बाहरी ठेकेदारों से कब मिलेगी बक्सर को आजादी! नवम्बर के महीने में दिखी मंगल ग्रह की गर्मी

 बक्सर की मिट्टी में नेता नही पैदा होते है झोला ढोने वाला कार्यकर्ता ! बीजेपी ने बाहरी प्रत्याशी आनन्द मिश्रा पर लगाया दाव ! तो सियासी भूकम्प की झटकों से सहम गए नेता और कार्यकर्ता  ! बोल उठे स्थानीय लोग बाहरी ठेकेदारों से कब मिलेगी बक्सर को आजादी! नवम्बर के महीने में दिखी मंगल ग्रह की गर्मी !

बक्सर- जिले की राजनीति में इस वक्त भूकंप सा आ गया है . भाजपा ने  पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा को जैसे ही बक्सर सदर  विधानसभा  सीट से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा, तो पार्टी के भीतर मानो  ज्वाला मुखी की लावा फूट पड़ा.नेता से लेकर कार्यकर्ता एवं उनके डिजिटल सेना — सबका सुर बदल गया और लोगो ने आनन्द मिश्रा के साथ ही पार्टी के वरीय नेताओ के खिलाफ मोर्चा खोल दी है. भाजपा नेताओं  ने कहा “हमारे शहर को बाहरी ठेकेदारों से कब पार्टी के शीर्षनेतृत्व आज़ादी दिलाएंगे ?” जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के नेता को जिताने के लिए बोजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा ! उसी को ही शीर्षनेतृत्व ने हमारे माथे पर थोप दिया !

स्थानीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओ ने खोला मोर्चा

आनंद मिश्रा का नाम आते ही, जिला भाजपा के कई नेताओं ने मोर्चा खोल दिया. और अपने ही पार्टी के शीर्षनेतृत्व के  मुर्दाबाद” के नारे लगाने लगे,  कहीं नेता और कार्यकर्ता इस बार के प्रत्याशी की ईंट से ईंट बजा देने की धमकी दे रहे है . तो कही भितरघात के सहारे आनन्द मिश्रा को चुनाव हराने के लिए तानेबाने बुने जा रहे है . जिसे देखकर ऐसा लगता है  की अक्टूबर महीने में बक्सर की राजनीति में मंगल ग्रह की गर्मी पड़ रही हो.

अपने हक के लिए लड़ रहे भाजपा नेताओं को मिला विश्वामित्र सेना का साथ !

उधर, बक्सर भाजपा के नेताओ की, बागी तेवर एवं सियासी गर्मी को देख विश्वामित्र सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुलकर कहा “कब तक हमारे बक्सर को लूटते रहेंगे बाहरी प्रत्याशी? इस बक्सर ने केंद्र में मंत्री दिए, सांसद और विधायक दिए, लेकिन हमें क्या मिला? न अस्पताल, न यूनिवर्सिटी, न अनाज की मंडी। आखिर कब तक बाहरी नेताओ की गुलामी करते रहेंगे. और झुनझुना बजाते रहेंगे! जिस जिले में 2 लाख 22 हजार रजिस्टर्ड किसान हो वँहा के अन्नदाता आजादी के 79 साल बाद  आज भी अपने खेतों की उपज को लेकर बेचने के लिए दरदर भटकते हैं, नौजवान रोज़गार की तलाश में प्रदेश भागते हैं — और हमारे भगवान वामन तक जेल की दीवारों में कैद हैं. क्या बक्सर की पवित्र मिट्टी में नेता नही जन्म लेते है?

जिले का है गौरवशाली इतिहास

बीजेपी नेताओं एवं कार्यकर्ताओ की शब्दो से बक्सर की दुर्दशा  की पीड़ा झलक रही थी. सच कहा जाए तो, बक्सर बिहार का वह गौरवशाली जिला है जिसेक इतिहास और अध्यात्म दोनों ही गौरवशाली रहा है. लेकिन आजादी के 78 साल बाद भी यँहा न तो अस्पताल का नाम है, न विश्वविद्यालय का काम है. यंहा युवाओं के सपने महानगरों की धूल में खोते है और किसान अपनी उपज की कीमत के लिए दर-दर ठोकर खाते हैं.

प्रत्येक पांच  साल बाद चुनाव लड़ने पहुँच जाते है प्रवासी पक्षी !

चुनाव के मौसम में प्रतयेक पांच साल में राजनीति के प्रवासी पक्षी यंहा आते हैं —कभी भगवान का नाम लेकर, कभी विकास का वादा लेकर,फिर चुनाव खत्म होते ही बक्सर के हिस्से में आता है सिर्फ “सन्नाटा और उपेक्षा”। अब भाजपा का यह बाहरी दांव लोगों को फिर वही सवाल पूछने पर मजबूर कर रहा है क्या बक्सर भाजपा में वाकई में कोई नेता नहीं बचा ? या फिर यहां की मिट्टी ने नेता पैदा करना बंद कर दिया?”

आनन्द मिश्रा के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी विश्वामित्र सेना !

विश्वामित्र सेना ने एलान किया है कि वह आनंद मिश्रा के खिलाफ स्थानीय नौजवान को मैदान में उतारेगी —ताकि दुनिया देखे कि बक्सर की धरती वीरों की रही है,और हर पाँच साल में कोई “फिरंगी चेहरा” यहां आकर जनता को बेवकूफ नहीं बना सकता .बक्सर की  आज हर गली पूछ रही है “कब आएगा वो दिन, जब बक्सर के लिए बक्सर बोलेगा और विकास का ठेका बाहरी नहीं, बक्सर की  जनता लेगी?”

गौरतलब है कि पूर्व आईपीएस आनन्द मिश्रा को सदर विधानसभा सीट से भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित करने के बाद पार्टी के अंदर ही भूचाल आ गई है. देर रात तक स्थानीय कार्यकर्ताओ एवं नेताओ की बैठकों का दौर चलता रहा इसी बीच विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी मिलने बक्सर भाजपा के कई बड़े चेहरे पहुँच गए. जिससे सियासी गलियारे में खलबली मच गई है.

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