दलसागर खेल मैदान से विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरी हुंकार ! सियासी गलियारे में हलचल हुई तेज कहा बक्सर में नेताओ ने खुद का या बक्सर वासियों का किया है विकास !
दलसागर खेल मैदान से विश्वामित्र सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष राज कुमार चौबे ने भरी हुंकार !बक्सर के हक़ की लड़ाई हुई तेज़, पर्यटन व कृषि विकास पर सरकार से सवालों की कर दी बौछार !
विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्षबक्सर- जिले के औधोगिक थाना क्षेत्र अंतर्गत दलसागर खेल मैदान रविवार को सियासी रंग में रंगा नजर आया, जब विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने जनसभा से बक्सर के हक़ में जोरदार हुंकार भरी. उनकी इस गर्जना से न सिर्फ मैदान गूंज उठा बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई. इस दौरान उन्होंने कहा कि “कृषि बहुलता वाले इस जिले में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक भी कृषि मंडी नहीं है, और इन्हीं किसानों के नाम पर आजादी से लेकर अब तक केवल सियासत होती रही है.”
सनातन की सबसे पवित्र भूमि है हमारा बक्सर !
खेल मैदान में लोगो का जन सैलाबवही उंन्होने कहा कि बक्सर की धरती केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सनातन की सबसे पवित्र भूमि है. यह वही स्थान है जहाँ भगवान वामन ने अवतार लिया था और बालक राम को पराक्रमी राम बनाने का संस्कार इसी भूमि पर मिला. लेकिन अफसोस की बात है कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इतनी समृद्ध भूमि को अब तक विकास की मुख्यधारा से जोड़ा नहीं गया. केवल चुनाव जीतने के लिए आश्वासन मिली!
आदर्श आचार संहिता से पहले बक्सर को मिले सौगात !
विश्वामित्र सेना प्रमुख ने सरकार से मांग की कि आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले बक्सर को “विश्वामित्र कॉरिडोर” के रूप में घोषित किया जाए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अयोध्या, जनकपुर, काशी और मथुरा में करोड़ों रुपए खर्च कर भव्य मंदिर बनाए जा सकते हैं, तो विश्वामित्र की तपोभूमि बक्सर को पर्यटन के क्षेत्र में क्यों नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.उन्होंने कहा कि “यह वही भूमि है जहां त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने ताड़का राक्षसी का वध किया था. जंहा वेद और गायत्रीमंत्र की रचना हुई थी.जिस भूमि पर बने च्यवनप्राश की गुण को जानकर आज कम्पनियां अरब पति बन गई.जंहा आज भी अगहन माह में पंचकोशी परिक्रमा यात्रा के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. लेकिन दुर्भाग्य देखिए, जिस मार्ग से होकर श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा करते हैं, वहां सड़क तक की हालत बदहाल है. ऐसे में सवाल उठता है कि विकास आखिर किसका हुआ — बक्सर का या नेताओं का?”
सरकार के दोहरे रवैया पर प्रहार !
खेल मैदान में बने मंच से चौबे ने सरकार के दोहरे रवैये पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि नेताओं ने हर चुनाव में बक्सर की जनता को केवल वादों से छलने का काम किया है. न तो किसानों को उचित मूल्य मिला, न युवाओं को रोज़गार और न ही धार्मिक धरोहरों को उनका हक़. उन्होंने कहा कि बक्सर की सांस्कृतिक पहचान को अगर “विकास के मॉडल” से नहीं जोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी.
भीड़ की जयघोष से उड़े नेताओ का होश !
सभा के दौरान हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने “जय विश्वामित्र”, “जय बक्सर” और “बक्सर का हक़ दो” के नारों से माहौल को जोशीला बना दिया. वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है जब बक्सर अपने हक़ की लड़ाई खुद लड़ेगा। राज कुमार चौबे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “अगर सरकार ने बक्सर की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले चुनाव में जनता जवाब देगी।.” बक्सर को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए “विश्वामित्र कॉरिडोर” योजना शुरू की जाए, जिसमें पंचकोशी यात्रा मार्ग का विकास, ताड़का वध स्थल का सौंदर्यीकरण और अहिरौली, नदाव, भभुअर क्षेत्र को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल शामिल हो.
गौरतलब है कि विश्वामित्र सेना के संस्थापक राज कुमार चौबे की गर्जना के बाद राजनीतिक माहौल में गर्मी आ गई है. सूत्रों के अनुसार, विश्वामित्र सेना की इस सभा के बाद बक्सर भाजपा के कई संभावित दावेदार बैकफुट पर चले गए हैं. चौबे की यह हुंकार न सिर्फ बक्सर के विकास की मांग है, बल्कि उस उपेक्षा के खिलाफ आवाज़ है जो दशकों से इस पवित्र भूमि के साथ होती आई है।



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