”यह ओम जी यादव का मूल मंत्र है. उनका कहना है कि राजनीति तभी सार्थक होगी जब आम आदमी खुद अपनी लड़ाई लड़ने के लिए आगे आएगा हालांकि, चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं. संगठन, संसाधन और चुनावी रणनीति के मामले में निर्दलीय उम्मीदवार अक्सर पिछड़ जाते हैं. लेकिन बक्सर की गलियों में यह चर्चा सरेआम है कि यदि जनता ने ओम जी यादव जैसे उम्मीदवार को मौका दिया, तो यह बक्सर की राजनीति में सेवा और सादगी का नया अध्याय लिख सकता है!
गौरतलब है कि चुनाव में जहां अधिकांश उम्मीदवार सत्ता की सीढ़ी तलाश रहे हैं, वहीं ओम जी यादव सेवा को ही अपना लक्ष्य मानकर मैदान में हैं और उनका यही सोच उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग बनाता है.



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