बक्सर की मिट्टी में उबल रही सियासी बगावत! विश्वामित्र सेना जनता की बनेगी आवाज़ या सत्ता की साज़िश तोड़ने वाला केवल तूफ़ान ! छठ में आने वाले बिहारी प्रवासी किसका बिगाड़ेंगे खेल !?

 छठ में लौटे प्रवासी, चुनाव में बदलेंगे सियासत का समीकरण! टिकट का खेल, या आस्था के नाम पर धन की रेल! बक्सर की मिट्टी में उबल रही सियासी बगावत! विश्वामित्र सेना जनता की बनेगी आवाज़ या सत्ता की साज़िश तोड़ने वाला केवल तूफ़ान?

छठ में लौटे प्रवासी मतदाता किसका बिगाड़ेंगे खेल !

बक्सर- बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख़ों के ऐलान के साथ ही बक्सर की सियासत में जैसे बारूद में चिंगारी लग गई हो ! जिले की चारों सीटों—बक्सर, डुमरांव, राजपुर और ब्रह्मपुर—पर अब 6 नवंबर को मतदान होगा, और 14 नवंबर को नतीजे सामने आएंगे. इस बार चुनावी गणित को सबसे ज़्यादा उलझा रही है छठ पूजा में लौटने वाले प्रवासी मतदाताओं की भीड़ ! राजनीतिक पंडित भी मान रहे हैं कि इनकी उपस्थिति से किसी भी दल का समीकरण उलट सकता है. 

टिकट के लाइन में खड़े दावेदार ! अब नही रहे वफादार !

अपने चहेते दावेदार की पोस्टर दिखाती महिलाये

 असली कहानी सिर्फ़ मतगणना की तारीख़ों से आगे की है. बक्सर की राजनीति इस बार नेताओं से ज़्यादा जनता की नाराज़गी में डूबी दिख रही है. जो चेहरे कल तक ‘सेवा’ के नाम पर टिकट की लाइन में थे, वे आज ‘धोखे’ की टीस लिए अंदर ही अंदर बगावत की चिंगारी सुलगा रहे हैं. कहा जा रहा है कि कई राजनीतिक मठाधीशों ने टिकट दिलाने के नाम पर नए कार्यकर्ताओं से मोटी रकम वसूली, लेकिन जब ‘सौदे’ अधूरे रह गए तो वफादारी का चेहरा भी उतर गया. अब वही ठगे गए कार्यकर्ता पर्दे के पीछे से खेल बिगाड़ने को तैयार बैठे हैं !

चुनाव से पहले विश्वामित्र सेना की चुनावी शंखनाद से राजनीति में भूचाल !

ऐसे माहौल में विश्वामित्र सेना का उभार बक्सर की राजनीति में भूचाल लेकर आया है! दलसागर के ऐतिहासिक खेल मैदान में जब इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सनातन समागम के बहाने शक्ति प्रदर्शन किया, तो राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई! देखने में यह धार्मिक आयोजन था, लेकिन इसकी गूंज सीधे सियासत की नसों तक पहुंची! मंच से उठी आवाज़ें ‘कृषि’, ‘रोजगार’, ‘शिक्षा’ और ‘विकास’ की बात कर रही थीं . वो बातें जिन पर पारंपरिक दलों ने अब तक सिर्फ घोषणाएं की हैं!

क्या कहते है राजनीतिक पंडित !

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विश्वामित्र सेना मैदान में ‘तीसरी शक्ति’ के रूप में उतरती है, तो यह तय है कि बक्सर का चुनावी गणित बिखर जाएगा! INDIA गठबंधन हो या NDA, दोनों खेमों के लिए यह संगठन वोटों की बड़ी सेंध साबित हो सकता है! क्योकि ? बक्सर को धार्मिक नगरी कहा जाता है जहां एक साधारण मुंडन संस्कार में लाखों लोग रामरेखा घाट पहुंच जाते हैं. इतनी आस्था के बावजूद यह शहर विकास के नाम पर उपेक्षा का शिकार रहा है! न विश्वामित्र कॉरिडोर पर काम हुआ, न एयरपोर्ट का सपना पूरा हुआ, न पांचकोशी धाम को राष्ट्रीय पहचान मिली! किसान अपनी उपज बेचने को मंडी तलाशते हैं, और युवा रोजगार के लिए शहर छोड़ने को मजबूर हैं! ऐसे में विश्वामित्र सेना की आवाज़ सिर्फ़ एक राजनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि एक सामाजिक पुकार बनकर उभरी है!

जनता अब वादों पर नही कामो पर करेगी भरोसा !

वहीं पुराने राजनीतिक दल के नेता इसे चुनावी “डिस्टर्बर” मान रहे हैं!  लेकिन जनता के बीच इस संगठन को ‘जनता का विकल्प’ के रूप में देखा जा रहा है. गांव-गांव में इसकी चर्चा है, और युवाओं का जोश हाई है. बक्सर की जनता अब वादों से नहीं, बदलाव से उम्मीद चाहती है!भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और टूटी सड़कों के बीच यह जिला आज भी कीचड़ भरी रास्तों में अपनी पहचान खोज रहा है! और शायद इस बार, यह पहचान किसी पार्टी के झंडे से नहीं, बल्कि उस जनशक्ति से बनेगी जो एक नई कहानी लिखने को तैयार है! 

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव का तिथियों के एलान होते ही.कीचड़ भरी सड़को पर सफेद कुर्ता पैजामा में नेता जी उन सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी नजर आने लगे है. जंहा पिछले पांच बर्षो में उंन्होने एक बार भी दस्तक नही दी! देखने वाली बात यह होगी कि जनता की खामोशी और युवाओं की नराजगी क्या अपनी समस्याओं को लेकर मतदान करती है? या जातपात के समीकरण में इस बार भी असली मुद्दे  चुनाव से गायब हो जाते है!

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