विकास की गाड़ी पटरी से उतरी पर नेता जी की गाड़ियों का काफिला बढ़ता गया !राजनीति जनसेवा या धन सेवा !
राजपुर में विकास का नहीं, नेताओं की संपत्ति का बढ़ा ग्राफ ! टूटी सड़क, कीचड़ भरी रास्ते, बीमार अस्पताल , और सुविधा विहीन विद्यालय में बच्चों के लिखे जा रहे है भविष्य ! सत्ता के सौदागर बेफिक्र ! "जनसेवा" के नाम पर “धनसेवा” का महायज्ञ जारी ! अब राजपुर पूछ रहा है विकास हुआ या बस खुद के घर का विस्तार?
जन सेवा या धन सेवा किसका हुआ बिकास !
बक्सर- जिले की 202 राजपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है. यह वही सीट है जहां जनता ने कई बार भरोसे के बीज बोए, लेकिन हर बार नेताओं ने सत्ता की फसल काट ली ! 2010 और 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने जदयू नेता संतोष निराला को भारी बहुमत से जिताकर विधानसभा भेजा . उम्मीद थी कि अब राजपुर की तकदीर बदलेगी, लेकिन हुआ उल्टा सड़कों पर धूल उड़ती रही, गांवों में अंधेरा पसरा रहा और स्कूलों में ताले लटकते रहे! परिवहन मंत्री बनने के बाद भी निराला जी का विकास सिर्फ रिपोर्टों और भाषणों में दिखाई दिया, जमीनी हकीकत में नहीं !
उम्मीदे टूटी नेता जी नही !
2010 और 2015 के बिहार विधानसभा में राजपुर की जनता ने जो उम्मीदें लगाई थीं, वे कागजों में दम तोड़ गईं! जब जनता के सब्र का बांध टूटा, तो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उसने ‘निराला विकास मॉडल’ को रिजेक्ट कर कांग्रेस के विश्वनाथ राम को मौका दिया. लोग सोच रहे थे कि अब सही मायनों में विकास की गंगा बहेगी! देश के सबसे पुरानी पार्टी के नेता विकास का एक नई लकीर खीचेंगे ! लेकिन हुआ वही जो हर चुनाव के बाद होता है वादे हवा में उड़ गए, और नेताओं के बंगले आसमान छूने लगे !
चुनावी वादा बना जुमला !
कांग्रेस विधायक विश्वनाथ राम ने जनता के बीच वादा किया था “धनसोई को प्रखंड का दर्जा दिलाना मेरा संकल्प है.” लेकिन पाँच साल गुजर गए, और धनसोई आज भी इंतज़ार में है. विधायक जी कहते हैं “इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी तो वादा पूरा होगा.” यानी जनता का भरोसा फिर से अगली सरकार की थाली में परोसा जा रहा है. लेकिन अब जनता पूछ रही है “कब तक इंतज़ार करेंगे?”क्योंकि जिस राजपुर की जनता आज भी कीचड़ भरी सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर है, वहीं उनके जनप्रतिनिधि लग्जरी कारों में फर्राटा भर रहे हैं. आलीशान बंगले, कीमती जमीनें, चमचमाते शोरूम और सुरक्षा से लैस काफिले यही है पिछले 15 सालों के राजपुर के “विकास” की असली तस्वीर!
जनता के तीखे सवाल नेता जी हो गए है बेहाल !
“नेता जी, जिन सड़कों पर आपकी गाड़ियाँ दौड़ती हैं, क्या उन पर कभी आपने नंगे पांव चला है?”“जिन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, क्या कभी आपने वहां इलाज करवाया है?” “जिन स्कूलों में बच्चों के पास बेंच नहीं, क्या आपके बच्चे वहाँ पढ़ते हैं?” राजपुर में अब चर्चा है कि राजनीति जनसेवा नहीं, निवेश बन गई है! नेता टिकट खरीदते हैं, जनता के वोटों से ब्याज सहित वसूली करते हैं! पंचायत से लेकर पटना तक हर गलियारे में यही सवाल गूंज रहा है “क्या विधायक बनने का मतलब जनहित है या निजी हित?”
अंधेरे में दिन काट रही है जनता रौशनी में मलाई काट रहे है नेता !
राजपुर के गांवों में बिजली की लुकाछिपी जारी है, युवाओं का पलायन थमा नहीं, किसान सिंचाई के लिए आसमान निहारते हैं! लेकिन नेताओं के लिए सब ठीक है क्योंकि उनका घर रौशन है, उनका परिवार सुरक्षित है, और उनकी संपत्ति बढ़ती जा रही है!राजपुर की जनता अब खामोश नहीं है. धीरे-धीरे वह समझ रही है कि ‘भाषण’ और ‘विकास’ में फर्क होता है। पोस्टर, बैनर और दीवारों पर मुस्कराते चेहरे के पीछे नेता जी की मकसद जन सेवा नही धन सेवा है!
जनता की थाली खाली ! नेता जी की जेब भारी !
“नेता जी, जब जनता की थाली खाली है, तो आपकी जेब कैसे भारी है?”“जब गांवों में अंधेरा है, तो आपके बंगले में इतनी रोशनी क्यों है?” “जब बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं, तो आपके बच्चों की पढ़ाई विदेशों में क्यों हो रही है?” राजपुर की कहानी अब सवाल बन गई है! एक ऐसा सवाल जो हर मतदाता के दिल में गूंज रहा है.और शायद यही वह जागरूकता है जो आने वाले चुनाव में नेताओं की नींद हराम कर देगी!

Comments
Post a Comment